सरवानिया महाराज। नगर में रविवार को आयोजित विशाल हिंदू सम्मेलन भव्यता, अनुशासन एवं धार्मिक उल्लास के साथ ऐतिहासिक रूप से संपन्न हुआ। सम्मेलन को लेकर नगर में कई दिनों पूर्व से ही विशेष उत्साह का वातावरण बना हुआ था। पूरा नगर भगवामय नजर आया जगह-जगह भगवा ध्वज, भव्य सजावट एवं आकर्षक स्वागत द्वार लगाए गए थे, जिससे संपूर्ण क्षेत्र धर्ममय वातावरण से ओत-प्रोत हो गया। इस विराट आयोजन की सफलता में नगर के सर्व हिंदू समाज का पूर्ण सहयोग रहा, जिसके कारण यह सम्मेलन ऐतिहासिक स्वरूप ग्रहण कर सका। सम्मेलन से पूर्व नगर के प्रत्येक मोहल्ले में हनुमान चालीसा पाठ का आयोजन किया गया। इससे नगर में आध्यात्मिक चेतना का व्यापक संचार हुआ तथा जनमानस में धर्म, संस्कार एवं राष्ट्रभाव के प्रति विशेष जागरूकता देखने को मिली कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातः मातृशक्ति द्वारा निकाली गई भव्य कलश यात्रा से हुआ। यह यात्रा प्राचीन शिव मंदिर से प्रारंभ होकर नगर के प्रमुख मार्गों से होती हुई शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय परिसर, उपरेड़ा रोड स्थित सम्मेलन स्थल पर पहुंची। बैंड-बाजों के साथ निकली इस यात्रा में 500 से अधिक मातृशक्ति बहनों ने सहभागिता की। श्रद्धा, अनुशासन एवं भक्ति से ओत-प्रोत यह यात्रा पूरे नगर के लिए आस्था, संस्कृति और नारी शक्ति का सशक्त प्रतीक बनी। सम्मेलन से पूर्व हाई सेकेंडरी स्कूल परिसर में आयोजन स्थल का भूमि पूजन एवं संगठन कार्यालय उद्घाटन वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विधिविधानपूर्वक संपन्न हुआ, जिससे आयोजन को आध्यात्मिक ऊर्जा एवं संगठनात्मक मजबूती प्राप्त हुई।
संतों के पावन आशीर्वचन से मिला आध्यात्मिक मार्गदर्शन :-
सम्मेलन मंच से श्री 108 श्री स्वासानंद जी महाराज (काशीवाले) के पावन आशीर्वचन प्राप्त हुए। आप श्री नारायणी आश्रम केंद्र, वृंदावन धाम, बर्डियाखेड़ी के निवासी हैं। महाराज श्री ने अपने उद्बोधन में कहा कि सनातन धर्म केवल पूजा-पद्धति नहीं, बल्कि जीवन जीने की श्रेष्ठ पद्धति है। जब समाज अपने संस्कारों से जुड़ा रहता है, तभी राष्ट्र सशक्त बनता है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे मोबाइल संस्कृति से बाहर निकलकर धर्म, परिवार एवं राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों को समझें। समाज में फैल रही कुरीतियों, भेदभाव एवं विघटनकारी शक्तियों से सतर्क रहने का संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि संगठित समाज ही राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति है। महाराज श्री के ओजस्वी वाणी से पूरा पंडाल श्रद्धा, भक्ति और ऊर्जा से ओत-प्रोत हो गया।
मुख्य वक्ता धर्मेंद्र मौर्य का प्रभावशाली बौद्धिक उद्बोधन :-
मुख्य वक्ता के रूप में धर्मेंद्र मौर्य ने अत्यंत प्रभावशाली एवं विचारोत्तेजक बौद्धिक उद्बोधन दिया। आपने वर्ष 2007 में शिक्षा पूर्ण करने के पश्चात राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक के रूप में सेवा कार्य प्रारंभ किया। खंड, जिला एवं विभाग स्तर पर विभिन्न दायित्वों का निर्वहन करते हुए वर्तमान में आप मालवा प्रांत सामाजिक समरसता सह-संयोजक के रूप में कार्यरत हैं। अपने उद्बोधन में उन्होंने कहा कि समाज को कमजोर करने का सबसे बड़ा हथियार जाति, वर्ग और भेदभाव है।
