मंदसौर। मध्यप्रदेश और राजस्थान की सीमा पर स्थित मंदसौर जिले की दो विधानसभाओं सुवासरा और गरोठ के कई गांवों में इन दिनों तनाव और असमंजस की स्थिति बनी हुई है। राजस्थान वन विभाग द्वारा मध्यप्रदेश के नागरिकों को नोटिस जारी किए जाने के बाद अब यह मामला तूल पकड़ चुका है। इस गंभीर विषय को लेकर सुवासरा विधायक हरदीप सिंह डंग ने सोमवार को भोपाल में मुख्य सचिव अनुराग जैन और राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव विवेक पोरवाल से मुलाकात की और प्रदेश सरकार के समक्ष अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया। मामला मंदसौर जिले के सुवासरा विधानसभा के ग्राम धनवाड़ा, रामनगर, देवपुरा नागर और गरोठ विधानसभा के ग्राम धतुरिया का है। इन गांवों के निवासियों के पास आधार कार्ड, वोटर आईडी, राशन कार्ड और भूमि संबंधी समस्त दस्तावेज मध्यप्रदेश शासन द्वारा जारी किए गए हैं। ग्रामीण दशकों से मध्यप्रदेश की सभी शासकीय योजनाओं (लाड़ली बहना, किसान सम्मान निधि आदि) का लाभ ले रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि राजस्थान वन विभाग अचानक इन जमीनों को अपनी सीमा में बताकर जबरिया नोटिस थमा रहा है। इसे न केवल "अवैधानिक" बल्कि विकास कार्यों में "रोड़ा" अटकाने की कोशिश माना जा रहा है। विधायक हरदीप सिंह डंग ने अधिकारियों को अवगत कराया कि राजस्थान वन विभाग की यह कार्रवाई पूरी तरह गैर-कानूनी है। उन्होंने मांग की है कि दोनों राज्यों के बीच सीमा का पुनः सीमांकन किया जाए ताकि विवाद जड़ से खत्म हो। मध्य प्रदेश के नागरिकों को दिए जा रहे नोटिसों पर तत्काल रोक लगाई जाए। प्रशासनिक स्तर पर राजस्थान सरकार से बात कर नागरिकों के उत्पीड़न को रोका जाए। सिम्पल समाचार से चर्चा में हरदीप सिंह डंग, विधायक, सुवासरा ने कहा की"हमारे नागरिक वर्षों से मध्यप्रदेश के राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज हैं। राजस्थान वन विभाग द्वारा उन्हें परेशान करना और विकास परियोजनाओं में अवरोध उत्पन्न करना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मैंने मुख्य सचिव से इस पर त्वरित हस्तक्षेप का आग्रह किया है।" क्या होगा अगला कदम? मुख्य सचिव अनुराग जैन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए राजस्व विभाग को निर्देश दिए हैं कि वे वस्तुस्थिति की जांच करें। संभावना है कि जल्द ही दोनों राज्यों के कलेक्टर स्तर की वार्ता होगी ताकि सीमा विवाद का स्थाई निराकरण किया जा सके।