चैत्र शुक्ल पक्ष में 'सोम प्रदोष व्रत' का पावन संयोग बन रहा है। भगवान शिव की उपासना का यह दिन मानसिक शांति और परिवार में सुख-समृद्धि लाने वाला माना जाता है। आज दोपहर 02:38 बजे के बाद चंद्रदेव सिंह राशि और मघा नक्षत्र में प्रवेश करेंगे, जिसके स्वामी केतु और देवता 'पितर' हैं।
मघा नक्षत्र के प्रभाव से आज आपके व्यवहार में उदारता और साहस बना रहेगा, जो जीवन के सही संचालन में सहायक होगा। आज शूल योग का प्रभाव रहेगा, इसलिए वाणी और व्यवहार में सहजता बनाए रखें। आज के दिन आपका स्पष्टवादी और मेहनती स्वभाव आपकी पहचान को और मजबूत करेगा। यदि मन में थोड़ा क्रोध या भावुकता महसूस हो, तो उसे केवल सुधार के लिए एक संकेत के रूप में देखें।
किसी भी शुभ कार्य के लिए दोपहर 12:01 से 12:51 बजे तक का
अभिजीत मुहूर्त सबसे उत्तम है। सुबह राहुकाल के समय सावधानी बरतना लाभकारी रहेगा।
महत्वपूर्ण विवरण तिथि शुक्ल द्वादशी – प्रातः 07:09 बजे तक, फिर त्रयोदशी योग शूल – सायं 04:51 बजे तक
करण बालव – प्रातः 07:09 बजे तक करण कौलव – सायं 06:59 बजे तक सूर्य और चंद्रमा की स्थिति सूर्योदय का समय प्रातः 06:14 बजे
सूर्यास्त का समय सायं 06:38 बजे
चंद्रोदय का समय सायं 04:16 बजे चंद्रास्त का समय प्रातः 05:00 बजे (31 मार्च) सूर्य और चंद्रमा की राशियां सूर्य देव: मीन राशि में स्थित हैं चन्द्र देव: कर्क राशि में – दोपहर 02:38 बजे तक, फिर
सिंह आज के शुभ मुहूर्त अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:01 बजे से दोपहर 12:51 बजे तक
अमृत काल दोपहर 12:23 बजे से दोपहर 01:59 बजे तक आज के अशुभ समय राहुकाल प्रातः 07:47 बजे से प्रातः 09:20 बजे तक गुलिकाल दोपहर 01:59 बजे से सायं 03:32 बजे तक
यमगण्ड प्रातः 10:53 बजे से दोपहर 12:26 बजे तक
आज का नक्षत्र आज चंद्रदेव मघा नक्षत्र में विराजमान रहेंगे। मघा नक्षत्र: सायं 02:48 बजे तक स्थान: 0° सिंह राशि से 13°20’ सिंह राशि तक नक्षत्र स्वामी: केतु राशि स्वामी: सूर्यदेव देवता: पितर (पूर्वज) प्रतीक: शाही सिंहासन सामान्य विशेषताएं: रूढ़िवादी, अधिकारप्रिय, उदार, शाही व्यवहार, साहसी, मेहनती, स्पष्टवादी, विलासिता प्रेमी, कामुक, कभी-कभी क्रोधी और भावुक सोम प्रदोष व्रत (शुक्ल पक्ष) 2026 प्रदोष पूजा मुहूर्त शाम 06:38 से रात 08:57 तक अवधि 02 घंटे 19 मिनट त्रयोदशी तिथि प्रारंभ 30 मार्च, 2026 को सुबह 07:09 बजे त्रयोदशी तिथि समाप्त 31 मार्च, 2026 को सुबह 06:55 बजे प्रत्येक मास के दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखने का विधान है। जब यह तिथि सूर्यास्त के पश्चात प्रदोष काल के समय आती है, तब भगवान शिव की उपासना विशेष फलदायी मानी जाती है। सोमवार के दिन पड़ने के कारण इसे सोम प्रदोष कहा जाता है, जिसे महादेव की प्रसन्नता प्राप्त करने का उत्तम मार्ग माना गया है। यह उपवास न केवल मानसिक शांति प्रदान करता है, बल्कि घर-परिवार में खुशहाली और वैवाहिक जीवन में मधुरता भी लाता है।ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, कुंडली में चंद्रमा की स्थिति को अनुकूल बनाने और उससे संबंधित दोषों के निवारण के लिए यह व्रत अत्यंत प्रभावशाली है। इस दिन एक निर्धन ब्राह्मणी और उसके पुत्र की कथा का श्रवण करना शुभ माना जाता है। सच्ची निष्ठा के साथ की गई पूजा से जीवन में आपसी तालमेल बढ़ता है और तनाव से मुक्ति मिलती है। भक्तजन बड़ी सहजता के साथ इस पावन दिन पर शिव भक्ति में लीन रहते हैं।