भोपाल। मध्यप्रदेश में जहरीला कफ सिरप पीने से 23 बच्चों की मौत के मामले में जांच के दौरान चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। जांच एजेंसियों के अनुसार तमिलनाडु की एक दवा निर्माता कंपनी ने बिना किसी गुणवत्ता परीक्षण के नॉन-फार्मास्यूटिकल ग्रेड केमिकल का इस्तेमाल कर कोल्ड्रिफ कफ सिरप तैयार किया था। कंपनी द्वारा खरीदे गए 100 किलो प्रोपलीन ग्लायकॉल में जहरीले रसायनों की मात्रा तय मानक से 486 गुना अधिक पाई गई है।
लैब जांच रिपोर्ट में सिरप के नमूनों में डाईएथिलीन ग्लायकॉल (DEG) और एथिलीन ग्लायकॉल (EG) की खतरनाक मात्रा सामने आई है। विशेषज्ञों के मुताबिक ये दोनों रसायन बच्चों के लिए बेहद जानलेवा हैं, जिससे किडनी फेल होना और ब्रेन में सूजन जैसी गंभीर समस्याएं पैदा होती हैं। इसी कारण कई बच्चों की हालत बिगड़ी और उनकी जान चली गई। जांच में यह भी सामने आया है कि दवा कंपनी के पास केमिकल खरीद से संबंधित कोई बिल या उपयोग का रिकॉर्ड मौजूद नहीं था, जिससे दस्तावेजों को जानबूझकर छिपाने की आशंका जताई जा रही है। कार्रवाई के दौरान 589 बोतल कोल्ड्रिफ सिरप छिंदवाड़ा भेजे जाने की तैयारी में मिलीं, जबकि फैक्ट्री से कुल 5870 बोतलें बरामद की गईं। मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने बीमार बच्चों के इलाज की पूरी जिम्मेदारी ली है।
डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल नागपुर पहुंचे और अस्पतालों में भर्ती बच्चों से मुलाकात कर इलाज की स्थिति की समीक्षा की। प्रशासन ने दोषियों पर सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाया है।