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बारिश की लंबी खेंच, तेज धूप और हवा से फसलों पर मंडराया खतरा, किसानों की बढ़ाई बेचेनी।

Neemuch headlines July 13, 2026, 6:41 pm Technology

चीताखेड़ा ।क्षेत्र में खरीफ फसलों की बोवनी और अंकुरण के लंबे अंतराल के बाद बारिश का सिलसिला थमने से किसानों की चिंता बढ गई है। पिछले पांच दिनों से बारिश नहीं होने और तेज धूप और लंबी हवा के कारण खेतों की नमी तेजी से घट रही है। इससे सोयाबीन, मक्का जैसी फसलों के अंकुरण पर असर पडने की आशंका है। किसानों का कहना है कि यदि जल्द अच्छी बारिश नहीं हुई तो चिंता बढ़ सकती है जिससे उनकी लागत और आर्थिक बोझ दोनों बढ जाएंगे। बारिश के बाद थमा मानसून, खेतों में नमी घटी खरीफ सीजन की शुरुआत में हुई अच्छी बारिश से उत्साहित किसानों ने क्षेत्रों में बोवनी पूरी कर ली थी। शुरुआती बारिश से खेतों में पर्याप्त नमी थी, लेकिन इसके बाद मानसून की रफ्तार धीमी पड गई। अधिकतर किसानों ने खेतों बुवाई की है जिसके बाद बारिश नहीं होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है. लगातार तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण मिट्टी की नमी तेजी से खत्म हो रही है। खेतों में डाले गए बीज जो पौधे बन चुके है वह अब बारिश का इंतजार कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि समय पर पानी नहीं मिला तो फसल के प्रभावित होने के साथ खराब होने का खतरा भी बढ जाएगा। * बढ़ गई लागत *-- किसानों का कहना है कि खरीफ सीजन की पहली बोवनी सबसे महत्वपूर्ण होती है। यदि दोबारा बोवनी करनी पड़ी तो बीज, मजदूरी, ट्रैक्टर और डीजल सहित कृषि कार्यों पर दोबारा खर्च करना पडेगा। इसके पहले भी करीब 30 फीसदी किसान खेतो में दो से तीन बार बोवनी कर चुके है। किसी ने 3 बार तो किसी ने 2 बार बुवाई कर दी है -कन्हैयालाल माली ने बताया कि मैंने मेरे 12 बीघा खेत में अभी तक तीन बार बुवाई कर चुका हूं फिर भी बारिश का अता-पता नहीं है। 12 बीघा खेत में सोयाबीन का 10 हजार रुपए क्विंटल के महंगे भाव का 6 क्विंटल बीज, 18 हजार बुवाई ट्रैक्टर भाड़ा, 3 बैग डीएपी खाद सहित कुल 84 हजार रुपए का आर्थिक मार झेल चुका हूं। फिर भी बारिश का कोई ठिकाना नहीं है। किसान रामनारायण परमार ने बताया कि शुरुआती बारिश के बाद अच्छी फसल की उम्मीद थी लेकिन अब बारिश नहीं होने से चिंता बढ़ गई है। किसान रतनलाल माली ने बताया कि मैं ढ़ाई बीघा खेत में दो बार बुवाई कर चुका हूं। बुवाई करते ही दोनों बार बारिश हो गई जिससे बीज अंकुरित नहीं हो सका। यदि अगले कुछ दिनों में पानी नहीं गिरा तो फसलों पर संकट की नौबत आ सकती है। जिन किसानों ने दो से तीन बार बुवाई की है बुवाई के बाद बारिश नहीं होने से मिट्टी की परत सुख गई है जिससे बीज के अंकुरित होने में परेशानी हैं। इस वक्त बारिश की शक्त आवश्यकता है। भूजल और जलस्त्रोतों को लेकर भी बढ़ी चिंता - किसानो ने बताया कि बारिश की कमी केवल फसलों के लिए ही नहीं बल्कि भूजल स्तर के लिए भी चिंता का विषय है। पर्याप्त वर्षा नहीं होने से नदी, तालाब, कुएं और अन्य जलस्रोतों में पानी की आवक नहीं हुई है जिससे जलश्रोत खाली पड़े हुए हैं। यदि मानसून का यह अंतराल लंबा खिंचता है तो आगे चलकर सिंचाई और पेयजल व्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है।

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