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अहिल्याबाई की 300वीं जयंती पर महेश्वर बना सांस्कृतिक राजधानी, सेक्रेड रिवर फेस्टिवल 2026 शुरू

Neemuch headlines February 21, 2026, 6:27 pm Technology

अहिल्याबाई की 300वीं जयंती पर महेश्वर बना सांस्कृतिक राजधानी, सेक्रेड रिवर फेस्टिवल 2026 शुरू पवित्र नगरी महेश्वर में सेक्रेड रिवर फेस्टिवल 2026 का जब भव्य आगाज हुआ, तो हर आंख में उत्साह और हर चेहरे पर श्रद्धा साफ झलक रही थी। यह सिर्फ एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि आस्था और इतिहास का जीवंत संगम था। देवी अहिल्याबाई होल्कर की 300वीं जयंती वर्ष पर आयोजित यह महोत्सव महेश्वर के ऐतिहासिक नर्मदा तट को फिर से जीवंत कर गया। जैसे ही नर्मदा वंदना के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई, पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा। देश-विदेश से आए पर्यटक, कला प्रेमी और स्थानीय लोग इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने। ये महेश्वर के ऐतिहासिक घाटों पर आयोजित सेक्रेड रिवर फेस्टिवल 2026 ने पहले ही दिन अपनी भव्यता का एहसास करा दिया। मां नर्मदा की लहरों के बीच सजे मंच ने आयोजन को दिव्यता से भर दिया। दीपों की कतारें, भव्य प्रकाश व्यवस्था और पारंपरिक सजावट ने पूरे घाट को अलौकिक बना दिया। इस तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक महोत्सव का आयोजन देवी श्री अहिल्याबाई होलकर मेमोरियल चैरिटेबल ट्रस्ट और अहिल्या फोर्ट द्वारा किया जा रहा है। आयोजकों का उद्देश्य केवल सांस्कृतिक प्रस्तुति देना नहीं, बल्कि अहिल्याबाई की विरासत को जन-जन तक पहुंचाना है। पहले दिन नर्मदा वंदना के साथ जैसे ही शंखनाद हुआ, वहां मौजूद हर व्यक्ति भावुक हो उठा। ऐसा लगा जैसे नर्मदा स्वयं इस उत्सव की साक्षी बन रही हों। देवी अहिल्याबाई होल्कर की 300वीं जयंती: विरासत का सम्मान देवी अहिल्याबाई होल्कर भारतीय इतिहास की उन महान शासकों में गिनी जाती हैं, जिन्होंने सत्ता को सेवा का माध्यम बनाया। इस वर्ष उनकी 300वीं जयंती पर सेक्रेड रिवर फेस्टिवल 2026 को खास थीम दी गई है, “अहिल्याबाई होल्कर: भारत भर में पदचिह्न”। अहिल्याबाई ने देशभर में मंदिर, घाट और धर्मशालाओं का निर्माण कराया। काशी से लेकर सोमनाथ तक उनकी छाप आज भी देखी जा सकती है। महेश्वर को उन्होंने अपनी राजधानी बनाया और इसे सांस्कृतिक व आध्यात्मिक केंद्र के रूप में विकसित किया। सेक्रेड रिवर फेस्टिवल 2026 के जरिए उसी विरासत को फिर से जीवंत किया जा रहा है। यह महोत्सव बताता है कि सुशासन और लोककल्याण का मॉडल सदियों पहले भी मौजूद था। गुरबानी कीर्तन ने भक्ति में डुबोया नर्मदा तट उद्घाटन दिवस का मुख्य आकर्षण गुरबानी कीर्तन रहा। प्रख्यात गायक उस्ताद गुरमीत सिंह संत खालसा ने अपने समूह के साथ जब शबद प्रस्तुत किए, तो पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया। उनकी आवाज की गूंज नर्मदा तट से टकराकर जैसे हर दिल तक पहुंच रही थी। शांति, प्रेम और एकता का संदेश देने वाले इस कीर्तन ने दर्शकों को देर तक मंत्रमुग्ध रखा। कई लोग भावुक होकर आंखें बंद कर भक्ति में लीन हो गए। सेक्रेड रिवर फेस्टिवल 2026 के पहले दिन ही यह साफ हो गया कि यह आयोजन केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि आत्मा को छू लेने वाला अनुभव है। सत्त्रिया नृत्य से सजी सांस्कृतिक शाम असम की प्रसिद्ध सत्त्रिया नृत्यांगना मीनाक्षी मेधी ने अपनी प्रस्तुति से दर्शकों का दिल जीत लिया। पारंपरिक वेशभूषा और शास्त्रीय मुद्राओं से सजे इस नृत्य ने पूर्वोत्तर भारत की समृद्ध संस्कृति को जीवंत कर दिया। उनकी हर भाव-भंगिमा में भक्ति और समर्पण झलक रहा था। लय और ताल के साथ प्रस्तुत सत्त्रिया नृत्य ने दर्शकों को एक अलग ही दुनिया में पहुंचा दिया। सेक्रेड रिवर फेस्टिवल 2026 की खास बात यही है कि यह भारत के अलग-अलग हिस्सों की संस्कृति को एक मंच पर लाता है। आयोजन की खासियत सेक्रेड रिवर फेस्टिवल 2026 का प्रभाव केवल सांस्कृतिक नहीं, बल्कि आर्थिक भी है। महेश्वर में होटल, स्थानीय बाजार और हस्तशिल्प की दुकानों में रौनक बढ़ गई है। देश-विदेश से आए पर्यटक यहां की साड़ियां, हस्तकला और पारंपरिक वस्त्र खरीद रहे हैं। इस आयोजन से स्थानीय कलाकारों और कारीगरों को भी मंच मिला है। यह महोत्सव पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रहा है।

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