अंग्रेजी तारीख 28 मई 2026 ई.। सूर्य उत्तरायण, उत्तर गोल, वसंत ऋतु। राहुकाल दोपहर 01:30 से 03:00 बजे तक। द्वादशी तिथि प्रातः 07 बजकर 56 मिनट तक उपरांत त्रयोदशी तिथि का आरंभ। चित्रा नक्षत्र प्रातः 08 बजकर 08 मिनट तक उपरांत स्वाति नक्षत्र का आरंभ। वरीयान योग अगले दिन प्रातः 03 बजकर 55 मिनट (29 मई) तक उपरांत परिघ योग का आरंभ। बालव करण प्रातः 07 बजकर 56 मिनट तक उपरांत कौलव करण का आरंभ। चंद्रमा दिन रात तुला राशि पर संचार करेगा। महत्वपूर्ण विवरण तिथि शुक्ल द्वादशी – प्रातः 07:56 बजे तक, फिर त्रयोदशी योग वरीयान – अगले दिन प्रातः 03:55 बजे (29 मई) तक, फिर परिघ करण बालव – प्रातः 07:56 बजे तक करण कौलव – रात्रि 08:51 बजे तक, फिर तैतिल सूर्य और चंद्रमा की स्थिति सूर्योदय का समय प्रातः 05:25 बजे
सूर्यास्त का समय सायं 07:12 बजे
चंद्रोदय का समय दोपहर 04:47 बजे चंद्रास्त का समय रात्रि 03:34 बजे (29 मई)
आज के व्रत त्योहार गुरु प्रदोष व्रत।
आज का शुभ मुहूर्त 28 मई 2026 : अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11 बजकर 51 मिनट से 12 बजकर 46 मिनट तक।
अमृत काल रात्रि 12 बजकर 55 मिनट (29 मई) से रात्रि 02 बजकर 41 मिनट (29 मई) तक
ब्रह्म मुहूर्त सुबह 3 बजकर 53 मिनट से 4 बजकर 39 मिनट तक
आज का अशुभ मुहूर्त 28 मई 2026 :
दोपहर 01:30 से 03:00 बजे तक राहुकाल रहेगा।
सुबह 09:00 से 10:30 बजे तक गुलिका काल रहेगा।
सुबह 06:00 से 07:30 बजे तक यमगंड रहेगा।
आज का नक्षत्र आज चंद्रदेव चित्रा नक्षत्र में विराजमान रहेंगे।
चित्रा नक्षत्र: प्रातः 08:08 बजे तक स्थान: 23°20’ कन्या राशि से 6°40’ तुला राशि तक नक्षत्र स्वामी: मंगलदेव राशि स्वामी: बुधदेव और शुक्रदेव देवता: त्वष्टा (सृजन और निर्माण के देवता) प्रतीक: चमकता हुआ रत्न (मणि) सामान्य विशेषताएं: इस नक्षत्र में जन्मे लोग बुद्धिमान, सुंदर शरीर और आकर्षक आंखों वाले होते हैं। ये कलाप्रेमी, रचनात्मक और मजबूत इच्छाशक्ति के धनी होते हैं। स्वभाव से साहसी और ऊर्जावान होने के साथ-साथ चीजों को देखने की इनकी नजर बहुत पारखी होती है।
गुरु प्रदोष व्रत 2026 त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 28 मई, सुबह 07:56 बजे त्रयोदशी तिथि समाप्त: 29 मई, सुबह 09:50 बजे प्रदोष पूजा मुहूर्त: शाम 07:12 से रात 09:15 बजे वैदिक पंचांग के अनुसार जब त्रयोदशी तिथि गुरुवार के दिन पड़ती है, तो इसे गुरु प्रदोष कहा जाता है। देखा जाए तो अधिक मास के शुक्ल पक्ष में आने के कारण इसका महत्व और अधिक बढ़ जाता है।
शास्त्रों में यह पावन व्रत आध्यात्मिक उन्नति और धार्मिक ज्ञान की प्राप्ति के लिए बेहद सटीक माना गया है। यह विशेष दिन महादेव को तो अत्यंत प्रिय है ही, साथ ही इसका गहरा संबंध देवगुरू बृहस्पति से भी है। ध्यान रहे कि आज के दिन व्रत रखने से जातक को विद्या, बुद्धि, धन और भाग्य का आशीर्वाद मिलता है। जीवन में बदलाव लाने और आत्मिक शुद्धि के लिए यह उपवास एक सुंदर संकेत है।
आज का उपाय :
- आज भगवान शिव को पंचामृत अर्पित करें और शिव चालीसा का पाठ करें। गुरुवार के दिन बेसन के लड्डू का भोग लगाना या चने की दाल का दान करना बहुत शुभ होता है। यह कार्य धार्मिक नियमों के सुंदर और सफल संपादन के लिए अत्यंत श्रेष्ठ फलदायी माना जाता है।