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भीषण गर्मी में बेजुबान पक्षियों की प्यास और भूख बुझा रही नर सेवा नारायण सेवा समिति

Neemuch headlines May 22, 2026, 8:00 pm Technology

चीताखेड़ा क्षेत्र की सामाजिक संस्था नर सेवा सेवा नारायण नाराय सेवा समिति ने विगत 7 वर्षों से भूखे पेट और प्यासे कंठ को शीतलता पहुंचा ही नहीं रही बल्कि मानवता और संवेदनाओं का अहसास भी करा रही है और बेजुबान पक्षियों के लिए एक सराहनीय कदम उठाया है। संस्था ने पक्षियों को गर्मी और लू से बचाने के लिए बारह महीने प्रतिदिन दाना-पानी अभियान संचालित किए हुए हैं। नर सेवा नारायण सेवा समिति के वरिष्ठ सत्यनारायण गुर्जर ने बताया कि बेझुबान पक्षियों की परेशानियों को देखते हुए यह अभियान चलाया गया है। उन्होंने कहा, पानी और दाने की कमी से हर साल सैकड़ों चिड़िया, गौरैया और कबूतर दम तोड़ देते हैं। वे हमसे बोलकर पानी नहीं मांग सकते, इसलिए हमारा फर्ज है कि हम उनकी मदद करें. नर सेवा नारायण सेवा समिति के नरेश पाटीदार ने क्षेत्र वासियों और ग्रामवासियों से अपील की है कि वे अपने घरों की छत, बालकनी या आंगन में एक मिट्टी के बर्तन में साफ पानी और दूसरी कटोरी में बाजरा, चावल या रोटी के टुकड़े अवश्य रखें। आपका छोटा सा प्रयास किसी बेजुबान की जान बचा सकता है, उन्होंने कहा संस्था द्वारा यह अभियान नर सेवा नारायण सेवा समिति द्वारा बारह महीने संचालित कर रखा है। इस दौरान संस्था के लिए कार्यकर्ता लोगों से संपर्क कर इस अभियान में पूर्ण रूप से सहयोग करने की अपील करेंगे। सुनील शर्मा ने बताया है कि संस्था का लक्ष्य है कि ज्यादा से ज्यादा लोग इस मुहिम से जुड़ें और अपनी छतों को पक्षियों के सुरक्षित बनाएं। संस्था के कमलेश भदेरिया ने कहा कि भीषण गर्मी को देखते हुए सभी का सहयोग जरूरी है। हम चाहते हैं कि इस अभियान में क्षेत्र वासी बढ़ चढ़कर भागीदारी करें। हर घर की छत पर अगर एक पानी का बर्तन और दाना रख दिया जाए तो सैकड़ों पक्षियों की जान बच जाएगी, सभी से अपील की है कि वे अपने-अपने घरों की छत पर दाना-पानी अवश्य रखें और इस मुहिम का हिस्सा बनें। अभियान के तहत नर सेवा नारायण सेवा संस्था द्वारा मोहल्ले मोहल्ले जाकर लोगों को जागरूक करेंगे और सकोरे देंगे। इसके अलावा सार्वजनिक स्थानों जैसे बाजार, बस स्टैंड और पारकों में भी बड़े बड़े बर्तनों में पानी की व्यवस्था की जाएगी, जिसकी देखरेख संस्था के वॉलिंटियर्स रोज करेंगे। स्कूलों में भी बच्चों को पक्षियों के प्रति दया भाव रखने के लिए प्रेरित किया जाएगा। पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार 42-43 डिग्री तापमान में एक छोटी चिड़िया 2-3 घंटे से ज्यादा बिना पानी के जिंदा नहीं रह सकती। गर्मी में तालाब जोहड़ सूख जाते हैं सूख जाते हैं और पेड़ों पर भी पानी नहीं मिलता। ऐसे में छतों पर रखा पानी ही उनके लिए जीवनदान बनता है। एक गौरैया दिन भर में हजारों ऐसे कीड़े खाती है जो फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं। इसलिए पक्षियों को बचाना पर्यावरण और खेती दोनों के लिए जरूरी है। मथुरा लाल 32 194 पाटीदार ने कहा संस्था ने ने कहा संस्था ने अपील की है कि पानी रोज ताजा भरें और बर्तन को छाया में रखें। मिट्टी का बर्तन सबसे अच्छा होता है क्योंकि वह पानी को ठंडा रखता है, दाने में बाजरा, ज्वार, मक्का, टूटा चावल या गेहूं दे सकते हैं। नमकीन या बासी खाना न डालें। बर्तन को ऐसी जगह रखें जहां बिल्ली या कुत्ते आसानी से न पहुंच पाएं। आशीष बसेर ने कहा, नर सेवा नारायण सेवा संस्था का यह प्रयास तभी सफल होगा जब हर नागरिक इसमें साथ देगा। यह किसी एक संस्था का नहीं, पूरे समाज का करेंगे। अभियान है। हम आजिवन बारह महीने लगातार लोगों से संपर्क करेंगे। उन्होंने बताया कि बेजुबान पक्षियों को ओलावृष्टि, भीषण गर्मी, बारिश एवं कड़ाके की ठंड से सुरक्षा (बचाव) हेतु नर सेवा नारायण सेवा समिति द्वारा 12 लाख रुपए की लागत से निवास घर (पक्षी टावर) का निर्माण किया गया है। उम्मीद जताई कि चीताखेड़ा क्षेत्र के लोग इस पुण्य काम में बढ़-चढ़कर सहयोग करेंगे। 20 किलो अनाज रोज डालते हैं पक्षियों को नर सेवा नारायण सेवा समिति के वरिष्ठ दिनेश गुर्जर बताते हैं कि विगत 7 सालों से मूक पक्षियों को की निस्वार्थ भाव से नर सेवा नारायण सेवा समिति बीना प्रचार प्रसार के सेवा में लगे हुए हैं। प्रतिदिन 20 किलो अनाज जिसमें ज्वार, बाजरा, मक्का, चीताखेड़ा :- गर्मी ने इस बार मई के पहले ही सप्ताह में ही अपना रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया है। इंसानों के साथ-साथ बेजुबान पक्षियों का चावल और गेहूं पक्षियों को दाना डालते हैं। जहां पीने के पानी की भी व्यवस्था किए हुए हैं। एकादशी और पूर्णिमा को कराते हैं चिट्ठियों को भंडारा - नर सेवा नारायण सेवा समिति के वरिष्ठ सत्यनारायण गुर्जर और रामसिंह जाट कहते हैं कि नर सेवा नारायण सेवा समिति के सदस्य प्रत्येक एकादशी और पूर्णिमा को आटा, घी, शक्कर, खोपरा, बिस्कुट और काजू सभी बारिक मिक्स करके जहां जहां अधिक चिट्ठियों का रहवास (घर ) होता है वहां नर सेवा नारायण सेवा समिति के सदस्य हाथों में थेलियां लेकर चिट्ठियों की तलाश में निकल पड़ते हैं और जहां दिखी चिट्ठियां उनको भंडारा करवाया जाता है। यहां नेक कार्य विगत पांच वर्षों से निरंतर करते आ रहे हैं। चीताखेड़ा गांव में भी आमजन के लिए तीन वाटर कूलर लगाएं है इस संस्था ने बेजुबान पक्षियों के अलावा आमजन के प्यासे कंठ को प्यास पास बुझाने हेतु अलग-अलग ग-अलग तीन जगहों पर शीतल जल उपलब्ध हेतु वाटर कूलर लगाएं गए हैं।

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