24 मार्च 2026, मंगलवार को चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि है, जो शाम 04:07 बजे तक रहेगी। आज सूर्योदय 06:21 बजे और सूर्यास्त 06:34 बजे होगा। चंद्रदेव आज वृषभ राशि और रोहिणी नक्षत्र में विराजमान रहेंगे, जो कला, रचनात्मकता और शांत मन का प्रतीक है। आज का अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:03 से 12:52 बजे तक है,
जबकि राहुकाल शाम 03:31 से 05:03 बजे तक रहेगा, जिसमें शुभ कार्यों से बचना चाहिए। आज यमुना छठ (यमुना जयंती) का पावन पर्व है। चैत्र नवरात्रि के दौरान आने वाला यह दिन माता यमुना के पृथ्वी पर अवतरण का उत्सव है। ब्रज क्षेत्र में इसे बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है, क्योंकि यमुना जी को भगवान श्रीकृष्ण की पटरानी माना जाता है। आज के दिन पवित्र नदी में स्नान और मां यमुना की आरती करने से मानसिक कष्ट दूर होते हैं और जीवन में शांति का संचार होता है।
महत्वपूर्ण विवरण:-
तिथि शुक्ल षष्ठी सायं 04:07 बजे तक, तत्पश्चात सप्तमी योग प्रीति – प्रातः 09:07 बजे तक योग
आयुष्मान – प्रातः 06:02 बजे (25 मार्च) तक करण तैतिल – सायं 04:07 बजे तक
करण गरज – प्रातः 02:57 बजे (25 मार्च) तक सूर्य और चंद्रमा की स्थिति सूर्योदय का समय प्रातः 06:21 बजे
सूर्यास्त का समय सायं 06:34 बजे
चंद्रोदय का समय प्रातः 09:53 बजे
चंद्रास्त का समय रात्रि 12:33 बजे (25 मार्च) सूर्य और चंद्रमा की राशियां सूर्य देव: मीन राशि में स्थित हैं चन्द्र देव: वृषभ राशि में (25 मार्च प्रातः 06:17 बजे तक)
आज के शुभ मुहूर्त:-
अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:03 बजे से दोपहर 12:52 बजे तक
अमृत काल सायं 04:06 बजे से सायं 05:35 बजे तक
आज के अशुभ समय:-
राहुकाल सायं 03:31 बजे से सायं 05:03 बजे तक
गुलिकाल दोपहर 12:28 बजे से दोपहर 01:59 बजे तक
यमगण्ड प्रातः 09:24 बजे से प्रातः 10:56 बजे तक
आज का नक्षत्र:-
आज चंद्रदेव रोहिणी नक्षत्र में विराजमान रहेंगे। रोहिणी नक्षत्र: सायं 07:04 बजे तक स्थान: 10°00’ वृषभ राशि से 23°20’ वृषभ राशि तक नक्षत्र स्वामी: चंद्रदेव राशि स्वामी: शुक्रदेव देवता: ब्रह्मा या प्रजापति प्रतीक: बैलगाड़ी का पहिया सामान्य विशेषताएं: कलात्मक, रचनात्मक, रोमांटिक, कुशल व्यापारी, विलासी, जिद्दी, व्यावहारिक, जमीन से जुड़े, प्रभावशाली आंखें, ईमानदार, सत्यवादी, दानी, बातचीत में माहिर, एकाग्र और शांत मन। आज यमुना छठ है
यमुना छठ (यमुना जयंती) 2026 षष्ठी तिथि प्रारंभ: 23 मार्च, 2026 को शाम 06:38 बजे षष्ठी तिथि समाप्त: 24 मार्च, 2026 को शाम 04:07 बजे चैत्र मास की शुक्ल पक्ष षष्ठी को यमुना छठ के रूप में मनाया जाता है।
यह पावन दिन माता यमुना के पृथ्वी पर अवतरण का प्रतीक है, इसलिए इसे यमुना जयंती भी कहा जाता है। यह उत्सव मुख्य रूप से ब्रज क्षेत्र, विशेषकर मथुरा और वृंदावन में अत्यंत हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। क्योंकि यमुना जी को भगवान श्री कृष्ण की पटरानी माना जाता है, इसलिए ब्रजवासियों के हृदय में उनके प्रति अटूट श्रद्धा है। यह पर्व चैत्र नवरात्रि के दौरान आता है, जो इसकी धार्मिक महत्ता को और बढ़ा देता है। भक्त इस दिन पवित्र यमुना नदी में स्नान करते हैं और मां यमुना की आरती व पूजन पूरी सहजता से संपन्न करते हैं। मान्यता है कि इस दिन यमुना जी की शरण में जाने से सभी मानसिक कष्ट दूर होने की आशंका नहीं रहती और जीवन में शांति का संचार होता है।