भोपाल। रीवा जिले के गोविंदगढ़ क्षेत्र में एक साल का मासूम खेलते-खेलते 10 फीट गहरे गड्ढे में गिर गया। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई, लेकिन पुलिस और ग्रामीणों की सूझबूझ से करीब दो घंटे चले रेस्क्यू ऑपरेशन में बच्चे को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। इस घटना ने निर्माण स्थलों पर सुरक्षा इंतजामों को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
मध्य प्रदेश के रीवा जिले से एक ऐसी घटना सामने आई, जिसने कुछ समय के लिए पूरे इलाके की सांसें थाम दीं। गोविंदगढ़ थाना क्षेत्र के महाजन टोला में एक साल का मासूम खेलते-खेलते घर के बाहर बने करीब 10 फीट गहरे गड्ढे में गिर गया। बच्चे के गड्ढे में गिरने की खबर मिलते ही परिवार में चीख-पुकार मच गई और आसपास के लोग भी मौके पर जुट गए। जानकारी के अनुसार, बाबू केवट का बेटा शिवेंद्र केवट घर के बाहर खेल रहा था। इसी दौरान वह पिलर निर्माण के लिए खोदे गए संकरे गड्ढे में जा गिरा। गड्ढा लगभग 10 फीट गहरा और करीब एक फीट चौड़ा था, जिससे बच्चे तक सीधे पहुंचना बेहद मुश्किल हो गया।
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और प्रशासन सक्रिय हो गया। रीवा में ड्रग्स का बड़ा खुलासा! लग्जरी कार से 749 कफ सिरप बरामद, तस्कर फरार रीवा में ड्रग्स का बड़ा खुलासा! लग्जरी कार से 749 कफ सिरप बरामद, तस्कर फरार रीवा में इलाज के बाद युवक की मौत! किडनी ऑपरेशन में लापरवाही का आरोप, 20 करोड़ मुआवजे की मांग रीवा में इलाज के बाद युवक की मौत! किडनी ऑपरेशन में लापरवाही का आरोप, 20 करोड़ मुआवजे की मांग बच्चे के गड्ढे में गिरने की खबर तेजी से पूरे गांव में फैल गई। देखते ही देखते बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। सभी की चिंता सिर्फ एक थी कि किसी भी तरह बच्चे को सुरक्षित बाहर निकाला जाए। राहत की बात यह रही कि गड्ढे में गिरने के बाद भी बच्चा जीवित था, जिससे बचाव दल को उम्मीद बनी रही। पुलिस और ग्रामीणों ने दिखाई समझदारी घटना की जानकारी मिलते ही गोविंदगढ़ थाना प्रभारी अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे।
हालात का जायजा लेने के बाद तय किया गया कि सीधे गड्ढे में उतरना जोखिम भरा हो सकता है। ऐसे में पुलिस और ग्रामीणों ने मिलकर एक वैकल्पिक योजना बनाई। बच्चे तक पहुंचने के लिए मूल गड्ढे के समानांतर दूसरा गड्ढा खोदना शुरू किया गया। यह काम आसान नहीं था क्योंकि मिट्टी खिसकने का खतरा भी बना हुआ था। करीब दो घंटे तक लगातार मेहनत करने के बाद बचाव दल बच्चे तक पहुंचने में सफल रहा। इसके बाद बेहद सावधानी के साथ मासूम को बाहर निकाला गया। रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान पूरे गांव की निगाहें मौके पर टिकी रहीं। जैसे ही बच्चे को सुरक्षित बाहर निकाला गया, लोगों ने राहत की सांस ली। कई ग्रामीणों ने पुलिस और बचाव दल की तत्परता की सराहना की। गड्ढों की सुरक्षा पर उठे सवाल, परिवार ने जताया आभार बचाव के तुरंत बाद बच्चे को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसका स्वास्थ्य परीक्षण किया। जांच में बच्चा पूरी तरह सुरक्षित पाया गया। डॉक्टरों के अनुसार उसे कोई गंभीर चोट नहीं आई, जो किसी चमत्कार से कम नहीं माना जा रहा। इस घटना ने निर्माण कार्यों के दौरान सुरक्षा मानकों को लेकर भी चर्चा शुरू कर दी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि घरों और सार्वजनिक स्थानों पर खोदे जाने वाले गहरे गड्ढों को खुला छोड़ना बेहद खतरनाक हो सकता है। ऐसे स्थानों पर बैरिकेडिंग और चेतावनी संकेत लगाना जरूरी है ताकि बच्चों और राहगीरों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। बच्चे के सुरक्षित बच जाने के बाद परिवार ने पुलिस, प्रशासन और ग्रामीणों का आभार जताया। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय पर रेस्क्यू शुरू नहीं किया जाता तो स्थिति गंभीर हो सकती थी। यह घटना दिखाती है कि संकट के समय प्रशासन और समाज मिलकर काम करें तो बड़े से बड़ा हादसा भी टाला जा सकता है।