अयोध्या। राम मंदिर में दान चढ़ावा चोरी की घटना के बाद सरकार द्वारा गठित एसआईटी और अयोध्या पुलिस अपन अपन स्तर पर काम कर रहे है, अब ट्रस्ट ने भी मंदिर की व्यवस्थाओं में बदलाव और सुधार के लिए मंथन शुरू कर दिया है, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविन्द देव गिरि ने इस सम्बन्ध में ट्रस्ट के पदाधिकारियों के साथ बैठक करने के बाद साधु संतों से इस विषय में बात की वे चंपत राय से भी मिले।
चढ़ावे में चोरी की घटना ने रामभक्तों की आस्था को चोट पहुंचाई है तो वहीं राममंदिर ट्रस्ट से जुड़े लोगों की कार्यपद्धति पर भी सवाल खड़े किये हैं, अब ट्रस्ट ऐसी व्यवस्था बनाने पर मंथन कर रहा है कि भविष्य में इस तरह की कोई घटना ना हो, ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने तय किया है कि मंदिर की पूजा पद्धति से लेकर प्रबंधन व्यवस्थाओं में सुधारात्मक बदलाव किया जायेगा। ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने इसके लिए कोषाध्यक्ष स्वामी गोविन्द देव गिरि को एक्टिव किया है, गोविन्द देव गिरि ने कल बुधवार को इन विषयों के मंथन के लिए कई बैठकें की, उन्होंने साधु संतों से भी चर्चा की उन्हें प्रतावित बदलाव के विषय में बताया तो साधु संतों ने उसका समर्थन किया और संतुष्टि जताई। चंपतराय से मिमले गोविन्द देव गिरि हुई लम्बी चर्चा बैठकों के बाद गोविन्द देव गिरि पूर्व महासचिव चंपत राय से भी मिले, उन्होंने उनके पास जाकर उनका हालचाल जाना, गोविन्द देव गिरि ने ANI को बताया कि चंपत राय के साथ उनकी बहुत देर बात हुई, मैं मुख्यरूप से उनका स्वास्थ्य का हाल जानने गया था वे स्वस्थ हैं, समाधानी हैं,
त्यागपत्र के कारण उनके मन में कोई आक्रोश नहीं है। उन्होंने भारत माता की सेवा के लिए अपना पूरा जीवन दिया है वे समर्पित कार्यकर्ता हैं, उन्होंने भी मंदिर व्यवस्था में हो रहे बदलाव का समर्थन किया। दान चढ़ावा गिनती वाले स्थान पर बढ़ाई निगरानी स्वामी गोविन्द देव गिरि ने कहा मैंने दान चढ़ावे की गिनती वाले स्थान को भी देखा और वहां किये जा रहे बदलाव का निरीक्षण किया मुझे लगता है कि भविष्य में अब इस तरह की कोई घटना नहीं होगी इतनी सावधानी बरती जा रही है। उल्लेखनीय है कि चोरी के घटनाक्रम के बाद चंपत राय महासचिव पद से इस्तीफा दे चुके है और उन्होंने ट्रस्ट के कामकाज से खुद को अलग कर लिया है हालाँकि गोविन्द देव गिरि चंपत राय को क्लीन चिट दे चुके हैं उन्हें भरोसा है कि उनका इस घटनाक्रम से सम्बन्ध नहीं हो सकता।