भोपाल। एक साथ कई सिस्टम सक्रिय, बदला मौसम का मिजाज, आज भी ग्वालियर समेत 8 जिलों में बारिश का अलर्ट अलग-अलग स्थानों पर सक्रिय मौसम प्रणालियों के प्रभाव से आज गुरुवार को भी 8 जिलों में बारिश की चेतावनी जारी की गई है। इस दौरान कहीं-कहीं मेघगर्जन, तेज हवा के साथ बिजली चमकने की भी संभावना है। इससे पहले बुधवार (18 फरवरी 2026) को कई जिलों में तापमान 7 से 9 °C के बीच रहा। सबसे कम न्यूनतम तापमान 7.0°C करौंदी (कटनी) में दर्ज किया गया। इसके अलावा रतलाम, श्योपुर, मुरैना, मंदसौर, नीमच, गुना व शाजापुर समेत कई जिलों में तेज आंधी के साथ बारिश हुई। गुरुवार को इन जिलों में अलर्ट मध्यप्रदेश पुलिस की लूट, डकैती, चोरी और ठगी के मामलों में कार्रवाई, लगभग 61 लाख रूपए से अधिक की संपत्ति जप्त मध्यप्रदेश पुलिस की लूट, डकैती, चोरी और ठगी के मामलों में कार्रवाई, लगभग 61 लाख रूपए से अधिक की संपत्ति जप्त ग्वालियर, भिंड, शिवपुरी, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर और पन्ना जिलों में बारिश और गरज-चमक की संभावना है।
भोपाल, इंदौर, उज्जैन, रतलाम, धार और अलीराजपुर में बादल छाए रहने व कहीं-कहीं बूंदाबांदी की संभावना जताई गई है। खंडवा में तापमान 35 °C के पार बीते दिन कल्याणपुर (शहडोल) में 7.5 °C, पचमढ़ी (नर्मदापुरम) में 8.4 °C, रीवा में 8.6 °C और चित्रकूट (सतना) में 9.1 °C दर्ज किया गया। खंडवा में 35.1 °C, खरगौन में 34 °C, नर्मदापुरम में 32.8 °C, धार में 32.5 °C और रतलाम / मंडला में 32.2 °C दर्ज हुआ। भोपाल, इंदौर, उज्जैन और जबलपुर में भी तापमान सामान्य से कम दर्ज हुआ। 2 दिन ऐसा ही रहेगा मौसम, 22 फरवरी से फिर बदलेगा मौसम विज्ञान केंद्र, भोपाल द्वारा जारी दैनिक रिपोर्ट के मुताबिक, वर्तमान में अलग-अलग स्थानों पर पश्चिमी विक्षोभ और चक्रवातीय परिसंचरण सक्रिय है। एक ट्रफ़ पूर्व-मध्य अरब सागर से मध्य प्रदेश के केंद्र तक गुजरात एवं दक्षिण-पूर्व राजस्थान से होकर माध्य समुद्र तल से 1.5 किमी की ऊंचाई पर विस्तृत है।
उत्तर-पूर्व भारत के ऊपर लगभग 213 किमी प्रति घंटा की गति से माध्य समुद्र तल से 12.6 किमी की ऊंचाई पर पश्चिमी जेट स्ट्रीम हवाएं बह रही हैं। इसके असर से 19 और 20 फरवरी को ग्वालियर, चंबल और सागर संभाग के जिलों में कहीं-कहीं बारिश और आकाशीय बिजली की संभावना जताई गई है। 21 फरवरी से मौसम प्रणालियों के कमजोर होने से मौसम साफ होने लगेगा। किसानों को सलाह दी है कि वे गरज-चमक और बिजली गिरने की स्थिति में खुले खेतों में न जाएं और अपनी तैयार फसलों को सुरक्षित स्थानों पर रखने के उपाय करें। यह बारिश गेहूं और चने की फसल पर असर डाल सकती है।