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जावद के लोकप्रिय बीएमओ डॉ. राजेश मीणा का निधन, सड़क हादसे के बाद से ही जिंदगी और मौत से जंग लड़ रहे थे।

Neemuch headlines June 3, 2026, 7:05 pm Technology

जावद । विधानसभा क्षेत्र की चिकित्सा व्यवस्था को वर्षों तक संभालने वाले और क्षेत्र के बेहद लोकप्रिय ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (BMO) डॉ. राजेश मीणा का आज सुबह इंदौर के एक हास्पिटल में इलाज के दौरान दुखद निधन हो गया। वे पिछले 6 महीनों से एक भीषण सड़क हादसे के बाद से जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहे थे। उनके निधन की खबर से पूरे नीमच जिले और स्वास्थ्य विभाग में शोक की लहर दौड़ गई है। भीषण हादसे के बाद से थे बेड रेस्ट पर प्राप्त जानकारी के अनुसार करीब 6 माह पूर्व इंदौर जाते समय नागदा के पास डॉ. मीणा की कार का जोरदार एक्सीडेंट हो गया था। इस हादसे में उनकी रीढ़ की हड्डी (स्पाइन) टूट गई थी। और उसमें गहरा कट लग गया था। दुर्घटना के बाद से ही वे लगातार बेड रेस्ट पर थे। और उनका इलाज चल रहा था। चिकित्सको के अथक प्रयासों के बावजूद उनके स्वास्थ्य में कोई खास सुधार नहीं हो पा रहा था। और पिछले 10 दिनों से तबीयत अधिक बिगड़ जाने के कारण उन्हें इंदौर के एक अस्पताल के आईसीयू (ICU) में भर्ती कराया गया था। जहां आज बुधवार को उनकी तबीयत अचानक अधिक बिगड़ गई और सुबह उन्होंने अंतिम सांस ली। कोरोना काल के योद्धा और समर्पित चिकित्सक -हंसमुख और मिलनसार व्यक्तित्व के धनी डॉ. राजेश मीणा ने पिछले 15 वर्षों से पूरे जावद विधानसभा क्षेत्र की चिकित्सा व्यवस्था की कमान पूरी मुस्तैदी से संभाल रखी थी। उन्होंने सिंगोली, जावद, डीकेन और रतनगढ़ स्वास्थ्य केंद्रों पर अपनी महत्वपूर्ण सेवाएं दीं। वर्तमान में वे डीकेन ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर के पद पर कार्यरत थे। विशेष रूप से कोरोना महामारी के भीषण दौर में डॉ. मीणा ने अपनी जान की परवाह न करते हुए निस्वार्थ भाव से दिन- रात जनता की सेवा की। और क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था को टूटने नहीं दिया। उनके इसी समर्पण और चिकित्सीय कौशल के कारण पूरे नीमच जिले में उनकी एक विशिष्ट पहचान बन गई थी। नीमच जिले केस्वास्थ्य विभाग को अपूरणीय क्षति - डॉ. राजेश मीणा का इस तरह अचानक से असमय चले जाना नीमच जिले के स्वास्थ्य विभाग और विशेष रुप से जावद क्षेत्र के लिए एक ऐसी अपूरणीय क्षति है, जिसकी पूर्ति कर पाना असंभव है। चिकित्सा जगत ने आज एक समर्पित योद्धा और जनता ने अपना सच्चा शुभचिंतक खो दिया है। अब उनके कार्यों की केवल स्मृतियां ही शेष हैं।

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