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श्रीपुरा के सागवान जंगल क्षेत्र में रविवार को सुबह मे अचानक से लगी भीषण आग

सत्यनारायण सुथार May 17, 2026, 8:42 pm Technology

वन विभाग की तत्परता से बड़ा हादसा टला, फायर बिग्रेड की सहायता से कुछ ही समय मे आग पर काबू पाया

जाट। जावद वन परिक्षेत्र के अंतर्गत आने वाली ग्वालियर कला सबरेंज के श्रीपुरा पंचायत के गांव कुतली के समीप स्थित अति प्राचीन सांगाराणी माता मंदिर के पास सांगाराणी जंगल क्षेत्र में रविवार सुबह अचानक आग लगने की घटना सामने आई। देखते ही देखते लगभग आधा हेक्टेयर क्षेत्र में आग तेजी से फैल गई।जिससे आसपास क्षेत्र व इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। इस दौरान सांगाराणी माता जी मंदिर पर दर्शन करने आए श्रद्धालुओ मे भी भय व दहशत का वातावरण बन गया।समय रहते सभी लोगों द्वारा झाड़ियां के पास खड़े अपने वाहनों को सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया।आगजनी की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम भी मौके पर पहुंची।और नगर परिषद रतनगढ़ से फायर ब्रिगेड को भी रवाना किया गया।समय रहते ग्रामीणो व कर्मचारियों के संयुक्त प्रयासों से आग पर काबू पा लिया गया,जिससे एक बड़ी दुर्घटना टल गई। आग की चपेट में आने से कुछ पैड़ो के साथ ही झाड़ियां और घास-फूस जलकर राख हो गई,हालांकि किसी प्रकार की जनहानि या बड़ी संपत्ति का नुकसान नहीं हुआ है।घटना स्थल पर वन विभाग के उप वन मंडलाधिकारी दशरथ अखंड, डिप्टी रेंजर बगदीराम गणावा,वन परिक्षेत्रअधिकारी विपुल प्रभात करोरिया, संरक्षक लाखन सिंह राजपूत,जुल्फिकार सहित सुरक्षा श्रमिक दिपक प्रजापत,राहुल सोनी आदी मौजूद रहे।वन परिक्षेत्र अधिकारी विपुल प्रभात करोरिया ने बताया कि आग लगने की सूचना मिलते ही टीम तुरंत मौके पर पहुंची। और फायर ब्रिगेड के सहयोग से आग पर तेजी से नियंत्रण पाया गया। स्थिति अब पूरी तरह नियंत्रण में है।और किसी भी प्रकार का कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ है।आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है।हालांकि आग लगने के कारणो का अभी तक पता नहीं लग पाया है।कि आग किन कारणो से लगी है।वह तो गनिमत रही की सांगाराणी के जंगलों में भीषण आग की सूचना मिलते ही वन परि क्षेत्राधिकारी विपुल प्रभात करोरिया के दिशा निर्देश एवं कुशल मार्गदर्शन में वन विभाग के अधिकारी कर्मचारियों के दल द्वारा नगर परिषद रतनगढ़ की फायर ब्रिगेड, कर्मचारीयो व ग्रामीणों के सहयोग से आग पर पूरी तरह से काबू पा लिया गया।

वरना किसी बड़ी घटना के होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता था।

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