चीताखेडा। राजनीति की बिसात पर जब आरोप-प्रत्यारोप का खेल चलता है, तो विकास अक्सर ठंडे बस्ते की भेंट चढ़ जाता है। धामनिया-चीताखेड़ा-जीरन-मल्हारगढ़ मार्ग की बदहाली आज इसी कड़वी हकीकत का जीवंत उदाहरण बन चुकी है। आलम यह है कि जिस सड़क के लिए दो माह में काम शुरू होने के दावे किए जा रहे थे, और पीडब्ल्यूडी विभाग के आलाअफसरों के दिए हुए जवाब से,वहां अब अगले छह माह तक धूल और गड्ढों से राहत मिलने की दूर-दूर तक कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही है।
इस सड़क मार्ग से होकर गुजरते वाहन एवं वाहन सवार हो रहे हैं लहूलुहान तो कभी वाहन के पार्ट्स में तो कभी लोगों के हाथ-पैरों में हो रही है भांग टूट। इस सड़क मार्ग का डामरीकरण तो दूर सड़क निर्माण में बिछाया गया (बेस) नींव तक टूटकर गहरे गड्ढों में तब्दील हो गई है सड़क। कई वाहन चालकों ने तो नीमच आने जाने के लिए अधिक दूरी चक्कर लगाने को मजबूर होकर मार्ग ही बदल दिया है। क्षेत्रीय विधायक दिलीप सिंह परिहार जो विकास के बड़े-बड़े दावे करते नहीं थकते, इस मार्ग के निर्माण को लेकर पूरी तरह उदासीन नजर आ रहे हैं। जानकारों की मानें तो विधायक की इस कार्य में कोई विशेष रुचि नहीं है, जिसका सीधा असर सरकारी मशीनरी पर पड़ा है। जब जन प्रतिनिधि ही मौन हो तो विभाग क्यों सक्रियता दिखाए? परिणाम स्वरूप लोक निर्माण विभाग ने भी सारी कागजी कार्यवाहियों को फाइलों के ढेर में दबा दिया है, जैसा शासन वैसा प्रशासन। हैरानी की बात यह है कि दूसरी बार टेंडर रिकॉल होने के बावजूद दो महीने बीत जाने पर भी अनुबंध की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई। विभाग के आलाअफसर अब गेंद उज्जैन और भोपाल के पाले में डालकर पल्ला झाड़ रहे है कि फाइलें वहां अटकी हैं। विपक्ष की 'बदहवास' हालत, कहाँ गया वो चक्काजाम का ऐलान? :- एक तरफ सत्ता पक्ष की चुप्पी है, तो दूसरी तरफ विपक्षी दल कांग्रेस की स्थिति बदहवास नजर आ रही है। विशेषकर चीताखेड़ा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले जिला पंचायत सदस्य और कांग्रेस जिलाध्यक्ष तरुण बाहेती अब सवालों के घेरे में हैं।
याद दिला दें कि बीते 30 जनवरी 2026 को चीताखेड़ा में बड़े तामझाम के साथ धरना प्रदर्शन किया गया था। तब जिलाध्यक्ष तरुण बाहेती ने मंच से हुंकार भरते हुए बड़ी-बड़ी डींगें हांकी थीं और ऐलान किया था कि यदि 5 दिन में काम शुरू नहीं हुआ तो महुडिया गांव में बस स्टैंड पर बड़ा चक्काजाम किया जाएगा। लेकिन वह ऐलान शायद सिर्फ तालियां बटोरने तक सीमित था। उस भाषण के बाद से आज तक अखबारों में सिर्फ खबरें छपवाने के शोकिन जिलाध्यक्ष की जुबान इस सड़क को लेकर एक बार भी नहीं खुली। जनता के साथ विश्वासघात :- सत्ता पक्ष की इच्छाशक्ति की कमी और विपक्ष का चुनावी स्टंट—इन दोनों के बीच क्षेत्र की हजारों जनता रोजाना बदहाल सड़क पर अपनी जान जोखिम में डाल रही है। झांझरवाड़ा औद्योगिक क्षेत्र और राजस्थान को जोड़ने वाला यह महत्वपूर्ण मार्ग अब केवल नेताओं की राजनीति का अखाड़ा बनकर रह गया है। सवाल यह है कि क्या शासन-प्रशासन केवल कागजी घोड़े ही दौड़ाएगा?क्या कांग्रेस के आंदोलन केवल फोटो सेशन तक ही सीमित हैं? आखिर कब तक विधायक और विपक्षी नेता अपनी जिम्मेदारी से भागते रहेंगे? धामनिया- चीताखेड़ा मार्ग का भविष्य फिलहाल अंधकार में है। जनता अब समझ चुकी है कि सड़क निर्माण की फाइलें फाइलों में नहीं, बल्कि नेताओं की नीयत में अटकी हुई हैं।
इनका कहना :-
कांग्रेस और भाजपा नेता आपस में एक-दूसरे को नीचा दिखाने की नूरा-कुश्ती राजनीती खेल खेलना बंद कर जमीनी कार्य करना चाहिए। सत्ता पक्ष नेता सत्ता के नशे में चूर है, वहीं विपक्ष की भूमिका निभा रहे तरुण बाहेती धरातल पर काम करवाने बजाय अखबारों में फोटो छपवाने की राजनीति खेल रहे हैं। कई वर्षों से क्षेत्र के हजारों ग्रामीण परेशान हैं। सड़क निर्माण कार्य शीघ्र शुरू करना चाहिए। -- सामाजिक कार्यकर्ता दशरथ माली, चीताखेड़ा चीताखेड़ा से नीमच इस बदहाल सड़क से प्रतिदिन गुजरना नफरत हो गई है। कैसे चलाएं यात्री बस।रोज बस में भांग टूट हो रही है और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। --बस ड्राइवर गोपाल शर्मा चीताखेड़ा। शासन से हमें अभी तक इस मार्ग पर निर्माण कार्य की स्वीकृति प्राप्त नहीं हुई है, कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। हमारे अधिकार से बाहर है मामला,हम प्रयास कर रहे हैं।अगर निर्माण कार्य में देरी होगी तो हम रिपेयरिंग करवाएंगे।
नेहा राठौर एसडीओ, पीडब्ल्यूडी विभाग,नीमच।