07 साल से चक्कर काट रहा दिव्यांग, फिर भी नहीं मिली पेंशन और आवास

प्रदीप जैन August 3, 2026, 8:31 am Technology

परलाई के शंकरलाल भील के पास UDID और विकलांगता प्रमाण पत्र, बावजूद सिस्टम बना बहरा

सिंगोली। सरकारें भले ही "सबका साथ, सबका विकास" और "दिव्यांगजन सशक्तिकरण" के बड़े-बड़े दावे करें, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। नीमच जिले का एक 40% दिव्यांग युवक पिछले 7 सालों से सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहा है, लेकिन उसे न तो दिव्यांग पेंशन मिली, न पीएम आवास और न ही किसी सरकारी योजना का लाभ। कागज पूरे, पर मदद जीरो :- विधानसभा जावद अंतर्गत दिव्यांग का नाम शंकरलाल भील है, उम्र 32 वर्ष गाँव परलाई तहसील सिंगोली। नीमच जिला चिकित्सालय से जारी विकलांगता प्रमाण पत्र के अनुसार शंकरलाल को *40% लोकोमोटर डिसेबिलिटी* है। भारत सरकार का *UDID कार्ड* भी 29/07/2024 को जारी हो चुका है। UDID नंबर - *MP4130519940004503*। इसके बावजूद शंकरलाल आज भी एक टूटी-फूटी लकड़ी के सहारे और पत्थरों भरी कच्ची जमीन पर नंगे पैर जीवन गुजारने को मजबूर है। छप्पर ही है छत, बारिश में टपकता है पानी शंकरलाल भील का घर देखकर किसी का भी दिल दहल जाएगा। पत्थरों और मिट्टी की दीवारें, ऊपर पत्तों और तिरपाल की छत :- बारिश आते ही पूरा घर टपकने लगता है। पीएम आवास योजना के तहत पक्का मकान तो दूर, आज तक कोई अधिकारी हालचाल लेने तक नहीं आया। शंकरलाल भील का कहना है साहब 7 साल से पंचायत के चक्कर लगा लगा थक गया हूँ सब जगह गया। हर बार फॉर्म भरवाते हैं, फिर कहते हैं नाम नहीं आया। पेंशन के पैसे नहीं आए, आवास की लिस्ट में नाम नहीं है। अब लाठी के सहारे कहां-कहां जाऊं? शंकर लाल भील की तरह इसी गाँव के बंशीलाल भील 40℅ दिव्यांग प्रमाण पत्र होने पर भी उसका भी यही हाल है! सिस्टम पर सवाल :- सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब दिव्यांग के पास UDID कार्ड और 40% का प्रमाण पत्र है, तो उसे पेंशन और आवास से वंचित क्यों रखा गया? क्या कागजों पर चलने वाली योजनाएं सिर्फ फाइलों तक ही सीमित रह गई हैं? स्थानीय समाजसेवी राकेश धाकड़ एवं रहवासी लोगों का आरोप है कि प्रशासन की लापरवाही और बाबुओं की उदासीनता के कारण जरूरतमंद आज भी योजनाओं से कोसों दूर हैं। परलाई ग्राम के ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कलेक्टर नीमच और जिला प्रशासन से मांग की है कि शंकरलाल भील को *तुरंत दिव्यांग पेंशन, पीएम आवास और अन्य योजनाओं का लाभ* दिया जाए। साथ ही दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई हो। अगर अब भी प्रशासन नहीं जागा तो मजबूर होकर दिव्यांगजन सड़क पर उतरकर आंदोलन करेंगे।

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