शांति धारा अभिषेक समारोह में उमड़े समाज जन,

केबीसी न्यूज़ May 15, 2026, 3:20 pm Technology

अभिषेक की आहुति के साथ ही गूंजा दिगंबर जैन मंदिर का धाम

आचार्य शांतिसागर जी महाराज ने दिगंबर जैन संतो के विचरण के लिए जागरूक कर प्रेरणा दी--सुप्रभ सागर महाराज

नीमच। प्राचीन काल में 1800 ईस्वी में भगवान पुष्प दंत से लेकर धर्मनाथ तक धर्म विच्छेद हो रहा था। उस समय आचार्य शांति सागर जी महाराज ने पूरे भारत देश में विहार कर लोगों को दिगंबर जैन संतो के आहार विहार चर्या से अवगत कराया और लोगों को दिगंबर जैन संतों को विचरण और विहार के लिए सहयोग करने के लिए प्रेरणा प्रदान की थी उसके बाद आचार्य शांति सागर से लेकर आज तक धर्म निरंतर प्रवाह मान है। शांति सागर जी महाराज की प्रेरणा से ही सभी जीवो को मुक्ति का मार्ग मिला ।आचार्य शांति सागर जी महाराज का जिस दिन जन्म हुआ उसी दिन उन्हें मुक्ति मिली थी और उसी दिन दीक्षा मिली थी तीनों तिथि बहुत कम तीर्थंकरों की मिलती है।यह बात सुप्रभ सागर जी महाराज ने कहीं ।वे आचार्य शांति सागर संत निलय भवन लोकार्पण समारोह के निमित्त दिगंबर जैन मंदिर में आयोजित शांति धारा अभिषेक धर्म सभा में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि आचार्य शांति सागर जी महाराज पारस प्रभु और महावीर स्वामी ने पूर्व जन्म में हाथी के जन्म में भी प्रबोध को प्राप्त किया और अगले जन्म में तीर्थंकर पद को प्राप्त किया। हम मानव जन्म के बाद भी प्रबोध की आत्मा शांति का मार्ग नहीं प्राप्त कर पा रहे हैं। हमें आचार्य शांति सागर महाराज के उपदेशों को जीवन में आत्मसात कर मुक्ति के मार्ग को प्राप्त करना चाहिए और अपनी आत्मा का कल्याण करना चाहिए। संयम जीवन का पालन नहीं कर हम मृत्यु को नहीं अपने आप को धोखा दे रहे हैं। आत्मा को सच्चा सुख भौतिक संसार में नहीं वैराग्य जीवन में ही मिलता है। आत्म शांति को हमें भीतर से प्रकट करना चाहिए लेकिन हम भौतिक संसाधनों में सुख को ढूंढ रहे हैं। चिंता का विषय है। शांति सागर महाराज के उपदेशों पर चलकर हम पाप कर्मों की निर्जरा कर सकते हैं और अपना आत्म कल्याण कर सकते हैं। धर्म सभा में मुनी वैराग्य सागर जी महाराज का सानिध्य भी मिला। इस अवसर पर आचार्य वर्धमान सागर महाराज, सुमित सागर महाराज के दिशा निर्देशन में मुनि वैराग्य सागर महाराज मुनिश्री सुप्रभ सागर जी महाराज के सानिध्य में पुस्तक बाजार नीमच पर दिगंबर जैन मंदिर के समीप नवनिर्मित आचार्य शांतिसागर संत निलय भवन का लोकार्पण समारोह के उपलक्ष्य में शुभारंभ सुबह 40 विद्युत केंद्र के पीछे आचार्य शांति सागर मार्ग स्थित दिगंबर जैन समाज मंदिर में अभिषेक व शांतिधारा से हुआ। पूरा मंदिर परिसर वैदिक मंत्र उच्चारण शंख ध्वनि और जयकारों से गूंजायमान रहा। मंदिर में अभिषेक होते ही वातावरण जय शांति सागर जी महाराज और पारस प्रभु की जय हो के साथ गुंज उठा । इसके साथ ही अभिषेक शांति धारा में लोगों ने उत्साह के साथ आहुति आदि। अभिषेक के सभी यजमान ने पूजा अर्चना में सहभागिता निभाई। कार्यक्रम में जब पंडित पारस जैन इंदौर ने सभी धार्मिक आयोजन अनुष्ठान करवाएं धार्मिक आयोजन का सबसे भावपूर्ण श्रद्धा अभिषेक की पूर्णाहुति का रहा जब श्रद्धालुओं ने अभिषेक में आहुति देकर परिवार और क्षेत्र की सुख समृद्धि की कामना की। पूर्णाहुति अवसर पर संत शाला निर्माण और आयोजन में विशेष सहयोग देने वाले सहयोग कर्ताओं का सम्मान भी किया गया। दिगंबर जैन समाज के अध्यक्ष विजय विनायका जैन ब्रोकर्स एवं मीडिया प्रभारी अमन विनायका ने बताया कि इस अवसर पर कार्यक्रम का शुभारंभ आचार्य शांति सागर जी महाराज के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्जवलित कर अतिथियों के द्वारा किया गया। मुनि श्री के पाद प्रक्षालन एवं शास्त्र दान समाज जनों द्वारा प्रदान किया गया। इस अवसर पर शांति धारा विधान के विधिवत पूजा की गई इस अवसर पर विधानाचार्य पंडित पारस जैन इंदौर ने समयक दर्शन ज्ञान दर्शन चारित्राय दर्शनाय तपाय नमः ओम शांति नाथाय नमः का उच्चारण कर आहुतियां दी गई। संगीतकार आयुष जैन बूंदी राजस्थान ने बोलो बार-बार जयकारा शुभ घड़ी आई है मेरे गुरुवर.. रहे हम महावीर के बनकर कहो हम जैन हैं धर्म से जैन है कर्म से जैन है नाता जोड़ लिया प्रभु से इस जग की माया नगरी से रिश्ता तोड़ लिया आदि ...विभिन्न भजन प्रस्तुत किये जिस पर समाज जनों ने भक्ति नृत्य किया। शांति धारा और निवार्ण का लड्डू , चढ़ाया :- संत निलय लोकार्पण कार्यक्रम की पावन श्रृंखला में 15 मई शुक्रवार को दिगंबर जैन मंदिर पर अभिषेक ,शांति धारा, शांतिनाथ विधान निवार्ण लड्डू, दोनों मुनि श्री के प्रवचन, आहारचर्या स्वाध्याय, गुरुभक्ति प्रश्न आपके उत्तर मुनि श्री के, शाम 7:30 बजे 108 दीपक से महाआरती सहित विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए ।

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