हरवार। कहते हैं, "खेती का भाग्य बादलों की मर्जी पर टिका होता है।" इन दिनों कुछ ऐसा ही हाल हरवार और आसपास के किसानों का है। कई दिनों से बारिश नहीं होने के कारण खेतों में खड़ी फसलें मुरझाने लगी हैं और किसानों की चिंता सिर पर चढ़कर बोलने लगी है।
ऐसे में गांववासियों ने रविवार को परंपरागत उज्जैनी का आयोजन कर इंद्रदेव को मनाने का अनूठा प्रयास किया। सुबह 6 बजे से ही देवनारायण मंदिर स्थित जोड़ा बावजी परिसर में ढोल-नगाड़ों की गूंज सुनाई देने लगी। पूरा गांव आस्था के रंग में रंग गया। भोपा पंकज जी धनगर के सान्निध्य में हवन-पूजन और विशेष पूजा-अर्चना संपन्न हुई।
श्रद्धालुओं ने नारियल और प्रसाद अर्पित कर अच्छी वर्षा की कामना की। परंपरा के अनुसार पशुओं को भी निकाला गया। बारिश की बेरुखी ने किसानों की नींद उड़ा रखी है। खेतों में खड़ी फसलें दिन चढ़ते ही मुरझाने लगती हैं और किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं। ऐसे हालात में ग्रामीणों ने खेतों और कुओं पर पहुंचकर सामूहिक रूप से दाल-बाटी-चूरमा तैयार किया और इंद्रदेव को भोग अर्पित किया।
ग्रामीणों का मानना है कि जब संकट गहराता है तो आस्था ही सबसे बड़ा सहारा बनती है। उज्जैनी के दौरान इंद्रदेव ने भी मानो ग्रामीणों की पुकार सुन ली और हल्की फुहारों के रूप में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। "डूबते को तिनके का सहारा" बनी इन बूंदों ने किसानों के मन में नई उम्मीद जगा दी है। अब पूरे क्षेत्र की निगाहें आसमान पर टिकी हैं।
किसानों का कहना है कि यदि आने वाले एक-दो दिनों में अच्छी बारिश हो जाती है तो सूखती फसलों को नया जीवनदान मिलेगा और किसानों के चेहरों पर फिर से खुशियों की हरियाली लौट आएगी।