जब तक समाज समरस नहीं होगा, तब तक राष्ट्र सशक्त नहीं बन सकता। उन्होंने युवाओं से सामाजिक एकता, सेवा भावना एवं राष्ट्र प्रथम के भाव के साथ कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि हिंदू समाज की शक्ति उसकी एकता में है। हमें आपसी भेद भूलकर “एक समाज – एक राष्ट्र” के भाव से आगे बढ़ना होगा। उनके ओजस्वी विचारों से युवाओं में राष्ट्रभक्ति एवं समाज सेवा की भावना और अधिक प्रबल हुई।
मातृशक्ति उद्बोधन से नारी शक्ति का जागरण :-
महिलाओं के लिए आयोजित मातृशक्ति उद्बोधन में सुश्री सरिता कश्यप ने प्रेरणादायक विचार रखे। आप सेवा भारती की पूर्णकालिक कार्यकर्ता हैं तथा वर्तमान में सेवा भारती कन्या छात्रावास, नीमच की अधीक्षका एवं उज्जैन संभाग किशोरी विकास प्रमुख हैं। उन्होंने कहा कि नारी केवल परिवार की धुरी नहीं, बल्कि संस्कारों की प्रथम गुरु होती है। समाज और राष्ट्र का निर्माण मातृशक्ति के संस्कारों से ही संभव है। उन्होंने बहनों से आत्मनिर्भर, आत्मविश्वासी एवं संस्कारवान बनने का आह्वान किया।
धार्मिक आयोजनों के साथ राष्ट्रभक्ति का सशक्त संदेश :-
सम्मेलन के दौरान गो माता पूजन एवं भारत माता की आरती श्रद्धा एवं विधिविधान के साथ संपन्न हुई। साथ ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित संघ शताब्दी वर्ष प्रदर्शनी विशेष आकर्षण का केंद्र रही, जिसमें संघ के इतिहास, विचारधारा, सेवा कार्यों एवं राष्ट्र निर्माण में दिए गए योगदान को चित्रों एवं विभिन्न माध्यमों से प्रदर्शित किया गया।
कार्यक्रम में मातृशक्ति बहनों द्वारा शस्त्र प्रदर्शन भी किया गया, जिसके माध्यम से अनुशासन, आत्मरक्षा एवं राष्ट्रभक्ति का सशक्त संदेश दिया गया।
तीन हजार से अधिक लोगों की ऐतिहासिक सहभागिता :-
इस विशाल हिंदू सम्मेलन में लगभग तीन हजार से अधिक लोग एवं सर्व हिंदू समाज के नागरिक उपस्थित रहे। व्यापक जनसहभागिता ने इस आयोजन को ऐतिहासिक स्वरूप प्रदान करते हुए नगर में सामाजिक एकता, संगठन शक्ति और सनातन चेतना का भव्य प्रदर्शन किया।
अतिथि स्वागत, संचालन एवं आभार :-
अतिथियों का स्वागत राजेंद्र सिंह राणावत, संदीप राठौर एवं बहन पार्वती साल्वी द्वारा किया गया। कार्यक्रम का कुशल संचालन घीसालाल मकवाना ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन संयोजक सुरेश राठौर (लाला भाई) ने व्यक्त किया।
पंगत, एक समाज के संदेश के साथ स्नेह भोज :-
कार्यक्रम के समापन पर श्रद्धालुओं एवं सर्व हिंदू समाज के लिए स्नेह भोज का आयोजन किया गया। भोजन व्यवस्था के माध्यम से सामाजिक समरसता का संदेश दिया गया एक पंगत, एक समाज।
आयोजन समिति ने कहा कि यह सम्मेलन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सनातन एकता, सामाजिक समरसता एवं राष्ट्रभाव का सशक्त प्रतीक बनकर उभरा है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत सिद्ध होगा।