सिंगोली। धीरे धीरे ही सही लेकिन समाज नेत्रदान के प्रति जागरूक हो रहा है। लोग चाहते है कि मृत्यु पश्चात भी लोगों का भला करें। इसलिए मरणोपरात नेत्रदान की प्रवृत्ति बढ़ रही है। नेत्रदान सभी दानों में सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। क्योंकि इस दान से दो जिंदगिया रोशन होती है। जिंदगी भर जिस शख्श ने कभी दुनिया नही देखी और केवल अंधेरे में ही जिया, उनकी आखों में रोशनी आ जाए तो इससे खुशी की बात और क्या हो सकती है। ऐसा ही एक पुण्य का कार्य रविवार को सिंगोली में हुआ।
लसोड़ परिवार द्वारा मांगीलाल जी का इच्छानुसार उनके परिजनों की सहमति से मरणोपरात नेत्रदान किया गया। देहावसान की जानकारी मिलने के बाद प्रातः 8 बजे गोमबाई नेत्रालय की टीम, नेत्रदान की प्रक्रिया अपनाते हुए, मृतक का कॉर्निया कलेक्ट किया।। स्व मागीलाल जी के देहांत के पश्चात, उनके सुपुत्र राजेशकुमार, निलेशकुमार, अरुणकुमार, ने नेत्रदान की स्वीकृति प्रदान की। उन्होंने बताया कि पिताजी बहुत धार्मिक स्वभाव के व्यक्ति थे। परिवार के सदस्यों ने गोमबाई नेत्रालय एवं उनकी डॉक्टर टीम को बहुत बहुत साधुवाद दिया।। गोमबाई नेत्रालय द्वारा परिजनों को प्रशस्ति-पत्र भेंट कर उनकी उदारता, संवेदनशीलता एवं मानवता के प्रति समर्पण का सम्मान किया गया। संस्था ने इस पुनीत कार्य के लिए परिजनों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए समाज से भी नेत्रदान के प्रति जागरूक होने का आह्वान किया।