अंग्रेजी तारीख 23 मई 2026 ई.। सूर्य उत्तरायण, उत्तर गोल, वसंत ऋतु। राहुकाल सुबह 09:00 से 10:30 बजे तक। अष्टमी तिथि अगले दिन प्रातः 04 बजकर 27 मिनट (24 मई) तक उपरांत नवमी तिथि का आरंभ। मघा नक्षत्र रात्रि 02 बजकर 09 मिनट (24 मई) तक उपरांत पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र का आरंभ। ध्रुव योग प्रातः 06 बजकर 14 मिनट तक उपरांत व्याघात योग का आरंभ। विष्टि (भद्रा) करण दोपहर 04 बजकर 40 मिनट तक उपरांत बव करण का आरंभ। चंद्रमा दिन रात सिंह राशि पर संचार करेगा।
महत्वपूर्ण विवरण तिथि शुक्ल अष्टमी –
अगले दिन प्रातः 04:27 बजे (24 मई) तक, फिर नवमी योग ध्रुव – प्रातः 06:14 बजे तक, फिर व्याघात करण विष्टि (भद्रा) – दोपहर 04:40 बजे तक करण बव – अगले दिन प्रातः 04:27 बजे (24 मई) तक सूर्य और चंद्रमा की स्थिति सूर्योदय का समय: प्रातः 05:26 बजे
सूर्यास्त का समय: सायं 07:10 बजे
चंद्रोदय का समय: दोपहर 12:04 बजे
चंद्रास्त का समय: रात्रि 01:05 बजे (24 मई)
आज के व्रत त्योहार- दुर्गा अष्टमी।
आज का शुभ मुहूर्त 23 मई 2026 :
अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11 बजकर 51 मिनट से 12 बजकर 45 मिनट तक।
अमृत काल रात्रि 11 बजकर 45 मिनट से मध्यरात्रि 01 बजकर 21 मिनट (24 मई) तक।
ब्रह्म मुहूर्त सुबह 3 बजकर 55 मिनट से 4 बजकर 41 मिनट तक।
आज का अशुभ मुहूर्त 23 मई 2026 : सुबह 09:00 से 10:30 बजे तक
राहुकाल रहेगा। सुबह 06:00 से 07:30 बजे
तकगुलिक काल रहेगा। दोपहर 01:30 से 03:30 बजे तक यमगंड रहेगा।
आज का नक्षत्र आज चंद्रदेव मघा नक्षत्र में विराजमान रहेंगे। मघा नक्षत्र: रात्रि 02:09 बजे (24 मई) तक स्थान: 0° सिंह राशि से 13°20’ सिंह राशि तक नक्षत्र स्वामी: केतु राशि स्वामी: सूर्यदेव देवता: पितर (पूर्वज) प्रतीक: शाही सिंहासन सामान्य विशेषताएं: इस नक्षत्र में जन्मे लोग उदार, साहसी और मेहनती होते हैं। इनके व्यवहार में एक शाही गरिमा और स्पष्टवादिता दिखाई देती है। परंपराओं का सम्मान करने के साथ-साथ ये स्वभाव से थोड़े भावुक भी हो सकते हैं।
आज का उपाय :-
आज शनि देव के मंदिर में सरसों के तेल का दीपक जलाएं। शनिवार के दिन काले तिल और उड़द की दाल का दान करना मानसिक शांति लाता है और कुंडली के दोषों को दूर करने में सहायक होता है।