अंग्रेजी तारीख 20 मई 2026 ई.। सूर्य उत्तरायण, उत्तर गोल, वसंत ऋतु। राहुकाल दोपहर 12:00 से 01:30 बजे तकचतुर्थी तिथि प्रातः 11 बजकर 06 मिनट तक उपरांत पंचमी तिथि का आरंभ। पुनर्वसु नक्षत्र रात्रि 04 बजकर 12 मिनट (21 मई) तक उपरांत पुष्य नक्षत्र का आरंभ। शूल योग दोपहर 02 बजकर 10 मिनट तक उपरांत गण्ड योग का आरंभ। विष्टि (भद्रा) करण प्रातः 11 बजकर 06 मिनट तक उपरांत बव करण का आरंभ। चंद्रमा रात्रि 10 बजकर 38 मिनट तक मिथुन राशि पर उपरांत कर्क राशि पर संचार करेगा। महत्वपूर्ण विवरण तिथि: शुक्ल चतुर्थी – प्रातः 11:06 बजे तक, फिर पंचमी योग शूल – दोपहर 02:10 बजे तक, फिर गण्ड करण विष्टि (भद्रा) – प्रातः 11:06 बजे तक करण बव – रात्रि 09:42 बजे तक सूर्य और चंद्रमा की स्थिति सूर्योदय का समय प्रातः 05:28 बजे सूर्यास्त का समय सायं 07:08 बजे चंद्रोदय का समय प्रातः 08:43 बजे चंद्रास्त का समय रात्रि 11:08 बजे आज के व्रत त्योहार विनायक चतुर्थी। आज का शुभ मुहूर्त 20 मई 2026 अभिजीत मुहूर्त आज कोई नहीं है।
अमृत काल रात्रि 02 बजकर 00 मिनट (21 मई) से प्रातः 03 बजकर 28 मिनट (21 मई) तक। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 3 बजकर 57 मिनट से 4 बजकर 43 मिनट तक।
आज का अशुभ मुहूर्त 20 मई 2026 : दोपहर 12:00 से 01:30 बजे तक
राहुकाल रहेगा। सुबह 10:30 से दोपहर 12:00 बजे तक
गुलिक काल रहेगा। सुबह 07:30 से 09:00 बजे तक यमगंड रहेगा।
आज का नक्षत्र आज चंद्रदेव पुनर्वसु नक्षत्र में विराजमान रहेंगे।
पुनर्वसु नक्षत्र: रात्रि 04:12 बजे (21 मई) तक स्थान: 20°00’ मिथुन राशि से 3°20’ कर्क राशि तक नक्षत्र स्वामी: बृहस्पतिदेव राशि स्वामी: बुधदेव और चंद्रदेव देवता: अदिति (देवताओं की मां) प्रतीक: धनुष और तरकश सामान्य विशेषताएं: इस नक्षत्र में जन्मे लोग अत्यंत ज्ञानी, आशावादी और आत्मविश्वासी होते हैं। ये स्वभाव से दयालु, आध्यात्मिक और सरल होते हैं। कुशल वक्ता होने के साथ-साथ इनकी स्मरण शक्ति बहुत तीव्र होती है और ये कल्पनाशील व्यक्तित्व के धनी होते हैं।
आज का उपाय : आज भगवान गणेश को दूर्वा अर्पित करें और मोदक का भोग लगाएं।
बुधवार के दिन 'ॐ गं गणपतये नमः' का जाप करना और मूंग की दाल का दान करना जीवन के सुखद संचालन और विघ्नों को दूर करने के लिए अत्यंत मंगलकारी होता है।