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आयम्बिल तप आराधना अमृत प्रवचन श्रृंखला, तपस्या करना सरल है त्याग करना कठिन है - साध्वी अमिदर्शा श्री जी महाराज साहब

Neemuch headlines April 3, 2025, 3:50 pm Technology

नीमच ।धर्म के उपदेशों पर चलकर तपस्या करना सरल होता है लेकिन धर्म के प्रति समर्पित और वफादार रहते हुए त्याग करना कठिन होता है। श्रद्धा और समर्पण भाव से तपस्या करें तो आत्म कल्याण हो सकता है नव पद ओली जी की आराधना की तपस्या यदि हम पंचखान का संकल्प लेकर करें तो वह सरलता से पूरी हो सकती है जहां श्रद्धा और विश्वास हो वहां तपस्या से अनेक रोग भी ठीक हो सकते हैं।

तपस्या करना सरल होता है लेकिन त्याग करना कठिन होता है। यह बात साध्वी अमीदर्शा श्री जी मसा ने कही। वे श्री जैन श्वेतांबर भीडभंजन पार्श्वनाथ मंदिर ट्रस्ट नीमच के तत्वावधान में पुस्तक बाजार स्थित पुराने आराधना भवन में आयोजित नवपद आयम्बिल ओली जी आराधना की साधना तपस्या के निमित्त धार्मिक अमृत प्रवचन श्रृंखला में बोल रही थी। उन्होंने कहा कि तपस्या के साथ त्याग भी आवश्यक होता है। यदि हम त्याग के साथ धर्म की शरण में जाए तो मोहिनी कम हमारा कुछ नहीं कर सकता है। चातुर्मास में धार्मिक प्रसंग से संबंधित प्रश्न के प्रति जिज्ञासा का भाव होना चाहिए तभी हमारे धार्मिक संदेश हम समझ सकते हैं। संसार में रहते हुए मनुष्य अपने परिवार पालन पोषण के लिए अनजाने में भी कभी-कभी पाप कर्म करते हुए अपने धार्मिक लक्ष्य से भटक जाता है ऐसे लक्ष्य से भटकाव को रोकने के लिए नवपद ओली जी की आराधना का पर्व हर 6 माह में आता है। नवपद ओली जी की आराधना में रुखा सुखा आहार ग्रहण करते हैं तो आत्मा को सही मार्ग पर ले जा सकते हैं। श्रद्धा और विश्वास हो तो वहां रोग भी ठीक हो सकते हैं। श्रीपाल रास श्रवण करें तो रोगी भी निरोगी बन सकता है। प्रणिधाम तकनीक मे मन वचन काया से एकाग्रता होती है यदि हमारा भाव पवित्र नहीं है तो पूजा का फल भी व्यर्थ हो जाता है। मंदिर में प्रवित्र भाव से पूजा करने से 10 लाख उपवास का फल मिलता है, मंदिर में चैत्य वंदन करने से करोड़ों उपवास का फल मिलता है। धर्म सभा में लब्धि पूर्णा श्री जी महाराज साहब ने कहा कि मनुष्य संसार रहते हुए भी दीक्षा के नियमों पर चलकर दीक्षा भावपूर्वक संयम जीवन को जी सकता है और अपने आत्म कल्याण का मार्ग प्रशस्त कर सकता है।

- नीमच की बेटी साध्वी जिर्णांग पुर्णा श्री जी महाराज साहब ने अपने संबोधन में कहा कि हम जब मंदिर में दर्शन निरंतर करते हैं तो कभी-कभी हमें परमात्मा की प्रतिमा में कुछ परिवर्तन दिखाई देता है तब हमें अनुभव होता है कि परमात्मा हमें दर्शन देते हैं गुरु के प्रति समर्पित भाव से समर्पित होना चाहिए तभी मानव जीवन में हमारा कल्याण हो सकता है। मानव जन्म मिला है तो हमें उसे सफल करने के लिए इंद्रियों पर नियंत्रण कर नव पद ओली जी की आराधना की तपस्या करना चाहिए और जीवन को सार्थक बनाना चाहिए। धर्म सभा में मृदु पूर्णा, प्राप्ति पूर्णा, केवल पूर्णा श्री जी आदि ठाना का सानिध्य भी मिला। नवपद ओली जी तपस्या पर अमृत प्रवचन कल-श्री जैन श्वेताम्बर भीडभंजन पार्श्वनाथ मंदिर ट्रस्ट नीमच के तत्वावधान में साध्वी अमीदर्शा श्री जी महाराज साहब के पावन सानिध्य में प्रतिदिनसुबह 9:15 बजे अमृत धर्म प्रवचन श्रृंखला प्रवाहित हो रही है। सभी समय पर उपस्थित होकर धर्म तत्व ज्ञान गंगा का पुण्य लाभ ग्रहण करें। पुस्तक बाजार स्थित आराधना भवन में प्रतिदिन सुबह 9:15 बजे अमृत धर्म प्रवचन श्रृंखला प्रवाहित हो रही है। सभी समय पर उपस्थित होकर धर्म तत्व ज्ञान गंगा का पुण्य लाभ ग्रहण करें।

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