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चैत्र नवरात्रि के पांचवे दिन करें मां स्कंदमाता की पूजा, जानें पूजा विधि, मंत्र, भोग और आरती

Neemuch headlines April 2, 2025, 8:42 am Technology

चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नवरात्रि के पांचवे दिन की पूजा अर्चना की जाती है. इस दिन स्कंद कुमार की मां यानी स्कंदमाता की पूजा उपासना की जाती है. आज नवरात्रि के पांचवे कई शुभ योग बन रहे हैं, जिससे इस दिन का महत्व और भी बढ़ गया है.

आइए जानते हैं स्कंदमाता की पूजा विधि, मंत्र, भोग, महत्व और आरती.

चैत्र नवरात्रि के पांचवे दिन करें मां स्कंदमाता की पूजा,

जानें पूजा विधि:-

चैत्र नवरात्रि के पांचवे दिन करें मां स्कंदमाता की पूजा हाइलाइट्स चैत्र नवरात्रि के पांचवे दिन मां स्कंदमाता की पूजा होती है. मां स्कंदमाता की पूजा से बुद्धि और ज्ञान की प्राप्ति होती है. सच्चे मन से पूजा करने पर संतान सुख की प्राप्ति होती है.

चैत्र नवरात्रि 2025 का पांचवा दिन, मां स्कंदमाता: चैत्र नवरात्रि का आज पांचवा दिन है और नवरात्रि के पांचवे दिन मां दुर्गा की पांचवी शक्ति स्कंदमाता की पूजा अर्चना की जाती है. आज पूरे दिन सर्वार्थ सिद्धि योग, रवि योग और आयुष्मान योग बना रहेगा, जिससे माता की पूजा और भी फलदायी रहेगी. मां दुर्गा के सभी स्वरूपों में स्कंदमाता को सबसे ज्यादा ममतामयी माना गया है. माता के इस स्वरूप की पूजा करने से बुद्धि का विकास और ज्ञान की प्राप्ति होती है. स्कंद कुमार यानी कार्तिकेय भगवान की माता होने के कारण पार्वतजी को स्कंद माता कहा गया. मान्यता है कि निसंतान दंपत्ति सच्चे मन से माता के इस स्वरूप की पूजा अर्चना करें और व्रत करें तो संतान सुख की प्राप्ति होती है. आइए जानते हैं नवरात्रि 2025 के पांचवे दिन की जाने वाली माता स्कंदमाता का स्वरूप, भोग, आरती और मंत्र… स्कंदमाता पूजा का महत्व:- स्कंद माता सिंह की सवारी के अलावा कमल के फूल पर भी विराजती हैं इसलिए माता को पद्मासना भी कहा जाता है. जो भी भक्त सच्चे मन से माता की पूजा अर्चना करता है, मां उसके मन की सभी इच्छाओं को पूरी करती हैं. माता की कृपा से मूढ़ भी ज्ञान हो जाता है और अज्ञानी भी ज्ञान की प्राप्ति करता है. संतान की प्राप्ति के लिए स्कंदमाता की पूजा करनी चाहिए. माता रानी की पूजा के समय लाल कपड़े में पीले चावल, एक नारियल, सुहाग का सामान, लाल फूल को बांधकर माता के पास रख दें, ऐसा करने से घर में जल्द किलकारियां गूंजने लगती हैं. माता की उपसना करने से भक्तों की सारी इच्छाएं पूरी होती हैं और मोक्ष का मार्ग सुलभ हो जाता है. सूर्यमंडल की अधिष्ठात्री देवी होने के कारण इनका उपासक कांतिमय और अलौकिक तेज हो जाता है. बताया जाता है कि कालिदास द्वारा रचित रघुवंशम महाकाव्य और मेघदूत रचनाएं माता की कृपा से ही संभव हुई थीं. ऐसा है

माता का स्वरूप:-

स्कंदमाता के इस स्वरूप में भगवान स्कंद 6 मुख वाले बालरूप में माता की गोद में विराजमान हैं. भगवान स्कंद के 6 मुख होने के कारण इन्हें षडानन नाम से भी जाना जाता है. स्कंदमाता की चार भुजाएं हैं. दायीं हाथ की तरफ की ऊपर वाली भुजा से स्कंद को गोद में पकड़े हुई हैं और नीचे वाली भुजा में कमल पुष्प है. वहीं बायीं वाली भुजा वरमुद्रा में है और नीचे वाली भुजा में श्वेत कमल फूल है. माता का वाहन सिंह और यह कमल के आसन पर भी स्कंद को लेकर विराजमान रहती हैं.

स्कंदमाता के मंत्र:-

सिंहासना गता नित्यं पद्माश्रि तकरद्वया। शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी।।

या देवी सर्वभू‍तेषु मां स्कंदमाता रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।

शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोऽस्तुते।

ॐ जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी।

दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते।

स्कंदमाता पूजा विधि:-

आज नवरात्रि के पांचवे दिन मां दुर्गा के पांचवे स्वरूप स्कंदमाता की पूजा अर्चना की जाएगी. आज के दिन की पूजा भी अन्य दिनों की तरह ही शास्त्रीय विधि से की जाएगी. सुबह स्नान व ध्यान करने के बाद माता की चौकी के पास जाएं और हाथ जोड़कर प्रार्थना करें और फिर गंगाजल से चारों तरफ छिड़काव करें. ध्यान रखें कि स्कंदमाता की पूजा कुश अथवा कंबल के आसान पर ही बैठकर करें. पूरे परिवार के साथ माता के जयकारे लगाएं और रोली, कुमकुम, अक्षत, चंदन, पान-सुपारी आदि पूजा से संबंधित चीजें माता को अर्पित करें. इसके बाद कलश देवता और नवग्रह की पूजा भी करें. अब माता की आरती के लिए कपूर और घी का दीपक जलाएं और परिवार समेत आरती उतारें. फिर दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ करें और अंत में गलतियों के लिए माता रानी से क्षमा याचना करें.

स्कंदमाता आरती:-

जय तेरी हो स्कंद माता। पांचवां नाम तुम्हारा आता॥

सबके मन की जानन हारी। जग जननी सबकी महतारी॥

तेरी जोत जलाता रहू मैं। हरदम तुझे ध्याता रहू मै॥

कई नामों से तुझे पुकारा। मुझे एक है तेरा सहारा॥

कही पहाडो पर है डेरा। कई शहरों में तेरा बसेरा॥

हर मंदिर में तेरे नजारे।

गुण गाए तेरे भक्त प्यारे॥

भक्ति अपनी मुझे दिला दो। शक्ति मेरी बिगड़ी बना दो॥

इंद्र आदि देवता मिल सारे। करे पुकार तुम्हारे द्वारे॥

दुष्ट दैत्य जब चढ़ कर आए। तू ही खंडा हाथ उठाए॥

दासों को सदा बचाने आयी। भक्त की आस पुजाने आयी॥

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