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चंद्रघंटा पूजा विधि, नवरात्रि तीसरा दिन पूजा, चंद्रघंटा माता की आरती, मां चंद्रघंटा मंत्र,

Neemuch headlines March 21, 2026, 8:28 am Technology

चैत्र नवरात्रि की शुरुआत 19 मार्च 2026 से हो चुकी है और इसका समापन 27 मार्च, शुक्रवार को होगा। इस दौरान मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की श्रद्धापूर्वक पूजा की जाती है।

मान्यता है कि इन नौ दिनों में विधि-विधान से मां के अलग-अलग रूपों की आराधना करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आगमन होता है।

बता दें कि आज चैत्र नवरात्रि का तीसरा दिन है और नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा का विशेष महत्व होता है। माना जाता है कि मां चंद्रघंटा की पूजा करने से भक्तों के सभी भय और कष्ट दूर होते हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

आइए जानते हैं मां चंद्रघंटा की पूजा विधि, मंत्र, भोग और आरती,

जिससे आप उनकी कृपा प्राप्त कर सकते हैं।

मां चंद्रघंटा का स्वरूप:-

चैत्र नवरात्रि के तीसरे दिन मां दुर्गा के तीसरे स्वरूप, मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। यह स्वरूप शक्ति, साहस और पराक्रम का प्रतीक माना जाता है। मां चंद्रघंटा का शरीर स्वर्ण के समान तेजस्वी और दिव्य आभा से युक्त होता है, जबकि उनका वाहन सिंह है, जो वीरता और निर्भीकता का प्रतीक है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां के दस भुजाएं होती हैं, जिनमें वे कमल, धनुष, बाण, खड्ग, कमंडल, तलवार, त्रिशूल और गदा जैसे दिव्य अस्त्र-शस्त्र धारण करती हैं। उनके कंठ में श्वेत पुष्पों की माला और सिर पर रत्नजड़ित मुकुट सुशोभित होता है, जो उनकी दिव्यता को और भी बढ़ाता है। मां चंद्रघंटा का यह स्वरूप युद्ध मुद्रा में विराजमान रहता है, जो बुराई के विनाश और भक्तों की रक्षा का संकेत देता है।

मां चंद्रघंटा की पूजा विधि:-

नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा का विशेष विधान बताया गया है। इस दिन भक्तों को सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए। इसके बाद मन में श्रद्धा रखते हुए मां चंद्रघंटा और मां दुर्गा के अन्य स्वरूपों का ध्यान करें और पूजा की शुरुआत करें। पूजा के दौरान सबसे पहले मां को फूल, माला, कुमकुम, सिंदूर और अक्षत अर्पित करें।

इसके बाद विधि-विधान से उनका पूजन करें और भोग के रूप में केसर की खीर या दूध से बनी मिठाई अर्पित करें, जो मां को अत्यंत प्रिय मानी जाती है। इसके बाद घी का दीपक जलाएं, धूप अर्पित करें और श्रद्धापूर्वक मंत्र जाप करें। साथ ही दुर्गा चालीसा और दुर्गा सप्तशती का पाठ करना भी शुभ माना जाता है।

अंत में मां की आरती अवश्य करें और पूजा के दौरान हुई किसी भी भूल-चूक के लिए क्षमा याचना करें। माना जाता है कि इस विधि से पूजा करने पर मां चंद्रघंटा प्रसन्न होती हैं और अपने भक्तों को सुख-शांति का आशीर्वाद देती हैं।

मां चंद्रघंटा का भोग:-

धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन मां को दूध और दूध से बनी मिठाइयों का भोग लगाना अत्यंत फलदायी होता है। कहा जाता है कि मां चंद्रघंटा को दूध से बने भोग अर्पित करने से जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आती है, साथ ही सभी प्रकार के कष्ट और बाधाएं दूर होती हैं।

मां चंद्रघंटा का ध्यान मंत्र:-

पिंडजप्रवरारूढ़ा, चंडकोपास्त्रकैर्युता।

प्रसादं तनुते मह्यं, चंद्रघंटेति विश्रुता।।

अर्थात् श्रेष्ठ सिंह पर सवार और चंडकादि अस्त्र शस्त्र से युक्त मां चंद्रघंटा मुझ पर अपनी कृपा करें।

वन्दे वांछित लाभाय चन्द्रार्धकृत शेखरम्।

सिंहारूढा चंद्रघंटा यशस्वनीम्॥

मणिपुर स्थितां तृतीय दुर्गा त्रिनेत्राम्।

रंग, गदा, त्रिशूल,चापचर,पदम् कमण्डलु माला वराभीतकराम्॥

मां दुर्गा की ये आरती:-

माता चंद्रघंटा आरती जय मां चंद्रघंटा सुख धाम।

पूर्ण कीजो मेरे सभी काम।

चंद्र समान तुम शीतल दाती।

चंद्र तेज किरणों में समाती।

क्रोध को शांत करने वाली। मीठे बोल सिखाने वाली।

मन की मालक मन भाती हो।

चंद्र घंटा तुम वरदाती हो। सुंदर भाव को लाने वाली।

हर संकट मे बचाने वाली।

हर बुधवार जो तुझे ध्याये। श्रद्धा सहित जो विनय सुनाएं।

मूर्ति चंद्र आकार बनाएं। सन्मुख घी की ज्योत जलाएं।

शीश झुका कहे मन की बाता।

पूर्ण आस करो जगदाता।

कांची पुर स्थान तुम्हारा।

करनाटिका में मान तुम्हारा। नाम तेरा रटू महारानी।

भक्त की रक्षा करो भवानी।

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