साध्विवर्या का ऐतिहासिक रूप से हुआ चीताखेड़ा भव्य मंगल प्रवेश
चीताखेड़ा। गुरुजी हमारे आए हैं नई रोशनी लाए हैं........., गुरु जी हमारो अंतरनाथ हमने आपको आशीर्वाद.........., देखो -देखो कौन आया जिनशासन का शेर आया......, जब तक सुरज चांद रहेगा जिनशासन का नाम रहेगा......, त्रिशला नंदन वीर की जय बोलो महावीर की.....आदि जयकारों के साथ ढोल-ढमाकों की गूंज के साथ नाचते झुमते थिरकते हुए गांव के विभिन्न मार्गों से रविवार को प्रातःकाल हरनावदा से चीताखेड़ा नगर प्रवेश के दरमियान 4 महिनों स्थिरता चौमासा (चातुर्मास) के लिए विश्राम हेतु संघ हितचिंतक मेवाड़ देशोद्धारक आचार्य देव श्री निपुण रत्न सूरीश्वर जी व पंन्यास प्रवर श्री राजरत्न विजय जी म.सा.की पावन निश्रा में चीताखेड़ा में चेन्नैई से पधारे परम् पूज्य साध्विवर्या सरल स्वभावी विदुषी साध्वी श्री धृति पूर्णा श्री जी म.सा. व वात्सल्य मूर्ति साध्वी श्री अभय पूर्णा श्री जी साध्विवर्या का एक साथ चीताखेड़ा में पहली बार ऐतिहासिक भव्य मंगल प्रवेश श्रद्धा , भक्ति और उत्साह के साथ हुआ। प्रवेश के उपलक्ष्य में आस-पास के अनेक जैन श्री संघ के सैकड़ों श्रद्धालु साक्षी बने। इस अवसर पर श्री नवरत्न हेम भव्य पाठशाला के विद्यार्थी, सुरेन्द्र महिला मंडल, नाकोड़ा भक्त मंडल, नवरत्न बालिका मंडल, नवरत्न महिला मंडल, नवरत्न परिवार,श्री चंद्रप्रभ स्वामी जिनालय ट्रस्ट, समाज के पदाधिकारियों एवं सदस्य सहित यहां के छोटे बड़े युवा बुजुर्ग महिला पुरुषों ने हर उम्र के सभी जैन अनुयायियों ने अपने -अपने व्यवसाय पूर्ण रूप से बंद रख साधु साध्वी भगवंतों की अगवानी के लिए अल सुबह से ही एक झलक पाने के लिए समय से पूर्व तय स्थान पर पहुंच पलक-पावडे बिछाए हुए जिस मार्ग से साधु साध्वी भगवंतों का आगमन होने वाला है।
उसी राह में टकटकी लगाए बैठे थे। जैसे ही दूर से हल्की सी भगवंतों की झलक दिखी तो ... गुरुजी हमारे आए हैं नई रोशनी लाएं हैं....., महावीर स्वामी....., आदि जयकारों से क्षेत्र गुंजायमान कर दिया। नगर के विभिन्न स्थानों पर जगह-जगह घर-घर द्वार - द्वार जैन श्राविकाओं द्वारा रंगोली बनाकर फिर अक्षत की गऊली बनाकर साधु-साध्वी भगवंतों का आत्मिय अभिनंदन,वंदन एवं पुष्प वर्षा कर आशीर्वाद लिया। जैन अनुयायियों का इतने बड़े आचार्य भगवंतों और साध्विवर्या म.सा.का एक साथ इस गांव में भव्य मंगल प्रवेश को देखकर सभी अभिभूत हो रहे थे। सुरेन्द्र महिला मंडल सभी एक ही रंग वस्त्र धारण किए हाथों में रंग-बिरंगे छाते लिए नृत्य नगर प्रवेश चल समारोह की शोभा बढ़ा रही थी। साधु-साध्वी भगवंतों का भव्य मंगल प्रवेश श्री मुनि सुब्रत स्वामी जिनालय पहुंचते - पहुंचते धर्मसभा में परिवर्तित हो गया। स्वामी वात्सल्य के लाभार्थी चांदमल, जयश कुमार, मनिष कुमार सेफरिया अहमदाबाद जलोदा जागीर वाले और नवकारसी के लाभार्थी श्रीमती रतन बाई, विनोद कुमार, विजय कुमार जैन झातरिया और जय जिनेन्द्र के लाभार्थी सनत कुमार, प्रकाश, मनीष कुमार झातरिया का श्री संघ के पदाधिकारियों द्वारा बहुमान किया गया। आराधना भवन में उपस्थित श्रावक श्राविकाओं को पंन्यास प्रवर श्री राजरत्न विजय जी म.सा. ने व्याख्यान माला में धर्म वाणी प्रवाहित करते हुए संयम , साधना, स्वाध्याय,तप,आत्मक त्याग एवं धर्म आराधना का प्रेरणादाई संदेश प्रदान करते हुए कहा कि दुनिया में धन,तन का सुख सभी को मिल सकता है परन्तु मन सुख किसी को प्राप्त नहीं हो सकता है,मन का सुख तो जिसके पास परमात्मा की भक्ति है उसी को मिलता है। पात्रता गुणवत्ता जिसके पास होगी तो जीवन में मन चाही पसंदिदा प्राप्त कर सकता है। 4 माह संयम, साधना, स्वाध्याय तप और आराधना करते हैं, आत्मा को पूर्ण अनुभव करने हेतु चातुर्मास करते हैं। जिन शासन वचन कभी-कभी ही सुनने को मिलते हैं,जब सुनने को मिल जाते हैं तो मानव जीवन सार्थक हो जाता है। श्री संघ हितचिंतक मेवाड़ देशोद्धारक आचार्य देव श्री निपुण रत्न सूरीश्वर जी म.सा. ने उपस्थित धर्मालुओं को मनुष्य जीवन के आदर्श, आध्यात्मिक अनुशासन एवं धर्ममय जीवन की प्रेरणा देते हुए कहा कि समाजजनों द्वारा इस आयोजन को ऐतिहासिक, अनुशासित एवं भव्य बनाना है। चातुर्मास हेतु साध्विवर्या श्री जी के मंगल प्रवेश के उपलक्ष्य में पूरे कार्यक्रम का संचालन राजेश जैन और गजेन्द्र बोहरा ने किया।