चंद्रदेव आज मकर राशि के धनिष्ठा नक्षत्र में गोचर कर रहे हैं, जो आपके भीतर आत्मविश्वास, धैर्य और परिश्रम करने की शक्ति को बढ़ाएंगे। सूर्य , मंगल और चंद्र - यह तीनों ग्रह धनिष्ठा नक्षत्र में चल रहे हैं ।
आज परिघ योग भी बन रहा है, जो शत्रुओं पर विजय पाने और कार्यों में सफलता के लिए अनुकूल है। आज सूर्य ग्रहण की घटना भी हो रही है, हालांकि यह भारत में दिखाई नहीं देगा लेकिन ग्रहण के दौरान सावधानी बरतने में कोई नुकसान नहीं है।
अपने महत्वपूर्ण कार्यों के शुभ फल पाने के लिए दोपहर 12:13 से 12:58 तक के
अभिजीत मुहूर्त का लाभ जरूर उठाएं। दोपहर 03:24 से 04:48 तक राहुकाल रहेगा, इस दौरान विवादों से दूर रहें और कोई बी शुभ कार्य करने से बचें।
महत्वपूर्ण विवरण तिथि:-
अमावस्या – सायं 05:30 बजे तक योग: परिघ – रात्रि 12:29 बजे तक (18 फरवरी) करण: नागव – सायं 05:30 बजे तक करण: किंस्तुघ्न – प्रातः 05:17 बजे तक (18 फरवरी) सूर्य और चंद्रमा की स्थिति सूर्योदय का समय: प्रातः 06:58 बजे सूर्यास्त का समय: सायं 06:13 बजे चंद्रोदय का समय:
आज चंद्रोदय नहीं होगा चंद्रास्त का समय: सायं 06:10 बजे समस्त नव ग्रहों की की राशियां (प्रात: 06: 00 बजे) सूर्य देव: कुंभ राशि में स्थित हैं।
चन्द्र देव: मकर राशि में स्थित हैं। मंगल देव: मकर राशि में स्थित हैं। बुध देव: कुंभ राशि में स्थित हैं। गुरु बृहस्पति: मिथुन राशि में स्थित हैं। शुक्र देव: कुंभ राशि में स्थित हैं। शनि देव: मीन राशि में स्थित हैं।
राहु: कुंभ राशि में स्थित हैं। केतु: सिंह राशि में स्थित हैं। आज के शुभ मुहूर्त अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:13 बजे से 12:58 बजे तक अमृत काल: प्रातः 10:39 बजे से 12:17 बजे तक आज के अशुभ समय राहुकाल: दोपहर 03:24 बजे से 04:48 बजे तक गुलिकाल: दोपहर 12:35 बजे से 02:00 बजे तक यमगण्ड: प्रातः 09:47 बजे से 11:11 बजे तक
आज का नक्षत्र आज चंद्रदेव धनिष्ठा नक्षत्र में विराजमान रहेंगे। धनिष्ठा नक्षत्र: सायं 09:16 बजे तक सामान्य विशेषताएं: आत्मविश्वासी, शक्तिशाली, धैर्यवान, परिश्रमी, प्रसिद्धि, सौंदर्य, धन, कलात्मक प्रतिभा, स्वतंत्र स्वभाव, स्वार्थी, लालची, क्रोधी, विश्वसनीय और दानशील नक्षत्र स्वामी: मंगल देव राशि स्वामी: शनि देव देवता: आठ वसु (भौतिक समृद्धि के देवता) प्रतीक: ढोल या बांसुरी आज सूर्य ग्रहण है
17 फरवरी 2026 को लगने वाला सूर्य ग्रहण एक दुर्लभ घटना है, जिसमें चंद्रमा सूर्यदेव के मध्य भाग को ढंक लेगा और किनारे एक चमकती हुई अंगूठी की तरह दिखाई देंगे। यह ग्रहण मुख्य रूप से अंटार्कटिका क्षेत्र में दिखाई देगा, जबकि भारत में अदृश्य होने के कारण इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा।
ज्योतिषीय दृष्टि से, इस समय को आध्यात्मिक चिंतन और दान-पुण्य के लिए अत्यंत शुभ बनाता है। सूर्य ग्रहण को दौरान क्या करें ग्रहण काल के दौरान अपने इष्ट देव के मंत्रों का जाप और मानसिक ध्यान करें। ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान करें और मंदिर की साफ-सफाई करें। अपने अनुसार जरूरतमंदों को अनाज, तिल या वस्त्रों का दान करें। घर में रखे हुए खाने-पीने के सामान में तुलसी के पत्र (पत्ते) डाल दें।