कनेरा । सनातन संस्कृति में आस्था का सैलाब विराट हिंदू सम्मेलन व भव्य शोभायात्रा संपन्न सर्व हिन्दू समाज ने जात पांत से परे एक संगत सभा और एक पंगत में ग्रहण की प्रसादी । देश भर में आयोजित हो रहे हिन्दू सम्मेलन सामाजिक समरसता और हिन्दू चेतना का जीवंत उत्सव हैं। इनका उद्देश्य हिन्दू समाज को संगठित करना है। इस पहल का असर दिखने लगा है। कनेरा में माघ पूर्णिमा के दिन कनेरा एवं सेमलिया गांव का सामूहिक हिंदू सम्मेलन हुआ संपन्न । संपूर्ण कस्बे को केसरिया पताका से सजाया गया सभी ने अपने घरों के बाहर रंगोलिया बनाई। प्रातः मातृशक्ति की डीजे, ढोल और बैंड के साथ सराय चौक एवं कचहरी चौक में से कलश यात्रा प्रारंभ हुई।
कलश यात्रा शुभारंभ से पूर्व विधि विधान पूर्वक आयोजन समिति के अध्यक्ष कालूराम बंधु, सोहन लाल बंबोरिया ने पंडित रमेश जोशी के नेतृत्व में पूजन अर्चन किया। कलश यात्रा दोनों कलश यात्राएं कस्बे के विभिन्न प्रमुख मार्गो मंदिरों के आगे से होती हुई प्रताप चौक पर संगम हुआ इसके पश्चात प्रताप चौक से कार्यक्रम स्थल खेल मैदान तक मातृशक्ति एवं पुरुष वर्ग दोनों डीजे व ढोल के साथ में केसरिया ध्वज लहराते हुए हिंदुत्व जागृति जय घोष और गीतों पर नाचते हुए कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे धर्म सम्मेलन में अतिथियों ने भारत माता के समक्ष दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। सर्वप्रथम आयोजन समिति के अध्यक्ष कालूराम बंबोरिया ने कार्यक्रम की प्रस्तावना व स्वागत उद्बोधन देते हुए कहा कि हमें सभी जाति समाज को एकजुट रहकर गांव की समस्याओं का आपसी सामंजस्य से समाधान कर ऊंच नीच की खाई और मतभेदों को मिटाकर एकजुट रहकर सनातन संस्कृति को मजबूत करना है। कार्यक्रम में मातृशक्ति के रूप में उर्मिला देवी सुथार ने संबोधित करते हुए कहा कि अनादि काल से नारी ही संस्कृति और परिवार की धूरी रही है जिस समाज में नारियों का सम्मान होता है वहां देवता निवास करते हैं जहां इन्हें सताई जाती है वहां पर कुल का विनाश हो जाता है। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में प्रांत सह पर्यावरण संयोजक धर्मपाल गोयल चित्तौड़ ने अपने उद्बोधन में संघ शताब्दी वर्ष पर संघ के पंच परिवर्तन में परिवा प्रबोधन, पर्यावरण, स्वदेशी, नागरिक शिष्टाचार व सामाजिक समरसता पर उद्बोधन देते हुए भारत के गौरवशाली इतिहास और उसके आदर्श का उदाहरण देते हुए सभी को संगठित होकर मां भारती को पुनः परम वैभव पर असीम करने हेतु संकल्प दिलाया।
उन्होंने भी धर्मी और विदेशी षड्यंत्र से अपनी संस्कृति परिवार और बेटियों को बचाने का आह्वान करते हुए लव जहाज पर जागृत रहने का आह्वान किया। कार्यक्रम में मुख्य आशीर्वचन दाता पूज्य संत श्री श्री 1008 सुरेशानंद जी सरस्वती ने अपने संबोधन में समाज में भोजन, भाषा, वेशभूषा और आचरण में पाश्चात्यकरण के बढ़ते प्रभाव पर चिंता व्यक्त करते हुए भारतीय संस्कृति और यहां के परिवेश के अनुकूल जीवन जीने पर जोर देते हुए आने वाली पीढ़ी को संस्कृत, समृद्ध , ज्ञानवान, बुद्धिमान बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सभी देवी देवताओं के हाथ में अस्त्र है भगवान राम ने वनवास जाते समय सब कुछ छोड़ दिया लेकिन अपने धनुष बाण का त्याग नहीं किया इसलिए हर हिंदू के घर में सुरक्षा की दृष्टि से शास्त्र और बौद्धिक क्षमता विकसित करने के लिए शास्त्र होना अनिवार्य है।
प्रथम बार कस्बे में सर्व समाज के एक संगत और एक पंगत के ऐसे कार्यक्रम को देखकर बड़े बुजुर्ग सहित कई लोगों की आंखें नम हो गई एवं कहीं भावुक हो उठे। कार्यक्रम में संपूर्ण भोजन हर ग्रामवासी के घर से लिए गए सहयोग से किया गया। अतिथियों का स्वागत मांगीलाल काबरा, जगदीश मालवीय, राजेश भंगूरा, अंबालाल वीर, मांगीलाल सुथार, देवकन्या, पूजा छिपा ने किया। कार्यक्रम में परी उपाध्याय ने कथक नृत्य व ज्ञानज्योति के भैया बहनों ने हाड़ी रानी का नाटक प्रस्तुत कर कार्यक्रम को अद्भुत बनाया। इस अवसर पर बंसीलाल वीर को सामाजिक समरसता, रोशन लाल जैन को समाज सेवा, प्यार चंद धाकड़। को कृषि में नवाचार, विशाल परोचा को स्वच्छता देवगिरी को पत्रकारिता व वर्षा खटोड़ को महिला धार्मिक जागृति के क्षेत्र में सम्मानित किया गया। अंत में भारत माता की सामूहिक आरती की गई। कार्यक्रम का संचालन राम प्रसाद धाकड़, सुशील आंचलिया व अंकित मालवीय ने किया इसके पश्चात सर्व समाज हेतु सामूहिक भोज का आयोजन किया गया, जिसमें संपूर्ण कनेरा नगर के लगभग 5000 महिला पुरुष ने एक पंगत मे बैठकर भोजन किया।