चैत्र नवरात्र के छठे दिन मां दुर्गा के छठे स्वरूप, मां कात्यायनी की पूजा होती है। मां कात्यायनी शक्ति और साहस की प्रतीक हैं। कहा जाता है कि इनकी पूजा करने से भक्तों को शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है और जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं।
देवी कात्यायनी को ब्रजमंडल की अधिष्ठात्री देवी के रूप में भी पूजा जाता है। आज चैत्र नवरात्र का छठा दिन है, कैसा है
मां कात्यायनी का स्वरूप?:-
मां कात्यायनी सिंह पर सवार चार भुजाओं वाली देवी हैं। उनके एक हाथ में तलवार, दूसरे में कमल का फूल, तीसरे में अभय मुद्रा और चौथे में वरद मुद्रा है। उनके तेज से भक्तों के सभी कष्टों का अंत हो जाता है। इसके साथ ही देवी की कृपा मिलती है।
भोग :-
मां कात्यायनी को शहद और पीले रंग का भोग बहुत प्रिय है। आप उन्हें पीले रंग की मिठाई, जैसे -
बेसन के लड्डू या केसरिया भात भी अर्पित कर सकते हैं।
प्रिय फूल - देवी को पीले या लाल रंग के फूल चढाएं। माना जाता है कि मां को चमेली का फूल विशेष रूप से बहुत प्रिय है।
पूजा विधि :-
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें।
पीले रंग के वस्त्र धारण करें।
मां कात्यायनी की पूजा का संकल्प लें।
मां कात्यायनी की प्रतिमा स्थापित कर, उनका ध्यान करें।
मां कात्यायनी का आह्वान करें।
उन्हें कुमकुम, अक्षत, हल्दी और चंदन आदि चीजें अर्पित करें। धूप और दीप जलाएं।
देवी के मंत्रों का जाप करें। दुर्गा सप्तशती के छठे अध्याय का पाठ करें। मां कात्यायनी की आरती करें। अंत में मां से पूजा में हुई गलती के लिए माफी मांगे और अपने परिवार के लिए सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें।
पूजन मंत्र :-
1. चतुर्भुजा सिंहस्था खड्गशूलवराभयकरा। कात्यायनी महामाया चंद्रार्धकृतशेखरा ॥