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आज मां सिद्धिदात्री की पूजा से मिलेगा सुख-समृद्धि का आशीर्वाद, जानिए शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, भोग, मंत्र और आरती

Neemuch headlines March 27, 2026, 8:25 am Technology

माँ सिद्धिदात्री का दिव्य स्वरूप:-

मां सिद्धिदात्री को देवी दुर्गा का अंतिम और पूर्ण स्वरूप माना जाता है. उनका रूप अत्यंत शांत और तेजस्वी बताया गया है. वे सिंह पर सवार होती हैं और कमल के आसन पर विराजमान रहती हैं. उनके चार हाथों में गदा, चक्र, कमल और शंख सुशोभित होते हैं. यह स्वरूप शक्ति, ज्ञान और सिद्धियों का प्रतीक है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव ने भी इन्हीं की कृपा से सिद्धियां प्राप्त की थीं.

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पूजा का शुभ मुहूर्त:-

आज के दिन पूजा सही समय पर करना बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है.

-ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:44 से 05:30 -प्रातः

संध्या: सुबह 05:07 से 06:17 -

अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:02 से 12:51

-सायं संध्या: शाम 06:36 से 07:46 इन समयों में पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है. कई लोग सुबह के शांत वातावरण में पूजा करना ज्यादा शुभ मानते हैं.

मां सिद्धिदात्री की पूजा विधि:-

-सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ, खासतौर पर बैंगनी रंग के वस्त्र पहनें. -इसके बाद घर के मंदिर को गंगाजल से शुद्ध करें. -व्रत का संकल्प लेने के बाद मां को चंदन, अक्षत, फूल और श्रृंगार सामग्री अर्पित करें. -पंचामृत, फल और मिठाई का भोग लगाएं. घी का दीपक जलाकर मंत्र जाप करें और व्रत कथा सुनें. -अंत में आरती जरूर करें यही पूजा को पूर्णता देती है.

कन्या पूजन का महत्व:-

महा नवमी पर कन्या पूजन की परंपरा बेहद खास मानी जाती है. नौ छोटी कन्याओं को देवी का रूप मानकर उनके पैर धोए जाते हैं और उन्हें भोजन कराया जाता है. आमतौर पर हलवा, पूरी और काले चने का प्रसाद दिया जाता है. इसके बाद उन्हें उपहार और दक्षिणा देकर विदा किया जाता है. यह परंपरा समाज में सम्मान और श्रद्धा का प्रतीक भी है. मां का प्रिय भोग और मंत्र:- धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां सिद्धिदात्री को हलवा, पूरी और काले चने का भोग अत्यंत प्रिय है. इसे भक्ति भाव से अर्पित करने पर देवी शीघ्र प्रसन्न होती हैं. मंत्र: “ॐ देवी सिद्धिदात्र्यै नमः” . भक्ति और विश्वास का अंतिम पड़ाव:-

नवरात्रि का यह अंतिम दिन केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह आत्मचिंतन और ऊर्जा का भी दिन होता है. लोग अपने अनुभव साझा करते हैं किसी को मन की शांति मिली, तो किसी के घर में खुशहाली आई. यही इस पर्व की असली खूबसूरती है, जो हर साल लोगों को फिर से जोड़ देती है.

मां सिद्धिदात्री की आरती:-

जय सिद्धिदात्री माँ तू सिद्धि की दाता. तु भक्तों की रक्षक तू दासों की माता॥

तेरा नाम लेते ही मिलती है सिद्धि. तेरे नाम से मन की होती है शुद्धि॥

कठिन काम सिद्ध करती हो तुम. जभी हाथ सेवक के सिर धरती हो तुम॥

तेरी पूजा में तो ना कोई विधि है. तू जगदम्बें दाती तू सर्व सिद्धि है॥

रविवार को तेरा सुमिरन करे जो. तेरी मूर्ति को ही मन में धरे जो॥

तू सब काज उसके करती है पूरे. कभी काम उसके रहे ना अधूरे॥

तुम्हारी दया और तुम्हारी यह माया. रखे जिसके सिर पर मैया अपनी छाया॥

सर्व सिद्धि दाती वह है भाग्यशाली. जो है तेरे दर का ही अम्बें सवाली॥

हिमाचल है पर्वत जहाँ वास तेरा. महा नन्दा मन्दिर में है वास तेरा॥

मुझे आसरा है तुम्हारा ही माता. भक्ति है सवाली तू जिसकी दाता॥

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