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प्रयागराज में माघ मेला का भव्य शुभारंभ, पौष पूर्णिमा स्नान पर संगम तट पर उमड़ा जनसैलाब, कड़ाके की ठंड में श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी

Neemuch headlines January 3, 2026, 3:33 pm Technology

प्रयागराज में माघ मेला का भव्य शुभारंभ, पौष पूर्णिमा स्नान पर संगम तट पर उमड़ा जनसैलाब, कड़ाके की ठंड में श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी भोपाल। माघ मेले की शुरुआत के साथ ही त्रिवेणी संगम श्रद्धालुओं से भर गया है। कड़ी ठंड और कोहरे के बावजूद लाखों लोग संगम में स्नान के लिए पहुंचे। प्रशासन का अनुमान है कि पहले ही दिन 25–30 लाख श्रद्धालुओं ने स्नान किया,

जबकि पूरे आयोजन में 12–15 करोड़ श्रद्धालुओं के आने की संभावना है। इस दौरान सुरक्षा और सुविधाओं को लेकर प्रशासन ने व्यापक व्यवस्थाएं की हैं। प्रयागराज में माघ मेला का भव्य शुभारंभ, पौष पूर्णिमा स्नान पर संगम तट पर उमड़ा जनसैलाब, कड़ाके की ठंड में श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी प्रयागराज में शनिवार 3 जनवरी को माघ मेला का विधिवत शुभारंभ पौष पूर्णिमा के पहले स्नान पर्व के साथ हो गया है। त्रिवेणी संगम जहां गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती नदियां मिलती हैं, वहां सुबह से ही श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। कड़ाके की ठंड के बावजूद यहां आस्था की डुबकी लगाने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु आ रहे हैं। माघ मेला 3 जनवरी से 15 फरवरी तक चलेगा। इस दौरान कई प्रमुख स्नान तिथियां और धार्मिक आयोजन शामिल हैं। इनमें मकर संक्रांति, मौनी अमावस्या, बसन्त पंचमी और माघी पूर्णिमा जैसे पवित्र स्नान पर्व शामिल होंगे। इस बार माघ मेला बहुत विशेष है क्योंकि 75 वर्षों बाद एक दुर्लभ शुभ ज्योतिषीय संयोग बन रहा है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सूर्य का मकर राशि में प्रवेश (मकर संक्रांति पर) एक विशेष योग है जो स्नान-दान और तपस्या के पुण्य को कई गुना बढ़ा देता है।

ये संगम नगरी प्रयागराज में आज से माघ मेला का शुभारंभ हो गया है। पौष पूर्णिमा के पावन अवसर पर त्रिवेणी संगम पर लाखों श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई। पौष पूर्णिमा से ही मेले में कल्पवास की परंपरा भी शुरू हो गई है जिसमें श्रद्धालु पूरे एक माह तक संगम तट पर कठोर साधना, ध्यान, योग एवं नियमित स्नान के साथ संयमित जीवन जीते हैं। माना जाता है कि इस दौरान किए गए तप, जप और ध्यान से जीवन-चक्र के बंधनों से मुक्ति और मोक्ष की प्राप्ति संभव होती है। संगम पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ माघ मेले को हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र धार्मिक आयोजन के रूप में देखा जाता है। धार्मिक मान्यतानुसार इस अवधि में संगम में स्नान करने से पापों का नाश होता है और आत्मा की शुद्धि होती है। त्रिवेणी संगम को हिन्दू परंपरा में ‘तीर्थराज’ अर्थात सभी तीर्थों का राजा कहा जाता है और यहां पर स्नान का फल सर्वाधिक पुण्यदायी माना जाता है। सुरक्षा के व्यापक इंतजाम प्रशासन के अनुमान के अनुसार आज 25 से 30 लाख से अधिक श्रद्धालु संगम में पवित्र स्नान करेंगे। वहीं मेले के पूरे आयोजन में 12 से 15 करोड़ लोगों के आने की उम्मीद जताई जा रही है।

इस आयोजन के लिए प्रशासन द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं। यातायात, स्वास्थ्य, आपदा प्रबंधन तथा भीड़ नियंत्रण के उपायों के साथ ही सुरक्षा एजेंसियों की तैनाती भी सुनिश्चित की गई है।

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