हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्रि का पर्व आस्था, भक्ति और शक्ति की उपासना का सबसे पवित्र समय माना जाता है. मान्यता है कि नवरात्रि के इन नौ दिनों में मां दुर्गा पृथ्वी पर अपने भक्तों के बीच आती हैं और उनकी सच्ची श्रद्धा से की गई प्रार्थनाओं को स्वीकार करती हैं. हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र नवरात्रि की शुरुआत आज यानी 19 मार्च, गुरुवार से होगी और इसका समापन 27 मार्च, शुक्रवार को होगा. पूरे नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व में मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है. हर दिन देवी के एक विशेष रूप को समर्पित होता है और उसी के अनुसार भक्त पूजा-अर्चना करते हैं. इन दिनों श्रद्धालु व्रत रखते हैं, मां दुर्गा की आरती करते हैं और घरों में कलश स्थापना कर देवी का आह्वान करते हैं.
नवरात्रि की शुरुआत प्रतिपदा तिथि पर होने वाली घटस्थापना यानी कलश स्थापना से होती है. इसे नवरात्रि पूजा का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है. इस दिन विधि-विधान से कलश स्थापित कर मां दुर्गा का आह्वान किया जाता है और अखंड ज्योति जलाकर नौ दिनों तक पूजा की जाती है. धार्मिक मान्यता है कि सही मुहूर्त में घटस्थापना करने से घर में सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है.
नवरात्रि के दौरान अष्टमी और नवमी तिथि का भी विशेष महत्व होता है, जब कन्या पूजन किया जाता है. आइए जानते हैं इस बार घटस्थापना का शुभ मुहूर्त क्या रहेगा, नौ दिनों में किस दिन मां दुर्गा के कौन से स्वरूप की पूजा की जाएगी, साथ ही जानेंगे अष्टमी-नवमी की सही तारीख और पूजा से जुड़ी अन्य जरूरी बातें.
इस नवरात्रि जरूर करें ये उपाय:-
नवरात्रि की शुरुआत गुरुवार या शुक्रवार को होती है, तो मां दुर्गा की सवारी पालकी या डोली मानी जाती है. इस वर्ष भी नवरात्रि का आरंभ गुरुवार से हो रहा है, इसलिए मां दुर्गा पालकी पर सवार होकर आएंगी. हालांकि, मां का पालकी पर आगमन बहुत शुभ संकेत नहीं माना जाता है. देवी पुराण में बताया गया है कि जब देवी पालकी में आती हैं तो दुनिया में कुछ प्रकार की परेशानियों की संभावना बढ़ सकती है. नवरात्रि के दौरान दुर्गा सप्तशती का पाठ करवाना बहुत फलदायी माना जाता है. यदि पूरे नौ दिनों तक कवच, अर्गला, कीलक और मंत्र न्यास के साथ इसका पाठ किया जाए तो यह नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने में मदद करता है. साथ ही यह पाठ व्यक्ति को साहस, शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करता है.
ऐसे में इस नवरात्रि दुर्गा सप्तशती का संपूर्ण पाठ जरूर करवाएं.
नवरात्रि के पहले दिन करें ये उपाय:-
चैत्र नवरात्रि के पहले दिन माता शैलपुत्री को प्रसन्न करने के लिए आपको एक पान के पत्ते में 21 लौंग रखकर मां को अर्पित करना चाहिए. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता को प्रसन्न करता है और मां आपकी मनोकामनाएं पूरी कर सकती हैं.
चैत्र नवरात्रि 2026 महत्व:-
नवरात्रि हिंदुओं के सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है, जो विश्व भर में हिंदुओं द्वारा मनाया जाता है. इन नौ दिनों के दौरान, देवी दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है. यह त्योहार मार्च और अप्रैल महीनों में पड़ता है. यह दिन नव वर्ष की शुरुआत का प्रतीक है और भारत के विभिन्न हिस्सों में इसे अलग-अलग नामों से मनाया जाता है. विक्रम संवत के अनुसार, इसी दिन से नव वर्ष की शुरुआत होती है.
दुर्गा माता मंत्र:-
"सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके, शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणी नमोस्तुते" यह मंत्र पवित्र पुस्तक दुर्गा सप्तशती या देवी महात्म्य से लिया गया है.
देवी का प्रस्थान हाथी पर होगा:-
हाथी को आमतौर पर शांति और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है, लेकिन कुछ मान्यताओं में इसे भी पूरी तरह शुभ नहीं माना गया है. इस वर्ष देवी का आगमन डोली पर होगा डोली पर आगमन को शास्त्रों में शुभ नहीं माना जाता. यह समाज या देश में कुछ चुनौतियों या अस्थिरता का संकेत दे सकता है.
