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ब्राह्मणी नदी के किनारे मुनिश्री ने किया केशलोच।

प्रदीप जैन April 30, 2026, 4:25 pm Technology

सिंगोली । मेवाड़ प्रान्त कि धार्मिक नगरी सिंगोली में आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य अर्ह योग प्रणेता मुनिश्री प्रणम्य सागर जी महाराज ने 30 अप्रैल गुरुवार चतुर्दशी के दिन प्रातः काल ब्राह्मणी नदी पर केशलोच किया जैन संत अपने हाथों से घास फूस की तरह सिर दाढी व मूंछ के बाल को आसानी से उखाड़ देते है जैन साधु की कठीन तपस्या में केशलोच भी मुलगुण में शामिल हैं बताते है कि इससे जैन साधु में शरीर की सुंदरता का मोह खत्म हो जाता है जैन साधु जब केशलोच करते हैं तो आत्मा की सुंदरता कई गुना बढ़ जाती है अपने आत्म सौंदर्य बढाने के लिए कठिन साधना है इससे संयम का पालन होता है जैन साधु सिर दाढी व मूंछ के बालों को निकालते समय कण्डे की राख का उपयोग करते है ताकी खून निकलने पर रोग न फैले अपने हाथों से बालों को उखाड़कर दिगंबर जैन संत इस बात का परिचय देते है कि जैन धर्म कहने का नही सहने का धर्म है जैन संत हाथों से बालो को उखाड़ना शरीर को कष्ट देना नही है बल्की शरीर की उत्कृष्ट साधना शक्ति परीक्षण है केशलोच तपस्या का अनिवार्य हिस्सा है जैन साधु साल मे दो से तीन बार केशलोच करते है जिस दिन केशलोच होता है उस दिन उपवास रहता है यह पल देखते ही कई श्रद्धालु भाव विभोर हो जाते है केशलोच देखने के दोरान बडी संख्या में समाजजन उपस्थित थे

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