मंदसौर। मंदसौर जिले के पिपलिया मंडी निवासी कैलाश पोरवाल ने अपने दृढ़ संकल्प, मेहनत और सरकारी योजना के सहयोग से न केवल अपनी किस्मत बदली, बल्कि लोगों को शुद्ध और स्वास्थ्यवर्धक तेल उपलब्ध कराने का एक सफल मॉडल भी खड़ा कर दिया।
आज वे “जीटी डायमंड” के नाम से लकड़ी की कच्ची घानी से तेल निकालकर देश के कई राज्यों तक अपनी पहचान बना चुके हैं।
*स्वास्थ्य की चिंता से जन्मा नया संकल्प*
कैलाश पोरवाल बताते हैं कि बाजार में उपलब्ध रिफाइंड और फिल्टर तेल का उपयोग करने से उन्हें स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का अनुभव हुआ। तभी उन्होंने संकल्प लिया कि वे स्वयं शुद्ध तेल का उपयोग करेंगे और लोगों को भी शुद्ध कच्ची घानी का तेल उपलब्ध कराएंगे। इसी सोच ने उन्हें कच्ची घानी से तेल उत्पादन के कार्य की ओर प्रेरित किया।
*आर्थिक तंगी के बीच मिला पीएमएफएमई योजना का सहारा*
शुरुआत में उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती पूंजी की थी। सीमित संसाधनों के कारण यह कार्य शुरू करना आसान नहीं था। इसी दौरान उन्होंने उद्यानिकी विभाग से संपर्क किया, जहाँ उन्हें प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम (PMFME) योजना की जानकारी मिली। योजना के तहत पंजाब नेशनल बैंक, मंदसौर से उन्हें लगभग 30 लाख रुपये का ऋण प्राप्त हुआ, जिस पर 10 लाख रुपये की सब्सिडी भी मिली। इस सहायता से उन्होंने आधुनिक मशीनें और लकड़ी की कच्ची घानी स्थापित की।
*शुद्धता और परंपरा का अनूठा संगम*
कैलाश पोरवाल अपनी इकाई में मूंगफली, सरसों और तिल का तेल तैयार करते हैं। उनकी खासियत यह है कि वे पूरी तरह लकड़ी आधारित कच्ची घानी तकनीक का उपयोग करते हैं। तेल निकालते समय तापमान को विशेष रूप से नियंत्रित किया जाता है, जिससे तेल के प्राकृतिक पोषक तत्व सुरक्षित रहते हैं और उसकी गुणवत्ता बरकरार रहती है।
*देश के कई राज्यों तक पहुंचा मंदसौर का तेल*
आज उनके द्वारा तैयार किया गया शुद्ध कच्ची घानी का तेल आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, असम और गुजरात सहित कई राज्यों में भेजा जा रहा है। वर्तमान में उनकी इकाई में प्रतिदिन लगभग 100 लीटर मूंगफली का तेल, 50 लीटर तिल का तेल, 15 लीटर सरसों का तेल का उत्पादन किया जाता है।
*रोजगार और आय के नए अवसर*
इस छोटे से उद्योग ने न केवल कैलाश पोरवाल की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है, बल्कि 15 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार भी प्रदान किया है। तेल निकालने के बाद बचने वाले कच्चे माल से वे खल (तेल पिंड) भी बनाते हैं, जिसे आंध्र प्रदेश सहित अन्य राज्यों में भेजा जाता है। इससे उनकी आय में अतिरिक्त वृद्धि होती है। वर्तमान में वे इस व्यवसाय से लगभग डेढ़ लाख रुपये प्रतिमाह की आय अर्जित कर रहे हैं, जो आगे और बढ़ने की संभावना है।
*गुणवत्ता की प्रमाणित पहचान*
कैलाश पोरवाल ने अपने तेल की गुणवत्ता को प्रमाणित भी कराया है। परीक्षण में उनके तेल में ट्रांसफैट और कोलेस्ट्रॉल शून्य पाया गया, जो इसे स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी बनाता है।
*भविष्य की नई योजनाएं*
कैलाश पोरवाल अब अपने व्यवसाय का विस्तार करने की योजना बना रहे हैं। भविष्य में वे नारियल और बादाम का तेल भी उत्पादन में शामिल करना चाहते हैं, ताकि उपभोक्ताओं को और अधिक स्वास्थ्यवर्धक विकल्प उपलब्ध कराए जा सकें।
*आत्मनिर्भरता का प्रेरक उदाहरण*
कैलाश पोरवाल की सफलता यह दर्शाती है कि यदि संकल्प मजबूत हो और सही दिशा में प्रयास किए जाएं, तो सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर कोई भी व्यक्ति अपनी तकदीर बदल सकता है। आज वे न केवल एक सफल उद्यमी हैं, बल्कि स्वस्थ भारत और आत्मनिर्भर भारत के संदेशवाहक भी बन चुके हैं।