नवरात्रि के 9 दिन और 9 रंग:-
पहला दिन- नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है. इस दिन पीले रंग के कपड़े पहनना शुभ माना जाता है. पीला रंग खुशहाली, ऊर्जा और सकारात्मकता का प्रतीक होता है.
दूसरा दिन- दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की आराधना की जाती है. इस दिन हरे रंग के कपड़े पहनना अच्छा माना जाता है. हरा रंग शांति, विकास और समृद्धि का प्रतीक है.
तीसरा दिन- तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा होती है. इस दिन ग्रे रंग पहनना शुभ माना जाता है. यह रंग संतुलन और स्थिरता को दर्शाता है.
चौथा दिन- नवरात्रि के चौथे दिन मां कुष्मांडा की पूजा की जाती है. इस दिन नारंगी रंग पहनना शुभ माना जाता है. यह रंग ऊर्जा, उत्साह और शक्ति का प्रतीक है.
पांचवां दिन- पांचवें दिन मां स्कंदमाता की आराधना की जाती है. इस दिन सफेद रंग के कपड़े पहनना शुभ होता है, जो पवित्रता और शांति का संकेत देता है.
छठा दिन- छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा की जाती है. इस दिन लाल रंग पहनना शुभ माना जाता है. लाल रंग साहस और शक्ति का प्रतीक है.
सातवां दिन- सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा की जाती है. इस दिन नीले रंग के कपड़े पहनना शुभ होता है, जो आत्मविश्वास और ताकत को दर्शाता है.
आठवां दिन- आठवें दिन मां महागौरी की पूजा होती है. इस दिन गुलाबी रंग पहनना शुभ माना जाता है. यह रंग प्रेम और करुणा का प्रतीक है.
नौवां दिन- नवरात्रि के आखिरी दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है. इस दिन बैंगनी रंग पहनना शुभ माना जाता है,
जो आध्यात्मिकता और समृद्धि का प्रतीक है.
कैसे करें कलश स्थापना?:-
नवरात्र के पहले दिन कलश स्थापना बहुत विधि-विधान से की जाती है. आसान तरीके से आप ऐसे कर सकते हैं:
1- सुबह स्नान करके पूजा स्थान साफ करें
2- गंगाजल छिड़ककर स्थान को शुद्ध करें
3- एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं
4- मां दुर्गा की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें
5- मिट्टी डालकर उसमें जौ बोएं
6- उसके ऊपर जल से भरा कलश रखें
7- कलश में सुपारी, चावल और गंगाजल डालें
8- आम के पत्ते लगाकर ऊपर नारियल रखें
9- दीपक जलाकर पूजा करें और व्रत का संकल्प लें ऐसा करने से घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है.
किस दिशा में करें कलश की स्थापना?:-
सनातन परंपरा में कलश को सुख-सौभाग्य-समृद्धि दिलाने वाले एक मंगल प्रतीक के रूप में जाना जाता है. हिंदू मान्यता के अनुसार नवरात्रि में देवी पूजा के जिस कलश की स्थापना की जाती है, उसमें सभी नवग्रह, नक्षत्र और तीर्थों का वास होता है. ऐसे में इसे स्थापित करने से पहले सही दिशा जरूर जान लेना चाहिए. वास्तु के अनुसार नवरात्रि में कलश स्थापना के लिए ईशान कोण यानि उत्तर-पूर्व दिशा सबसे ज्यादा शुभ होती है.
ऐसे में कलश को शुभ मुहूर्त में शुभ दिशा में ही स्थापित करें. किस दिशा में बैठकर करें
नवरात्रि की पूजा?:-
हिंदू मान्यता के अनुसार, यदि कोई कार्य सही समय पर सही दिशा में किया जाए तो उसमें जरूर सफलता प्राप्त होती है. ऐसे में नवरात्रि की पूजा भी शुभ मुहूर्त में करने के साथ ही साथ सही दिशा में बैठकर करनी चाहिए. वास्तु शास्त्र के अनुसार, साधक को हमेशा उत्तर-पूर्व दिशा में बैठकर ही नवरात्रि की पूजा करनी चाहिए. वास्तु नियमों के अनुसार, ईशान कोण देवी पूजा के लिए अत्यधिक शुभ और फलदायी माना गया है. इसी प्रकार पूजा करते समय आपका मुख भी उत्तर, पूर्व या फिर उत्तर-पूर्व दिशा की ओर होना सबसे उत्तम होता है.
