पत्रकारिता पर उनगली उठाने से पहले अपने गिरेबान में जरुर झांकिए –हेमंत चतुर्वेदी
नीमच | कृति संस्था द्वारा आयोजित संवाद कार्यक्रम में मुख्य वक्ता पंजाब केसरी (डिजिटल) मध्यप्रदेश - छत्तीसगढ़ के सम्पादक हेमंत चतुर्वेदी ने कहा कि 200 वर्ष पूर्व प्रारम्भ हुए अखबार उदन्त मार्तण्ड का जीवन कुल डेढ़ दो साल रहा क्योंकि उस समय इसके सम्पादक युगलकिशोर शुक्ल को न तो जन सहयोग मिला और न ही तब लोगों को अखबार और समाचारों का महत्व पता था | 1857 की क्रान्ति के बाद देश में नए नये समाचार पत्र छपना शुरू हुए उन्हें जन समर्थन भी मिला और उन्होंने भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम को नयी धार दी| इन अखबारों ने और हिंदी पत्रकारिता ने एक नया इतिहास रच दिया। तब पत्रकारिता और समाचार पत्रों का उद्देश्य अंग्रेजी सत्ता को उखाड़ फेंकना था और उसने अपना यह कार्य पूरा भी किया| लेकिन आजादी के बाद पत्रकारिता और पत्रकार को लगा कि अब किसका विरोध करना और क्यों ? पत्रकार का मूल स्वभाव विद्रोह करना है और उसे जब भी अवसर मिलता है वह व्यवस्था के विरुद्ध उठ खडा होता है। स्वतन्त्रता के बाद मिडिया और अखबारों पर उद्योगपतियों और रसूखदारों का नियन्त्रण हो गया और वे अपने फायदे के लिए सरकारों का समर्थन करने लगे। ऐसे में आज स्वतंत्र पत्रकारिता संभव नही है | 1990 के दशक में पत्रकारिता पर वामपंथियों ने नियन्त्रण स्थापित कर लिया | उन्होंने कुछ पत्रकारों को अपना पार्टनर बना लिया| वे मंत्रिमंडल में मंत्रियो और सरकार में अफसरों की नियुक्तियां कराने लगे | वे बड़े बड़े बंगले बनाने में लग गए | शासन को भी समझ में आने लगा कि बिना पत्रकारों के सहयोग के शासन चलाना संभव नही है | नरसिंह राव सरकार के आने के बाद मीडिया पर बाजारवाद हावी हो गया। रामायण ,महाभारत जैसे धारावाहिकों का स्थान घरों और समाज में विघटन पैदा करने वाले धारावाहिकों ने ले लिया | आज जीवन के हर क्षेत्र में सबने अपना रेवेन्यू माडल स्थापित कर लिया है | पत्रकारिता को भी दूसरों पर अपनी निर्भरता ख़त्म करने के लिए अपना रेवेन्यु माडल विकसित करना ही होगा | पत्रकार या तो अपना मुद्रा करण कर लें या समझौते करते रहें | वह दौर चला गया जब पत्रकारिता मिशन था | बाजारवाद के इस युग में पत्रकारिता को भी अपना बाजार बनाना पडेगा | नीमच में जिस तरह से बिना सरकार के भरोसे सामाजिक गतिविधियाँ संचालित की जाती हैं | आप यहाँ जन सहयोग से अपना समाचार पत्र चला सकते हो जो किसी पर निर्भर न रहे | क्योंकि पत्रकारिता में आज 2 प्रतिशत लोगों की ख़बरें 98 प्रतिशत लोगों को परोसी जा रही | 98 प्रतिशत लोगों की ख़बरों के लिए जनसहयोग वाला माडल अपनाना बहुत जरुरी है | इस कार्य में मैं आपको हर तरह का सहयोग करने को तत्पर हूँ | कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए पत्रकार और कवि धर्मेन्द्र शर्मा ने कहा कि अपने समय में हमने जनता के मुद्दे भी उठाये और अच्छे कामों की तारीफ़ भी की | लेकिन कभी कलम को झुकने नही दिया | सम्पादकीय हर अखबार का आईना होता है | लेकिन आज पाठक सम्पादकीय पृष्ठ पढ़ना ही नही चाहते | हमारी समस्याओं को उठाने के लिए पत्रकारिता की आवश्यकता है किसी की गलती बताने के लिए नही | कार्यक्रम का प्रारम्भ अतिथियों द्वारा सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण से हुआ | अतिथियों का स्वागत कृति अध्यक्ष ओमप्रकाश चौधरी, भरत जाजू, श्रीमती आशा साम्भर, कमलेश जायसवाल ने किया। अपने स्वागत भाषण में कृति संस्था के अध्यक्ष ओमप्रकाश चौधरी ने कहा कि हिंदी पत्रकारिता का 200 वर्ष का सफर गौरवशाली रहा है। उदन्त मार्तण्ड से प्रारम्भ हुई यह यात्रा अखबार से लेकर डिजिटल युग तक आ गई है। कृति का यह कार्यक्रम जीवंत संवाद के रूप में आयोजित किया गया, जिसमें उपस्थित पत्रकारों, साहित्यकारों एवं प्रबुद्धजनों ने पत्रकारिता से जुड़े विभिन्न मुद्दों, मूल्यों, नैतिक दायित्वों तथा वर्तमान परिस्थितियों पर अपने प्रश्न एवं विचार रखे। श्री हेमंत चतुर्वेदी ने सभी जिज्ञासाओं का विस्तार से उत्तर देते हुए पत्रकारिता के मूल सरोकारों और भविष्य की संभावनाओं पर महत्वपूर्ण मार्गदर्शन प्रदान किया। कार्यक्रम का संचालन सत्येन्द्रसिंह राठोर ने किया और डॉ. अक्षय पुरोहित ने आभार व्यक्त किया | इस अवसर पर सकल ब्राम्हण कल्याण समिति के अध्यक्ष दिलीप शर्मा, एडवोकेट और सदस्यों द्वारा हेमंत चतुर्वेदी को शाल व श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया गया|कार्यक्रम में संस्था के सदस्य राजेश जायसवाल, डॉ पृथ्वीसिंह वर्मा, नरेन्द्र पोरवाल, महेंद्र त्रिवेदी, सत्येन्द्र सक्सेना, प्रकाश भट्ट, योगेश पाटीदार, विनोद शर्मा, नरेन्द्र पोरवाल, श्रीमती माधुरी चौरसिया, बाबूलाल गौड़, ओपी सिंहल तथा साहित्य प्रेमी श्रोता निरंजन गुप्ता, प्रियंका कविश्वर, प्रवीण अरोंदेकर, राधेश्याम शर्मा, अनील चौरसिया, जगमोहन कटारिया, मुकेश सहारिया, कपिलसिंह चौहान, दिनेश मनावत आदि उपस्थित थे।