आज होलिका दहन और पूर्णिमा व्रत, जानें शुभ मुहूर्त

Neemuch headlines March 2, 2026, 8:31 am Technology

आज 'अतिगण्ड' योग रहेगा, जिसमें सावधानी और धैर्य के साथ कार्य करने की आवश्यकता होती है। अपने महत्वपूर्ण कार्यों के सही संचालन के लिए दोपहर के समय अभिजीत मुहूर्त का लाभ उठाएं, क्योंकि इस दौरान की गई शुरुआत शुभ फल और सफलता दिलाती है। राहुकाल के दौरान किसी भी प्रकार के मानसिक तनाव या जल्दबाजी से बचें और अपनी सहजता बनाए रखें।

आज का दिन अपनी नेतृत्व क्षमता को दिखाने और बुद्धिमानी से कठिन कार्यों को सुलझाने के लिए उत्तम है।

तिथि शुक्ल चतुर्दशी – सायं 05:55 बजे तक

योग अतिगण्ड – दोपहर 12:19 बजे तक

करण वणिज – सायं 05:55 बजे तक

करण: विष्टि प्रातः 05:28 बजे तक (3 मार्च) सूर्य और चंद्रमा की स्थिति

सूर्योदय का समय प्रातः 06:45 बजे

सूर्यास्त का समय सायं 06:21 बजे

चंद्रोदय का समय सायं 05:20 बजे

चंद्रास्त का समय: प्रातः 06:33 बजे (3 मार्च) समस्त नव ग्रहों की की राशियां (प्रात: 06: 00 बजे) सूर्य देव: कुंभ राशि में स्थित हैं।

चन्द्र देव: कर्क राशि में स्थित हैं। मंगल देव: कुंभ राशि में स्थित हैं। बुध देव: कुंभ राशि में स्थित हैं। गुरु बृहस्पति: मिथुन राशि में स्थित हैं। शुक्र देव: मीन राशि में स्थित हैं। शनि देव: मीन राशि में स्थित हैं।

राहु: कुंभ राशि में स्थित हैं। केतु: सिंह राशि में स्थित हैं।

आज के शुभ मुहूर्त अभिजीत मुहूर्त:-

दोपहर 12:10 बजे से दोपहर 12:57 बजे तक अमृत काल: प्रातः 05:09 बजे (3 मार्च) से प्रातः 06:44 बजे (3 मार्च) तक

आज के अशुभ समय:-

राहुकाल प्रातः 08:12 बजे से प्रातः 09:39 बजे तक

गुलिकाल दोपहर 02:00 बजे से दोपहर 03:27 बजे तक

यमगण्ड प्रातः 11:06 बजे से प्रातः 12:33 बजे तक

आज का नक्षत्र आज चंद्रदेव आश्लेषा नक्षत्र में विराजमान रहेंगे। आश्लेषा नक्षत्र: प्रातः 07:51 बजे तक सामान्य विशेषताएं: मजबूत, हंसमुख, उत्साही, चालाक, कूटनीतिक, स्वार्थी, गुप्त स्वभाव वाले, बुद्धिमान, रहस्यवादी, तंत्र-मंत्र में रुचि रखने वाले, तीव्र स्मृति वाले, नेतृत्वक्षम और यात्रा प्रिय।

नक्षत्र स्वामी: बुध देव राशि स्वामी: चंद्र देव देवता: नाग प्रतीक: सर्प आज होलिका दहन है और पूर्णमा व्रत। होलिका दहन मुहूर्त भद्रा पुंछा: रात 01:25 से रात 02:35 तक भद्रा मुखा: रात 02:35 से सुबह 04:30 तक शास्त्रों के अनुसार होलिका दहन, जिसे छोटी होली या होलिका दीपक भी कहते हैं, प्रदोष काल में करना श्रेष्ठ होता है। इसके लिए पूर्णिमा तिथि का होना आवश्यक है। पूर्णिमा के शुरुआती हिस्से में भद्रा का वास होता है, और मान्यताओं के अनुसार भद्रा के समय किसी भी मांगलिक या शुभ कार्य को करने से बचना चाहिए। धार्मिक दृष्टिकोण से यह समय बहुत महत्वपूर्ण है। भद्रा काल के बीत जाने के बाद ही होलिका दहन करने का नियम है, ताकि जीवन में सकारात्मकता आए और सभी कष्टों का निवारण हो सके। भक्त इस परंपरा को पूरी श्रद्धा और सहजता के साथ निभाते हैं।

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