अंग्रेजी तारीख 11 जून 2026 ई.। सूर्य उत्तरायण, उत्तर गोल, ग्रीष्म ऋतु। राहुकाल दोपहर 02:00 से 03:30 बजे तक। एकादशी तिथि रात्रि 10 बजकर 36 मिनट तक उपरांत द्वादशी तिथि का आरंभ। रेवती नक्षत्र प्रातः 08 बजकर 16 मिनट तक उपरांत अश्विनी नक्षत्र का आरंभ। शोभन योग मध्यरात्रि 01 बजकर 00 मिनट (12 जून) तक उपरांत अतिगण्ड योग का आरंभ। बव करण दोपहर 11 बजकर 52 मिनट तक उपरांत बालव करण का आरंभ। चंद्रमा प्रातः 08 बजकर 16 मिनट तक मीन राशि पर उपरांत मेष राशि पर संचार करेगा।
महत्वपूर्ण विवरण तिथि:
कृष्ण एकादशी – रात्रि 10:36 बजे तक,
फिर द्वादशी योग: शोभन – मध्यरात्रि 01:00 बजे (12 जून) तक,
फिर अतिगण्ड करण: बव – दोपहर 11:52 बजे तक
करण: बालव – रात्रि 10:36 बजे तक,
फिर कौलव सूर्य और चंद्रमा की स्थिति
सूर्योदय का समय प्रातः 05:23 बजे
सूर्यास्त का समय सायं 07:19 बजे
चंद्रोदय का समय मध्यरात्रि बाद 02:31 बजे (12 जून)
चंद्रास्त का समय दोपहर 03:10 बजे
आज के व्रत त्योहार परम एकादशी व्रत।
आज का शुभ मुहूर्त 11 जून 2026 :-
अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11 बजकर 53 मिनट से 12 बजकर 49 मिनट तक।
अमृत काल प्रातः 05 बजकर 59 मिनट से 07 बजकर 30 मिनट तक,
फिर रात्रि 11 बजकर 49 मिनट से मध्यरात्रि बाद 01 बजकर 17 मिनट (12 जून) तक।
ब्रह्म मुहूर्त सुबह 3 बजकर 52 मिनट से 4 बजकर 38 मिनट तक।
आज का अशुभ मुहूर्त 11 जून 2026 :-
दोपहर 02:00 से 03:30 बजे तक राहुकाल रहेगा।
सुबह 09:00 से 10:30 बजे तक गुलिक काल रहेगा।
सुबह 06:00 से 07:30 बजे तक यमगंड रहेगा।
आज का नक्षत्र आज चंद्रदेव रेवती नक्षत्र में विराजमान रहेंगे।
रेवती नक्षत्र: प्रातः 08:16 बजे तक स्थान: 16°40’ मीन राशि से 30° मीन राशि तक नक्षत्र स्वामी: बुधदेव राशि स्वामी: बृहस्पतिदेव देवता: पूषा (पोषण करने वाले देवता) प्रतीक: मछली सामान्य विशेषताएं: इस नक्षत्र में जन्मे लोग बहुत अंतर्ज्ञानी, चतुर और ईमानदार स्वभाव के होते हैं। ये साहसी, आकर्षक और बुद्धिमान होने के साथ-साथ स्वभाव से कानूनप्रिय, आशावादी और खुशमिजाज होते हैं। इनका जीवन समृद्ध और सदाचारी होता है, जिसके कारण ये समाज में बहुत मान-सम्मान प्राप्त करते हैं। परम एकादशी 2026 एकादशी तिथि प्रारंभ: 11 जून, रात 12:57 बजे एकादशी तिथि समाप्त: 11 जून, रात 10:36 बजे व्रत पारण समय: 12 जून, सुबह 05:23 से 08:10 बजे तक
धार्मिक दृष्टि से देखा जाए तो लौंद के महीने में आने वाली एकादशी को परम एकादशी कहा जाता है।
इस विशेष मास को हिंदू पंचांग में अधिक मास, मलमास और पुरुषोत्तम मास के नाम से भी जाना जाता है। अधिक मास के कृष्ण पक्ष में आने के कारण इसे परम एकादशी या अधिक मास एकादशी के रूप में विशेष पहचान मिली है। यही वजह है कि इस उपवास के लिए कोई निश्चित चंद्र मास तय नहीं होता है। जब भी हिंदू वर्ष में अधिक मास का योग बनता है, तभी इस पावन व्रत का निर्धारण किया जाता है।
शास्त्रों के अनुसार, पुरुषोत्तम मास में श्रीहरि की आराधना करने से जातक को सामान्य दिनों से कई गुना अधिक शुभ फल प्राप्त होते हैं।
यह व्रत जीवन में आत्मिक शुद्धि और संतुलन लाने का एक सटीक संकेत देता है।
आज का उपाय :-
आज भगवान विष्णु की पूजा करें, उन्हें पीले फूल और तुलसी दल अर्पित करें। विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना बहुत कल्याणकारी होता है।