कर्तव्य पथ पर भारत के मूक “हिम योद्धा” सियाचिन के साथी बैक्ट्रियन ऊंट और जांस्कर पोनी ने बढ़ाई शान

Neemuch headlines January 26, 2026, 3:35 pm Technology

गणतंत्र दिवस 2026 के अवसर पर कर्तव्य पथ ऐतिहासिक पलों का गवाह बना। इस बार की परेड में भारतीय सेना न केवल अपने आधुनिक हथियारों और सैन्य शक्ति का प्रदर्शन किया, बल्कि उन ‘मूक सैनिकों’ को भी दुनिया से रूबरू कराया , जो दुर्गम सीमाओं पर जवानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलते हैं। पहली बार इतने बड़े पैमाने पर सेना का पशु दस्ता (Animal Contingent) परेड का हिस्सा बना। इस विशेष दस्ते में भारतीय सेना के वे जानवर शामिल हुए, जिन्होंने लद्दाख की जमा देने वाली ठंड से लेकर सियाचिन की ऊंचाइयों तक अपनी उपयोगिता साबित की है। परेड में बैक्ट्रियन ऊंट (Bactrian Camels), जांस्कर पोनी, शिकारी पक्षी ‘रेप्टर’ और सेना के विशेष प्रशिक्षित कुत्ते शामिल हुए। यह पहल देश की सुरक्षा में इनके अदम्य योगदान को रेखांकित करने का एक प्रयास है। सियाचिन से लद्दाख तक लॉजिस्टिक्स की रीढ़ भारतीय सीमाओं की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि कई जगहों पर आधुनिक मशीनरी और गाड़ियां भी जवाब दे जाती हैं। ऐसे में ये जानवर ही सेना के लिए रसद और गोला-बारूद पहुंचाने का सबसे विश्वसनीय जरिया बनते हैं। परेड में शामिल होने वाले जांस्कर पोनी और बैक्ट्रियन ऊंट (दो कूबड़ वाले ऊंट) मुख्य रूप से लद्दाख और सियाचिन सेक्टर में तैनात रहते हैं। अत्यधिक ऊंचाई और ऑक्सीजन की कमी के बावजूद ये जानवर भारी बोझ उठाकर दुर्गम रास्तों को पार करने में सक्षम हैं। रामपुर और मुधोल हाउंड का दिखा दम परेड में स्वदेशी नस्ल के कुत्तों को शामिल करना भी एक महत्वपूर्ण संदेश है। इसमें रामपुर और मुधोल नस्ल के हाउंड (Mudhol Hounds) ने अपना कौशल दिखाया। ये कुत्ते अपनी गजब की फुर्ती, वफादारी और सूंघने की क्षमता के लिए जाने जाते हैं। इसके अलावा, शिकारी पक्षी ‘रेप्टर’ का शामिल होना सेना की निगरानी क्षमताओं के पारंपरिक और जैविक पहलुओं को दर्शाता है। इन मूक योद्धाओं को गणतंत्र दिवस की परेड में शामिल करना उन्हें विशेष सम्मान देने जैसा है। अब तक ये जानवर सीमाओं पर खामोशी से अपना कर्तव्य निभाते आए हैं, लेकिन 2026 की परेड में पूरे देश ने इनके अनुशासन और योगदान को करीब से देखा।

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