नीमच । जन्म के 1 साल बाद से ही बच्चा मोबाइल के संपर्क में आ रहा है बच्चा बिना मोबाइल के देखे भोजन ग्रहण नहीं करता है। भारतीय प्राचीन संस्कृति में कभी भी मोबाइल का महत्व नहीं था लेकिन आज की युवा पीढ़ी मोबाइल के प्रभाव में आकर अपनी दिशा और दशा दोनों खराब कर रही है चिंतन का विषय है। हम जब भी प्रतिक्रमण या सामायिक की साधना करें। धना करें तो मोबाइल को 1 घंटे तक स्विच ऑफ रखें। मोबाइल के त्याग बिना आत्मा का कल्याण नहीं हो सकता है। मोबाइल का उपयोग सिर्फ कक्षा ग्यारहवीं के बाद विद्यार्थियों को करने देना चाहिए लेकिन माता-पिता छोटे बच्चों को ही मोबाइल से जोड़ देते हैं। नहीं तो मोबाइल विकास का नहीं विनाश का माध्यम बन जाएगा। यह बात साध्वी अमीदर्शा श्री जी मसा ने कही। वे श्री जैन श्वेतांबर भीडभंजन पार्श्वनाथ मंदिर ट्रस्ट नीमच के तत्वावधान में आयोजित अमृत प्रवचन श्रृंखला में बोल रही थी।
उन्होंने कहा कि आयम्बिल ओली जी की तपस्या करते समय मोबाइल का त्याग करना चाहिए और मोबाइल को दूर रखना चाहिए तभी तपस्या सार्थक सिद्ध हो सकती है। यदि हम कोई मांगलिक या सामाजिक कार्यक्रम करें तो भोजन ग्रहण करने वालों की संख्या हजारों में होती है। लेकिन यदि हम हम तपस्या के नियमित उपवास का आयोजन करें तो यह संख्या घट कर 30 प्रतिशत हो जाती है हमें चिंतन करना होगा कि हम तपस्या से इतनी दूर क्यों है और जिस भोजन से हमें बीमारियां बढ़ती है उसे भोजन के इतने पास क्यों है हमें हमारे यदि स्वस्थ जीवन जीना है तो तपस्या की ओर निरंतर अग्रसर बढ़ना होगा तभी हम स्वस्थ जीवन जी सकते हैं यदि हम भोजन संस्कृति की ओर आगे बढ़ते हैं तो हम रोगों को निमंत्रण देते हैं और यदि हम तपस्या संस्कृति की ओर अग्रसर होते हैं तो निरोगी जीवन प्राप्त करने की ओर अग्रसर होते हैं। धर्म संस्कार के बिना मानव का जीवन शून्य है चाहे वह कितनी ही डिग्रियां क्यों न प्राप्त कर ले उसका कल्याण नहीं हो सकता है। मनुष्य मनुष्य को को यदि अपनी आत्म कल्याण करना है तो ओली जी की आराधना की तपस्या करनी चाहिए। तपस्या करने में कठिनाई आए तो परमात्मा की साधना करें और परिणाम मात्मा के ऊपर छोड़ दे यदि सच्चा विश्वास है तो परमात्मा कठिन तपस्या भी सरलता से पूरी हो सकती है। बाबा रामदेव कहते हैं कि हम प्रतिदिन योग कर स्वस्थ रह सकते हैं लेकिन हमारी विचारधारा पवित्र होना भी आवश्यक है यदि हम ओली जी की तपस्या की आराधना करते हैं तो हमारे विचार भी पवित्र होते हैं आयम्बिल ओली जी का जो भोजन है वह बहुत पवित्र होता है वह रोगों को दूर करने वाला होता है। परमात्मा की भक्ति तपस्या से नहीं जुड़ेंगे तब तक हमारा कल्याण नहीं हो सकता है। हमारी दृष्टि में भी परिवर्तन करना होगा दृष्टि भी पवित्र रखना चाहिए। हमें नीति पूर्वक ही धन कमाना चाहिए क्योंकि अनीति पूर्वक कमाया हुआ धन एक प्रतिशत भी हमारे काम नहीं आएगा। घरों में अनाज के गोदाम भरे हैं फिर भी हम धन के लालच में पाप कर्म कर रहे हैं चिंतन का विषय है। मनुष्य को मृत्यु के बाद कफन ढाई मीटर और 7 फीट भूमि की आवश्यकता होती है लेकिन फिर भी मनुष्य धन के लालच में दिन-रात पाप कर्म करते हुए आगे बढ़ रहा है चिंतन का विषय है। मृत्यु के बाद मनुष्य के साथ सिर्फ उसके पुण्य कर्म जाते हैं धन संपत्ति वैभव सब यहीं रह जाता है इसलिए हमें दूसरों की भलाई और पुण्य के लिए पुरुषार्थ का पुण्य कर्म करना चाहिए तभी हमारी आत्मा का कल्याण हो सकता है। -धर्म सभा में लब्धि पूर्णा श्री जी महाराज साहब ने कहा कि संसार में रहते हुए मनुष्य को यदि अपनी आत्मा का कल्याण करना है तो तपस्या कर पाप कर्म करने वाली पांचो इंद्रियों पर नियंत्रण करना होगा। धर्म सभा में लब्धि पूर्णा, मृदु पूर्णा, प्राप्ति पूर्णा, केवल पूर्णा श्री जी जिनांर्ग पूर्णा श्री जी आदि ठाना का सानिध्य भी मिला। नवपद ओली जी तपस्या पर अमृत प्रवचन आज श्री जैन श्वेताम्बर भीडभंजन पार्श्वनाथ मंदिर ट्रस्ट नीमच के तत्वावधान में साध्वी अमीदर्शा श्री जी महाराज साहब के पावन सानिध्य में प्रतिदिन नवपद ओली जी तपस्या की आराधना के विषय परअमृत धर्म सभा प्रवचन श्रृंखला पुस्तक बाजार स्थित आराधना भवन में प्रतिदिन सुबह 9:15 बजे अमृत धाम प्रवचन श्रृंखला प्रवाहित हो रही है। सभी समय पर उपस्थित होकर धर्म तत्व ज्ञान गंगा का पुण्य लाभ ग्रहण करें।