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आज का पंचांग 31 मई अधिक मास पूर्णिमा व्रत, जानें शुभ मुहूर्त और राहुकाल का समय

Neemuch headlines May 31, 2026, 6:41 am Technology

आज अंग्रेजी तारीख 31 मई 2026 ई.। सूर्य उत्तरायण, उत्तर गोल, वसंत ऋतु। राहुकाल सायं 04:30 से 06:00 बजे तक। पूर्णिमा तिथि दोपहर 02 बजकर 14 मिनट तक उपरांत कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि का आरंभ। अनुराधा नक्षत्र सायं 04 बजकर 12 मिनट तक उपरांत ज्येष्ठा नक्षत्र का आरंभ। शिव योग प्रातः 05 बजकर 25 मिनट तक उपरांत सिद्ध योग का आरंभ। बव करण दोपहर 02 बजकर 14 मिनट तक उपरांत बालव करण का आरंभ।

चंद्रमा दिन रात वृश्चिक राशि पर संचार करेगा। तिथि शुक्ल पूर्णिमा – दोपहर 02:14 बजे तक, फिर कृष्ण प्रतिपदा योग शिव – प्रातः 05:25 बजे तक, फिर सिद्ध करण बव – दोपहर 02:14 बजे तक करण बालव – अगले दिन प्रातः 03:25 बजे (1 जून) तक, फिर कौलव. सूर्य और चंद्रमा की स्थिति--

सूर्योदय का समय :-

प्रातः 05:24 बजे

सूर्यास्त का समय :-

सायं 07:14 बजे चंद्रोदय का समय :-

सायं 07:36 बजे

चंद्रास्त का समय :-

चंद्रास्त नहीं आज के व्रत त्योहार :-

ज्येष्ठ पूर्णिमा व्रत।

आज का शुभ मुहूर्त :-

अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11 बजकर 51 मिनट से 12 बजकर 47 मिनट तक। अमृत काल कोई नहीं। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 3 बजकर 52 मिनट से 4 बजकर 38 मिनट तक।

आज का अशुभ मुहूर्त :-

सायं 04:30 से 06:00 बजे तक राहुकाल रहेगा। दोपहर 03:30 से 04:30 बजे तक गुलिक काल रहेगा। दोपहर 12:00 से 01:30 बजे तक यमगंड रहेगा।

आज का नक्षत्र :-

आज चंद्रदेव अनुराधा नक्षत्र में विराजमान रहेंगे। अनुराधा नक्षत्र: सायं 04:12 बजे तक स्थान: 3°20’ वृश्चिक राशि से 16°40’ वृश्चिक राशि तक नक्षत्र स्वामी: शनिदेव राशि स्वामी: मंगलदेव देवता: मित्र (तालमेल और मित्रता के देवता) प्रतीक: कमल का फूल या सजा हुआ द्वार

सामान्य विशेषताएं :-

इस नक्षत्र में जन्मे लोग कर्तव्यपरायण और ईश्वर में गहरी आस्था रखने वाले होते हैं। ये साहसी, बुद्धिमान और स्पष्टवादी होने के साथ-साथ अत्यंत मेहनती भी होते हैं। अपने आकर्षक व्यक्तित्व और स्वतंत्र विचारों के कारण ये समाज में बहुत सम्मानित स्थान प्राप्त करते हैं।

आज का उपाय :-

आज पूर्णिमा के पावन अवसर पर सत्यनारायण भगवान की कथा सुनें और चंद्रदेव को अर्घ्य दें। रविवार के दिन तांबे के पात्र से सूर्यदेव को जल अर्पित करना और लाल चंदन का तिलक लगाना शुभ होता है। यह कार्य धार्मिक नियमों के सुंदर और सफल संपादन के लिए अत्यंत श्रेष्ठ फलदायी माना जाता है।

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