Latest News

आज का पंचांग 14 जून 2026 : आज अधिक मास की चतुर्दशी तिथि, जानें शुभ मुहूर्त ओर राहूकाल

Neemuch Headlines June 14, 2026, 7:50 am Technology

आज अंग्रेजी तारीख 14 जून 2026 ई.। सूर्य उत्तरायण, उत्तर गोल, ग्रीष्म ऋतु। राहुकाल सायं 05:30 से 07:00 बजे तक। चतुर्दशी तिथि दोपहर 12 बजकर 19 मिनट तक उपरांत अमावस्या तिथि का आरंभ।

रोहिणी नक्षत्र रात्रि 10 बजकर 14 मिनट तक उपरांत मृगशिरा नक्षत्र का आरंभ। धृति योग दोपहर 01 बजकर 15 मिनट तक उपरांत शूल योग का आरंभ।

शकुनि करण दोपहर 12 बजकर 19 मिनट तक उपरांत चतुष्पाद करण का आरंभ। चंद्रमा दिन रात वृषभ राशि पर संचार करेगा।

तिथि कृष्ण चतुर्दशी – दोपहर 12:19 बजे तक, फिर अमावस्या योग धृति – दोपहर 01:15 बजे तक, फिर शूल करण शकुनि – दोपहर 12:19 बजे तक करण चतुष्पाद – रात्रि 10:21 बजे तक, फिर नाग

सूर्य और चंद्रमा की स्थित--

सूर्योदय का समय :-

प्रातः 05:23 बजे

सूर्यास्त का समय :-

सायं 07:20 बजे

चंद्रोदय का समय :-

मध्यरात्रि बाद 05:10 बजे (15 जून)

चंद्रास्त का समय :-

सायं 06:44 बज

आज के व्रत त्योहार :-

कृष्ण चतुर्दशी तिथि

आज का शुभ मुहूर्त :-

अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11 बजकर 54 मिनट से 12 बजकर 49 मिनट तक। अमृत काल सायं 07 बजकर 26 मिनट से रात्रि 08 बजकर 50 मिनट तक। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 3 बजकर 52 मिनट से 4 बजकर 38 मिनट तक।

आज का अशुभ मुहूर्त :-

सायं 05:30 से 07:00 बजे तक राहुकाल रहेगा। दोपहर 03:30 से 05:00 बजे तक गुलिक काल रहेगा। दोपहर 12:00 से 01:30 बजे तक यमगंड रहेगा।

आज का नक्षत्र :-

आज चंद्रदेव रोहिणी नक्षत्र में विराजमान रहेंगे। रोहिणी नक्षत्र: रात्रि 10:14 बजे तक स्थान: 10°00’ वृषभ राशि से 23°20’ वृषभ राशि तक

नक्षत्र स्वामी: चंद्रदेव

राशि स्वामी: शुक्रदेव

देवता: ब्रह्मा या प्रजापति

प्रतीक: बैलगाड़ी का पहिया

सामान्य विशेषताएं :-

इस नक्षत्र में जन्मे लोग बहुत कलात्मक, रचनात्मक और जमीन से जुड़े स्वभाव के होते हैं। ये बातचीत में माहिर, एकाग्र और शांत मन वाले होने के साथ-साथ स्वभाव से ईमानदार और सत्यवादी होते हैं। इनका व्यक्तित्व आकर्षक होता है और ये अपनी कुशलता के बल पर जीवन में खूब मान-सम्मान पाते हैं।

आज का उपाय :-

आज सूर्यदेव को तांबे के लोटे से जल अर्पित करें और गायत्री मंत्र का जाप करें। रविवार के दिन गेहूं, तांबा या लाल रंग के वस्त्रों का दान करना बहुत शुभ माना जाता है। यह कार्य धार्मिक नियमों के सुंदर और सफल संपादन के लिए अत्यंत श्रेष्ठ फलदायी माना जाता है।

Related Post