मां शैलपुत्री की पौराणिक कथा:-
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, एक बार प्रजापति ने यज्ञ किया तो इसमें सारे देवताओं को निमंत्रण मिला लेकिन भगवान शिव को नहीं बुलाया गया. तब भगवान शिव (Lord Shiva) ने मां सती से कहा कि यज्ञ में सभी देवताओं को आमंत्रित किया गया है लेकिन मुझे नहीं, ऐसे में मेरा वहां पर जाना सही नहीं है. माता सती का प्रबल आग्रह देखकर भगवान शंकर ने उन्हें यज्ञ में जाने की अनुमति दे दी. सती जब घर पहुंची तो उन्हें केवल अपनी मां से ही स्नेह मिला. उनकी बहनें व्यंग्य और उपहास करने लगीं जिसमें भगवान शंकर के प्रति तिरस्कार का भाव था.
दुर्गा चालीसा :-
नमो नमो दुर्गे सुख करनी । नमो नमो अम्बे दुःख हरनी ॥
निराकार है ज्योति तुम्हारी । तिहूँ लोक फैली उजियारी ॥
शशि ललाट मुख महाविशाला । नेत्र लाल भृकुटि विकराला ॥
रूप मातु को अधिक सुहावे । दरश करत जन अति सुख पावे ॥
तुम संसार शक्ति लय कीना । पालन हेतु अन्न धन दीना ॥
मां शैलपुत्री का रूप?:-
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, हिमालयराज के यहां जब पुत्री का जन्म हुआ तो उनका नाम शैलपुत्री रखा गया. इनका वाहन वृषभ है, इसलिए इन्हें वृषारूढा के नाम से भी पुकारा जाता है. मां शैलपुत्री के दाएं हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल का फूल होता हैं. उन्हें सती के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि वो सती मां का ही दूसरा रूप हैं.
कलश में क्या-क्या डालना :-
इसमें सबसे पहले जल भरिए, थोड़ा सा गंगाजल, हल्दी का एक गाठ, सुपारी, दो लौंग और दो इलायची डालिए. साथ में एक सिक्का, थोड़ा सा अक्षत और फूल भी डाल सकते हैं. इसके बाद आप पांच या सात आम के पत्ते या अशोक के पत्ते रख सकते हैं.
कलश स्थापना का सही तरीका क्या है?:-
आप जब कलश स्थापना करेंगे, तो इसमें आपकी श्रद्धा, भक्ति और मनवांछित इच्छा शामिल होनी चाहिए. स्थापना के समय नौ लौंग ले सकते हैं, उन्हें कलावे में बांधकर माला बना लीजिए और माता के गले में पहले दिन अर्पित कीजिए. इससे मां का संपूर्ण और अच्छा आशीर्वाद आपके ऊपर बना रहेगा. पंडित शिप्रा ने कहा कि कलश के लिए आप सोने, चांदी या किसी भी धातु का कलश ले सकते हैं, लेकिन सबसे शुभ मिट्टी का कलश माना जाता है.
घटस्थापना कब है?:-
पंचांग के अनुसार, चैत्र नवरात्रि की शुरुआत चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होती है. 2026 में इसके समय इस प्रकार हैं. प्रतिपदा तिथि शुरू- 18 मार्च 2026, रात 11:39 बजे प्रतिपदा तिथि समाप्त- 19 मार्च 2026, रात 8:58 बजे तक उदय तिथि (सूर्योदय वाली तिथि) के अनुसार, पहला व्रत और घटस्थापना दोनों 19 मार्च 2026 को होंगे.
पूजा की सामग्री की पूरी लिस्ट:-
मां दुर्गा की तस्वीर या कैलेंडरमाता के लिए चौकीश्रृंगार की सामग्री (लाल चुनरी, सिंदूर, महावर (आलता), बिंदी, चूड़ी, इत्र, नेल पॉलिश, मेहंदी, काजल, गजरा, नथ, बिछिया, कंघी, पायल, कान की बाली, रबर बैंड और लिपस्टिक)मिट्टी का बर्तन और जौतांबे या मिट्टी का कलशआम के पत्तेनारियलरोली और कुमकुमअक्षत (चावल)मातरानी का ध्वजसूखा नारियल फूल-मालाअगरबत्ती और धूपदीपक और घी या तेलपंचमेवा, गुग्गल, लोबान, माचिसपान, सुपारी और लौंग-इलायचीफलमिठाई का भोगगंगाजलकपूरआरती थाली