रतनगढ़ । हिन्दव: सोदरा: सर्वे, न हिन्दू पतितो भवेत्। मम दीक्षा हिन्दू रक्षा, मम मंत्र: समानता।।" इस भाव को लेकर विश्व हिंदू परिषद रतनगढ़ प्रखण्ड में मंदसौर विभाग से तीन दिवसीय सामाजिक समरसता संत यात्रा डेर के बालाजी मंदिर रतनगढ़ से प्रारंभ हुई ,
भव्य आतिशबाजी के साथ नगर के प्रमुख मार्ग से नगर में होती हुई पुनः डेर के बालाजी मंदिर पर पहुंची इस दौरान, संतों का पुष्प वर्षा के द्वारा स्वागत किया गया एवं नीम की सड़क चौराहे पर, संतों ने दिया हिंदू एकता और गौ-रक्षा का संदेश दिया। धर्मसभा को संबोधित करते हुए पूज्य संत श्री 108 श्री श्वासानंद जी महाराज (श्री नारायण आश्रम वृंदावन धाम बरडियाखेड़ी) ने समरसता पर जोर देते हुए कहा कि हिंदू समाज को जातियों के बंधनों से उपर उठकर एक सूत्र में पिरोना ही इस यात्रा का मुख्य ध्येय है। उन्होंने कहा कि जब तक हम समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति को गले नहीं लगाएंगे और उसे मुख्यधारा से नहीं जोड़ेंगे, तब तक राष्ट्र परम वैभव को प्राप्त नहीं कर सकता। श्री संत ने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपनी सांस्कृक्तिक जड़ों से जुड़ें और समरस समाज के निर्माण में अपनी भूमिका निभाएं। वहीं विश्व हिंदू परिषद के सामाजिक समरसता के क्षेत्रीय (मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़) प्रभारी गोपाल सोनी इटारसी ने अपने ओजस्वी संबोधन में गो-रक्षा और हिंदू एकता का संकल्प दिलाया।
उन्होंने कहा कि गौ-माता हमारी आस्था का केंद्र हैं और उनकी रक्षा करना हर हिंदू का परम कर्तव्य है। समाज में व्याप्त ऊंच नीच के भेदभाव को मिटाना अनिवार्य है क्योंकि एकता में ही शक्ति है। यदि हिंदू समाज संगठित और समरस रहेगा तो कोई भी बाहरी शक्ति हमारी संस्कृति को नुकसान नहीं पहुंचा पाएगी। विश्व हिन्दू परिषद के जिला प्रचार प्रसार प्रमुख सुरेश साहू रतनगढ़ एवं प्रखंड रतनगढ़ अध्यक्ष कंवरलाल मीणा ने बताया कि यात्रा का स्वागत नगर में विभिन्न धार्मिक, सामाजिक, राजनीतिक समिति द्वारा किया गया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में विश्व हिंदू परिषद के सामाजिक समरसता के क्षेत्रीय (मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़) प्रभारी गोपाल सोनी, प्रान्त सामाजिक समरस्ता प्रमुख शिव प्रसाद शर्मा, विभाग प्रमुख प्रकाश पालीवाल, विभाग मंत्री अनुपाल सिंह झाला, विभाग सत्संग प्रमुख शंकर सिंह चौहान गोविंद यात्रा प्रभारी बजरंग दल जिला संयोजक दुर्गेश धनगर ,जिला सह मंत्री राहुल पाटीदार जिला समरसता प्रमुख जगपाल फरक्या ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
यात्रा का रात्रि भोजन एवं विश्राम रतनगढ़ में रहा यात्रा 16 मार्च को पुनः8:00 बजे मोरवन सरवानिया नीमच की ओर प्रारंभ हुई।