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नवरात्र की घटस्थापना और श्रद्धा का संगम, नुकीले पत्थरों पर थिरके कदम,

भगत माँगरिया March 19, 2026, 5:22 pm Technology

अलीराजपुर की भगोरिया नृत्य टीम ने अपनी लोक संस्कृति से मोहा सबका मन; मुस्लिम भाई बने माँ के रथ के सारथी

​चीताखेड़ा। राजस्थान और मध्य प्रदेश की सीमा पर स्थित मालवा के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल आरोग्य देवी महामाया आवरी माता मंदिर में गुरुवार को चैत्र नवरात्रि के पावन पर्व पर आस्था का अनूठा सैलाब उमड़ा। विशेष रथ में सवार होकर नगर भ्रमण पर निकली जगत जननी मां आवरी माताजी।

मां आवरी माताजी के जयकारों से गूंजा चीताखेड़ा नगर।पारंपरिक पैदल कलश एवं चुनरी यात्रा के साथ ही नौ दिवसीय विशाल मेला महोत्सव का भव्य श्रीगणेश हुआ। इस दौरान निर्माणाधीन सड़क के नुकीले पत्थरों की परवाह किए बिना हजारों श्रद्धालु नाचते-झूमते माता के जयकारे लगाते एवं सड़क ठेकेदार को कोसते भला-बुरा बोलते हुए मंदिर पहुंचे। चैत्र नवरात्र पर्व के प्रथम दिन भौर की पहली किरण के साथ ही मां जगदम्बा के जयकारों की पावन गूंज उठी और तीन लोकों की स्वामिनी देवी महामाया आवरी माताजी भव्य रथ में सवार होकर अपनी प्रजा के बीच निकली, तो पूरा चीताखेड़ा नगर मानों सनातनी मां जगदम्बा के रंग में रंग गया। हर आंख अपनी आराध्य देव के दर्शन को आतुर थी और हर जुबान पर मां आवरी के जयकारे थे।

अवसर था जगत जननी मां आवरी माताजी के नौ दिवसीय भव्य मेला महोत्सव का,जिसे गुरुवार को पूरे नगर में अपार उत्साह,श्रद्धा, भक्ति और अभूतपूर्व उत्साह के साथ मनाया।

भगोरिया नृत्य ने बांधा समां :- ​

इस वर्ष की यात्रा का मुख्य केंद्र अलीराजपुर जिले से आई भगोरिया नृत्य टीम रही। पारंपरिक वेशभूषा में सजे आदिवासी युवाओं ने एक हाथ में तीर-कमान और दूसरे में छाता लेकर, वहीं युवतियों ने हाथों में रुमाल लहराते हुए काका बाबा ना पोरिया .........., क्यूं मारी रे क्यूं कुटी रे..........,"तारो रातेलो रुमाल..." और "काका बाबा ना पोरिया..." जैसे लोकगीतों पर हैरतअंगेज नृत्य प्रस्तुत किया। अंचल के लोगों के लिए यह नृत्य नया और कौतूहल भरा था, जिसे हर कोई अपने मोबाइल में कैद करता नजर आया।

सांप्रदायिक सौहार्द की अनूठी मिसाल :-

​क्षेत्र में आपसी भाईचारे की मिसाल उस समय देखने को मिली जब माँ जगदंबा के विशेष रथ के सारथी कादर भाई बने। मुस्लिम समाज के कादर भाई द्वारा माँ का रथ हांकना श्रद्धा और एकता का प्रतीक बना रहा। यात्रा सुबह 9:30 बजे बजरंग मंदिर से प्रारंभ हुई, जिसमें 151 फीट लंबी चुनरी आकर्षण का केंद्र रही। ​चुनरी यात्रा जिस मार्ग से गुजरी, वहां ग्रामीणों ने फूलों की वर्षा की और द्वार-द्वार पर माता की पूजा-अर्चना की गई। अभिजीत मुहूर्त में पंडित शिव शंकर शर्मा द्वारा विधि-विधान से घटस्थापना की गई। 9 दिनों तक यहाँ अखंड जाप और हवन पूजन चलेगा। पहले ही दिन मेला परिसर में झूला-चकरी और खान-पान की दुकानों पर भारी भीड़ उमड़ी। युवाओं ने चाट, पाव भाजी और गन्ने के रस का आनंद लिया। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चीताखेड़ा चौकी प्रभारी राजेंद्र सिंह सिसौदिया अपनी पुलिस टीम के साथ पूरी तरह मुस्तैद रहे।

*​सेवा का भाव* ​चुनरी यात्रा में शामिल भक्तों की थकान मिटाने के लिए जगह-जगह ठंडा पेय पदार्थ, रसना और जल सेवा की स्टॉल लगाई गईं। धूप और खराब सड़क के बावजूद भक्तों का उत्साह चरम पर था।

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