सेशेल्स की संसद में प्रधानमंत्री मोदी का संबोधन, बोले- हिंद महासागर भारत-सेशेल्स को विभाजित नहीं, बल्कि हमें जोड़ता है

Neemuch headlines June 28, 2026, 6:19 pm Technology

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सेशेल्स की संसद को संबोधित करते हुए कहा कि भारत और सेशेल्स दोनों ही समावेशी विकास की दुनिया चाहते हैं। यह उनका 20वां संसदीय संबोधन था। सेशेल्स की संसद में प्रधानमंत्री मोदी का संबोधन, बोले- हिंद महासागर भारत-सेशेल्स को विभाजित नहीं, बल्कि हमें जोड़ता है Google पर MP Breaking को चुनें समावेशी विकास की वैश्विक परिकल्पना को साकार करने की दिशा में भारत और सेशेल्स मिलकर आगे बढ़ना चाहते हैं।

सेशेल्स की राजधानी विक्टोरिया में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वहां की संसद को संबोधित करते हुए यह महत्वपूर्ण संदेश दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इस नेशनल असेंबली को संबोधित करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री के रूप में उपस्थित होना उनके लिए एक विशेष सम्मान का विषय है। उन्होंने भारत के 1.4 अरब लोगों की ओर से सेशेल्स को गर्मजोशी भरी शुभकामनाएं और बधाई प्रेषित की। पीएम मोदी ने स्मरण कराया कि वर्ष 2015 में सेशेल्स ही हिंद महासागर क्षेत्र में उनका पहला दौरा था। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि हिंद महासागर हमारा साझा घर है और भारत तथा सेशेल्स दोनों ही एक ऐसी दुनिया की आकांक्षा रखते हैं, जहाँ विकास अधिक समावेशी हो। प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी रेखांकित किया कि हिंद महासागर के लिए भारत के दृष्टिकोण में सेशेल्स की एक विशिष्ट जगह है। उन्होंने कहा, ‘एक दशक बाद जब मैं यहां वापस आया हूं, तो मेरा यह विश्वास पहले से कहीं ज़्यादा मज़बूत हुआ है।’ उन्होंने सेशेल्स की स्वतंत्रता के 50 वर्ष पूरे होने के जश्न में शामिल होने पर अपनी प्रसन्नता व्यक्त की।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक संबंधों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि भारत और सेशेल्स की मित्रता 50 वर्ष पूर्व राजनयिक संबंध स्थापित होने के साथ शुरू नहीं हुई थी, बल्कि यह कहीं पहले, अगस्त 1770 में आरंभ हुई थी। सेंट ऐनी द्वीप पर ‘थेलेमाक’ नामक जहाज से आए लोगों में पाँच भारतीय भी सम्मिलित थे। इस यात्रा ने बाद में कई अन्य लोगों के लिए मार्ग प्रशस्त किया। समय के साथ, उन भारतीयों की कहानियाँ आधुनिक सेशेल्स के इतिहास का अभिन्न अंग बन गईं। पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि यह हमें याद दिलाता है कि हमारे बीच के संबंध सरकारों द्वारा निर्मित नहीं थे। ये रिश्ते लोगों ने बनाए, परिवारों ने इन्हें संवारा और पीढ़ियों ने इन्हें कायम रखा। हिंद महासागर ने ही इसे संभव बनाया। हिंद महासागर भारत और सेशेल्स को विभाजित नहीं करता, बल्कि हमें जोड़ता है। इसी कारण हम अजनबियों की तरह नहीं, बल्कि पुराने दोस्तों की तरह मिलते हैं। पीएम मोदी ने 20वीं बार विदेशी संसद को किया संबोधित प्रधानमंत्री मोदी का सेशेल्स की संसद को दिया गया यह संबोधन उनके संसदीय संबोधनों की श्रृंखला में बीसवां था। वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री का पदभार संभालने के तुरंत बाद, उन्होंने भूटान, नेपाल, ऑस्ट्रेलिया और फ़िजी की संसदों को संबोधित किया था।

अगले वर्ष, 2015 में, उन्होंने मॉरीशस की नेशनल असेंबली के साथ-साथ श्रीलंका, मंगोलिया, यूनाइटेड किंगडम और अफ़गानिस्तान की संसदों को संबोधित किया। पीएम मोदी ने अमेरिकी कांग्रेस को दो बार किया संबोधित यह सिलसिला 2016 में प्रधानमंत्री मोदी के अमेरिकी कांग्रेस को संबोधन के साथ जारी रहा। वर्ष 2023 में उन्होंने दोबारा अमेरिकी कांग्रेस को संबोधित कर यह इतिहास रचा कि वे अमेरिकी कांग्रेस के संयुक्त सत्र को दो बार संबोधित करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बन गए। इन महत्वपूर्ण दौरों के मध्य, उन्होंने 2018 में युगांडा, 2019 में मालदीव और 2024 में गुयाना की संसदों को भी संबोधित किया। यह क्रम 2025 में और आगे बढ़ा, जब प्रधानमंत्री मोदी ने जुलाई में अपनी यात्राओं के दौरान घाना, त्रिनिदाद और टोबैगो तथा नामीबिया की राष्ट्रीय संसदों को संबोधित किया। इसके पश्चात दिसंबर में इथियोपियाई संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित किया गया। ये संबोधन अफ्रीका और ग्लोबल साउथ के साथ भारत के गहरे होते संबंधों को परिलक्षित करते हैं। इस वर्ष की शुरुआत में, 25 फरवरी 2026 को, पीएम मोदी ने यरूशलेम की अपनी राजकीय यात्रा के दौरान इज़राइल की संसद, ‘नेसेट’ को संबोधित करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बनकर एक और ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की।

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