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राजस्थान में सड़क हादसों पर हाईकोर्ट सख्त, संज्ञान लेकर सरकार से मांगा जवाब

Neemuch headlines November 5, 2025, 7:54 pm Technology

जयपुर।राजस्थान में सड़क हादसों में लगातार बढ़ती मौतों पर चिंता जताते हुए जयपुर और जोधपुर दोनों हाईकोर्ट पीठों ने मंगलवार को स्वत: संज्ञान (सुओ मोटो) लेते हुए राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है।

अदालत ने केंद्र और राज्य सरकार से यह बताने को कहा है कि सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं। अदालत ने कहा कि पिछले दो सप्ताह में सौ से अधिक लोगों की मौत सड़क हादसों में होना बेहद गंभीर मामला है और यह प्रशासनिक लापरवाही की ओर इशारा करता है। राजस्थान में सड़क हादसों पर हाईकोर्ट सख्त जोधपुर मुख्य पीठ की खंडपीठ न्यायमूर्ति डॉ. पुष्पेन्द्र सिंह भाटी और न्यायमूर्ति अनुरूप सिंघी ने कहा कि न्यायालय राजस्थान में सड़क हादसों की बढ़ती संख्या से व्यथित है। अदालत ने टिप्पणी की कि “इन घातक दुर्घटनाओं की भयावह आवृत्ति तत्काल और समन्वित संस्थागत प्रतिक्रिया की मांग करती है।” कोर्ट ने कहा कि ऐसे हादसे, जिन्हें उचित सावधानी और नियमन से रोका जा सकता था, संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का हनन करते हैं। अदालत ने स्पष्ट कहा कि असमय मौतें न केवल परिवारों के लिए अपूरणीय क्षति हैं, बल्कि राष्ट्र की सामूहिक शक्ति को भी कमजोर करती हैं। अंता उपचुनाव में वसुंधरा राजे का बयान, ‘जनबल जीतेगा, धनबल हारेगा’ हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार से विस्तृत जवाब तलब किया है।

अदालत ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल भारत व्यास और राज्य सरकार के विभिन्न विभागों के एएजी को निर्देश दिया है कि वे सड़क सुरक्षा के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी दें। कोर्ट ने अधिवक्ताओं मनवेन्द्र सिंह भाटी, शीतल कुम्भाट, अदिति मोअद, हेली पाठक और तान्या मेहता को अमाइकस क्यूरी (न्यायालय मित्र) नियुक्त किया है, जो मामले में अदालत की सहायता करेंगे। इस मामले की अगली सुनवाई 13 नवंबर को होगी। जयपुर बेंच ने भी लिया संज्ञान इधर, जयपुर बेंच ने भी इसी मुद्दे पर दायर एक याचिका पर संज्ञान लिया है। अधिवक्ता राजेन्द्र शर्मा द्वारा दायर इस याचिका में कहा गया है कि जयपुर और राज्य के अन्य हिस्सों में हो रहे हादसे प्रशासनिक लापरवाही और मौजूदा कानूनों के कमजोर अनुपालन का नतीजा हैं। याचिकाकर्ता ने अदालत से केंद्र, राज्य और स्थानीय निकायों को मोटर वाहन अधिनियम, राष्ट्रीय और राज्य सड़क सुरक्षा नीतियों के तहत सख्त कार्रवाई करने के निर्देश देने की मांग की है।

यह याचिका न्यायमूर्ति संजीव शर्मा और न्यायमूर्ति बलजिंदर सिंह संधू की पीठ के समक्ष 6 अगस्त को सुनी जाएगी। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों ने भी राजस्थान में सड़क हादसों की भयावहता को उजागर किया है। वर्ष 2022 में शराब पीकर वाहन चलाने से हुई दुर्घटनाओं में 4,201 लोगों की मौत दर्ज की गई, जबकि 2021 में यह संख्या 19 थी। 2015 में ऐसे मामले कुल हादसों का 1.5 प्रतिशत थे, लेकिन इनमें मौतों की दर सबसे अधिक रही। ये आंकड़े बताते हैं कि शराब पीकर गाड़ी चलाना राज्य में सड़क सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बन चुका है।

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