मां महागौरी स्तुति मंत्र:-
या देवी सर्वभूतेषु मां गौरी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।
नवरात्रि के आठवें दिन करें मां महागौरी की पूजा, जानें पूजा विधि, मंत्र, कथा, आरती:-
मां महागौरी का प्रिय भोग:-
मान्यता के अनुसार, नवरात्रि के आठवें दिन की देवी मां महागौरी की पूजा में जो भक्त उनकी प्रिय चीजें चढ़ाता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। देवी महागौरी को प्रसन्न करने के लिए इस दिन साधक को माता की पूजा में सफेद फूल जैसे रात की रानी का पुष्प आदि चढ़ाना चाहिए। माता के प्रिय भोग में भी नारियल चढ़ाकर देवी का आशीर्वाद मांगना चाहिए। मान्यता है कि मां महागौरी को नारियल और इससे बना भोग बहुत प्रिय है।
मां महागौरी की कथा:-
हिंदू मान्यता के अनुसार जब देवी सती भगवान शिव को अपने पति के रूप में पाने के लिए कठिन तप कर रही थीं, तो उनके पूरे शरीर पर मिट्टी जमा हो गई थी। इसके बाद जब महादेव ने उन्हें प्रसन्न होकर अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार करने का आशीर्वाद दिया तो देवी ने गंगाजल में स्नान किया और उसके बाद उनका स्वरूप अत्यंत ही तेजवान दिखने लगा। माता के उस गौर वर्ण रूप को देखकर महादेव ने उन्हें महागौरी कहा। तब से भक्तगण आज तक उन्हें महागौरी के नाम से पूजते हैं।
माता महागौरी का प्रार्थना मंत्र श्वेते वृषे समरूढा श्वेताम्बराधरा शुचिः। महागौरी शुभं दद्यान्महादेव प्रमोददा। देवी सर्वभूतेषु मां गौरी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।
मां महागौरी की आरती:-
जय महागौरी जगत की माया जय उमा भवानी जय महामाया।
हरिद्वार कनखल के पासा। महागौरी तेरा वहां निवासा।। चंद्रकली और ममता अंबे। जय शक्ति जय जय मां जगदंबे।।
भीमा देवी विमला माता। कौशिकी देवी जग विख्याता।। हिमाचल के घर गौरी रूप तेरा। महाकाली दुर्गा है स्वरूप तेरा।।
सती ‘सत’ हवन कुंड में था जलाया। उसी धुएं ने रूप काली बनाया।। बना धर्म सिंह जो सवारी में आया।
तो शंकर ने त्रिशूल अपना दिखाया।। तभी मां ने महागौरी नाम पाया। शरण आने वाले का संकट मिटाया।।