आज धृति योग का प्रभाव रहेगा, जो धैर्य और मानसिक मजबूती प्रदान करता है। आज के दिन आपका प्रभावशाली व्यक्तित्व और तीव्र स्मरण शक्ति लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद करेगी। यदि मन में कोई उलझन आए, तो उसे केवल एक सीख के रूप में देखें और अपनी सहजता बनाए रखें।
किसी भी शुभ कार्य के लिए दोपहर 12:01 से 12:51 बजे तक का अभिजीत मुहूर्त उत्तम रहेगा। शाम को राहुकाल के समय सावधानी बरतना ठीक होगा।
महत्वपूर्ण विवरण तिथि शुक्ल एकादशी – प्रातः 07:46 बजे तक, फिर द्वादशी योग धृति – सायं 06:20 बजे तक करण विष्टि – प्रातः 07:46 बजे तक
करण बव– सायं 07:25 बजे तक सूर्य और चंद्रमा की स्थिति
सूर्योदय का समय प्रातः 06:15 बज
सूर्यास्त का समय सायं 06:37 बजे चंद्रोदय का समय दोपहर 03:15 बजे
चंद्रास्त का समय प्रातः 04:29 बजे (30 मार्च) सूर्य और चंद्रमा की राशियां सूर्य देव: मीन राशि में स्थित हैं चन्द्र देव: कर्क राशि में – दोपहर 02:38 बजे तक
आज के शुभ मुहूर्त अभिजीत मुहूर्त
दोपहर 12:01 बजे से दोपहर 12:51 बजे तक
अमृत काल: दोपहर 01:02 बजे से दोपहर 02:38 बजे तक
आज के अशुभ समय राहुकाल सायं 05:04 बजे से सायं 06:37 बजे तक
गुलिकाल सायं 03:32 बजे से सायं 05:04 बजे तक
यमगण्ड दोपहर 12:26 बजे से दोपहर 01:59 बजे तक
आज का नक्षत्र आज चंद्रदेव आश्लेषा नक्षत्र में विराजमान रहेंगे। आश्लेषा नक्षत्र: सायं 02:38 बजे तक स्थान: 16°40’ कर्क राशि से 30°00’ कर्क राशि तक नक्षत्र स्वामी: बुधदेव राशि स्वामी: चंद्रदेव देवता: नाग (सर्प देवता) प्रतीक: कुंडली मार कर बैठा हुआ सर्प सामान्य
विशेषताएं: मजबूत कद-काठी, खुशमिजाज व्यक्तित्व, जीवन के प्रति उत्साह, कुशाग्र बुद्धि, तीव्र स्मरण शक्ति, चतुर, यात्रा प्रेमी, प्रभावशाली वक्ता और रहस्यमयी।
आज कामदा एकादशी है कामदा एकादशी 2026 एकादशी तिथि प्रारंभ 28 मार्च, 2026 को सुबह 08:45 बजे एकादशी तिथि समाप्त
29 मार्च, 2026 को सुबह 07:46 बजे पारण का समय (30 मार्च) सुबह 06:14 से 07:09 तक द्वादशी तिथि
समाप्ति (पारण के दिन) सुबह 07:09 बजे चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को कामदा एकादशी के रूप में मनाया जाता है।
चैत्र नवरात्रि और राम नवमी के पश्चात आने वाली यह पहली एकादशी अत्यंत प्रभावशाली मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत के प्रभाव से मनुष्य के समस्त संचित पापों का शमन हो जाता है। शास्त्रों में इसे अत्यंत जटिल कष्टों और दोषों से मुक्ति दिलाने वाला बताया गया है। इस पावन अवसर पर गंधर्व ललित और ललिता की पौराणिक कथा का श्रवण करना विशेष फलदायी होता है।
भक्त पूरी श्रद्धा के साथ भगवान विष्णु की उपासना करते हैं। व्रत का पारण अगले दिन सूर्योदय के उपरांत द्वादशी तिथि समाप्त होने से पूर्व करना आवश्यक है। पारण के समय 'हरि वासर' की अवधि का ध्यान रखना चाहिए, जो द्वादशी का प्रथम चौथाई भाग होता है। सुबह का समय व्रत खोलने के लिए श्रेष्ठ है, जबकि दोपहर में पारण करने से बचना चाहिए।