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आजीविका मिशन से बदली जमुनियाखुर्द की महिलाओं की तकदीर, बनीं लखपति दीदी, 14 महिला समूह सक्रिय

Neemuch headlines May 12, 2026, 5:25 pm Technology

नीमच । मध्यप्रदेश के नीमच जिले से करीब 12 किमी दूर नीमच विकासखण्ड का गांव जमुनियाखुर्द आजीविका मिशन की पहल से महिला सशक्तिकरण की मिसाल बन रहा है। गांव की महिलाएं सामाजिक एवं आर्थिक रूप से सक्षम होकर आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही हैं। ग्राम की पृष्ठभूमि एवं समूह गठन: - ग्राम पंचायत जमुनियाखुर्द में पहले स्वयं सहायता समूह नहीं थे। 2019 में सबसे पहले महिलाओं को घर से बाहर निकालकर समूह में संगठित किया गया। आज उसी का परिणाम है कि ग्राम पंचायत में 14 महिला स्वयं सहायता समूह गठित हो चुके हैं।

स्वरोजगार से बनीं लखपति दीदी: -

समूह से जुड़ी श्रीमती मीना खारोल सीआरपी-कृषि सखी एवं लखपति सीआरपी का कार्य कर रही हैं। एनआरएलएम की योजनाओं के क्रियान्वयन के साथ दिया-बत्ती निर्माण एवं ‘किराना एक बगिया माँ’ के नाम से गतिविधि भी संचालित कर रही हैं। इनसे उनकी व्यक्तिगत आय प्रतिदिन 800 रूपये, प्रतिमाह 24 हजार रूपयेएवं प्रतिवर्ष 2 लाख 88 हजार रूपये हो गई है। समूह में जुड़ी उनकी देवरानी एवं सास कृषि एवं पशुपालन गतिविधि से लगभग ₹80,000 प्रतिवर्ष कमा रही हैं। समूह से जुड़ने से पहले ये महिलाएं गृह कार्य एवं मजदूरी करती थीं और आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। समूह से जुड़ने के बाद गतिविधियों से जुड़कर वर्तमान स्थिति अच्छी हो गई है, सामाजिक छवि में सुधार हुआ है एवं ये ‘लखपति दीदी’ बन गई हैं। समूह से जुड़ने के बाद पक्का मकान बनाया, ट्रैक्टर एवं बाइक खरीदी तथा बच्चे अच्छे स्कूल में पढ़ाई कर रहे हैं।

प्रेरणा बनीं मीना खारोल:-

ग्राम में कुछ महिलाएं ग्रेजुएट एवं पोस्ट ग्रेजुएट तक पढ़ी-लिखी हैं, परंतु सामाजिक परम्पराओं के कारण घर से बाहर नहीं जाती थीं। श्रीमती मीना खारोल द्वारा ग्राम में विभिन्न आजीविका गतिविधियां प्रारंभ करने से दूसरी महिलाएं भी स्वरोजगार की ओर प्रेरित हो रही हैं, जिससे उनके परिवारजनों को भी रोजगार के अवसर मिल रहे हैं। आय अर्जन को मिला बढ़ावा: मीना खारोल के स्व-सहायता समूह के सदस्यों ने रिवॉल्विंग फंड से प्राप्त 10 हजार रूपयेएवं स्वयं की बचत का उपयोग खेती, पशुपालन एवं अन्य आय अर्जन गतिविधियों में किया जा रहा है।

संगठनात्मक पहल से सुविधाओं का विस्तार: म.प्र.राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के प्रयासों से महिला स्वयं सहायता समूह के गठन, सशक्तिकरण एवं बैंक तथा मिशन से प्राप्त धनराशि की उपलब्धता से समूह सदस्यों एवं परिवारजनों हेतु रोजगार के अवसर सृजित हुए हैं। वहीं ग्राम विकास हेतु शासन एवं ग्राम पंचायत के माध्यम से प्रयास तेज हो रहे हैं।

अब ग्राम में विकास की बयार बह रही है और पंचायती राज संस्थाओं को भी मजबूती मिल रही है।

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