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कथा पांडाल बना गोकुल धाम, धूमधाम से मनाया गोवर्धन पर्वत उत्सव।

Neemuch headlines February 13, 2026, 8:13 pm Technology

नीमच । मेरा रोड का बघाना स्थित  राजेश्वर महादेव मंदिर मंशापूर्ण महादेव शनि मंदिर परिसर में विहिप राधे राधे महिला मंडल द्वारा आयोजित श्रीमद भागवत ज्ञान गंगा महोत्सव में भगवान गोवर्धन पर्वत उत्सव धूमधाम के साथ मनाया गया। कथा में जैसे ही गोवर्धन पर्वत प्रसंग आया पूरा पंडाल जय जय श्री कृष्णा .. गोवर्धन महाराज की जय हो जय कन्हैयालाल के जयकारों से गूंज उठा। श्रध्दालुओं ने बाल गोवर्धन स्वरूप श्रीकृष्ण के दर्शन किए। कथा मे पं. पंकज कृष्ण महाराज ने श्रीकृष्ण प्रसंग सुनाते हुए कृष्ण की बाल लीला का वर्णन करते हुए कहा कि श्रीमद् भागवत ज्ञान गंगा श्रवण करने से गृहस्थी में सुख शांति रहती है। कोई कर्ज है तो उसे चुकाना चाहिए नहीं तो इसका फल हमें नरक में मिलता है। मनुष्य का संसार में जीवन स्वार्थी होता है इसलिए हमें निस्वार्थ रहना चाहिए।

तभी हमारे जीवन का कल्याण हो सकता है। संसार में जन्मे प्रत्येक व्यक्ति की मृत्यु एक ने एक दिन जरूर होती है इसलिए हमें सदैव बुरे कर्मों से बचना चाहिए और अच्छे पुण्य कर्म करते रहना चाहिए। कबीर दास जी के अनुसार मनुष्य जब संसार में जन्म लेता है तो वह रोता है और उसका परिवार और संसार वाले हंसते हैं। मनुष्य जब मरता है तो संसार वाले रोते हैं और वह हंसता है हमें ऐसा आदर्श और महान जीवन जीना चाहिए कि हम हंसे और जग रोए। राम नाम का जाप करने से जीवन संवर जाता है। कथा मे पं. महाराज श्री ने रसास्वादन करवाते हुए कहा कि जब जब धर्म की हानि होती है, भगवान धरती पर अवतार लेकर इसे पुनः स्थापित किया हैं। सभी मानव मानवीयता से अभिसिंचित हो सकते हैं, अमानवीयता से नहीं। हम एक थे हम एक है। और एक रहेंगे यह युगों का सत्य है। शरीर के अंग पृथक होकर भी एक है। सृष्टि के जीव भिन्न होकर भी अभिन्न हैं, क्योंकि उसकी सृष्टि एक हैं।, जन्मदाता एक है,। पालनकर्ता एक हैं और संहारक भी एक ही हैं। शक्तियां अनेक हैं फिर भी परमशक्ति एक हैं। कथा में उन्होंने राधाकृष्ण के प्रेम का वर्णन करते हुए कहा कि श्याम से मिलना हैं तो राधाजी को याद करो। कथा मे गोवर्धन पर्वत के प्रसंग पर कथा पंडाल में उपस्थित श्रध्दालु भाव विहल हो गए। श्री गोवर्धन गिरिराज पर्वत के उत्सव के अवसर पर कृष्ण के रूप में खुशी शर्मा ने सुन्दर पात्र के रूप में गिरिराज उत्सव को साकार कर दिया। इस अवसर पर... राधिका गोरी से ब्रज की छोरी से मया करा दे मेरो ब्याह.. गोविंद गोकुल आयो.., गोवर्धन महाराज हो मैया.. आदि गोवर्धन भजनों से पंडाल गूंज उठा। यह दृश्य देख भक्त भाव विभोर हो गये। महिलाओं ने पूरे मनोभाव से भगवान गोवर्धन उत्सव पर जमकर नृत्य किया। श्रोताओं ने गिरिराज उत्सव में अपनी पूरी भक्ति भावना दिखाई। कथा के प्रारंभ मे सुनिता चौधरी आदि महिलाओं और परिवारजनो के साथ व्यास पीठ पर पौथी पूजन कर आरती की। कन्हैया को लगाया भोग श्रीमद भागवत कथा प्रवचन के दौरान योगेश्वर भगवान गोवर्धन उत्सव की खुशी मे पं. पंकज कृष्ण महाराज ने व्यास पीठ से आशीर्वाद प्रदान किया और गिरिराज गोवर्धन महाराज को प्रसाद का भोग लगाया. श्रवण कुमार ने अपने माता-पिता को तीर्थ यात्रा करवाई थी तो उसके जीवन का कल्याण हो गया था। प्रसन्नता को प्राप्त किया है तो दुखों को सहन करने की क्षमता भी रखना चाहिए। समय सबका आता है। समय कभी रुकता नहीं है। कठिन परिस्थितियों में धैर्य नहीं होना चाहिए।

दुःख परेशानियों को सहन करने के बाद ही सुख आता है। कथा सुनने के बाद एक गुण को जीवन में आत्मसात करें तभी कथा सुनना सार्थक होता है। महाराज श्री ने कहा की जिस उत्साह से यहां गोवर्धन उत्सव मनाया गया, वह वंदनीय हैं। प्रभु भक्ति कृपा हो तो मिट्टी सोना और सोना मिट्टी बन जाता है। श्रीमद भागवत ज्ञान गंगा प्रवचन के दौरान मत्स्य अवतार, सुखदेव, राजा परिक्षित, श्री मद्भागवत गीता श्रवण, नंदगांव ब्रज की धूल वृंदावन में यमुना नदी गिरिराज पर्वत, गोपेश्वर महादेव, वृंदावन, राजा उग्रसेन, कंसवध, त्रिया हठ, बारहट, योगी हट, राजहठ, मीराबाई, मथुरा गमन गोवर्धन पूजा, गोस्वामी तुलसी दास जी, श्रीराम भक्त हनुमान, कयाधु, हिरण्यकश्यप भक्त प्रह्लाद, भगवान शंकर, प्रसंग को संक्षिप्त रूप से वर्णन सुनाया। आरती के बाद प्रसाद वितरण किया गया।

प्रतिदिन श्रीमद भागवत ज्ञान गंगा प्रवचन दोपहर 1 से शाम 5 बजे तक प्रवाहित किए जा रहे हैं।

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