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आज शीतला अष्टमी तिथि, जानें शुभ मुहूर्त का समय

Neemuch headlines March 11, 2026, 8:32 am Technology

आज सिद्धि योग का संयोग है, जो कार्यों में सफलता और बड़ी इच्छाएं पूरी करने के लिए शुभ है। आज के दिन अपनी हाजिरजवाबी और साहसी स्वभाव का सही उपयोग करें। यदि मन में थोड़ा गुस्सा आए, तो उसे केवल सुधार के संकेत के रूप में देखें।

आज अभिजीत मुहूर्त नहीं है, इसलिए महत्वपूर्ण कार्यों के लिए दोपहर 12:08 से 01:55 बजे तक के

अमृत काल का लाभ उठाएं।

महत्वपूर्ण विवरण तिथि कृष्ण अष्टमी – प्रातः 04:19 बजे तक (12 मार्च), फिर

नवमी योग वज्र – प्रातः 09:12 बजे तक, फिर सिद्धि करण बलव – दोपहर 03:08 बजे तक

करण कौलव – प्रातः 04:19 बजे तक (12 मार्च), फिर तैतिल सूर्य और चंद्रमा की स्थिति

सूर्योदय का समय प्रातः 06:36 बजे

सूर्यास्त का समय सायं 06:27 बजे

चंद्रोदय का समय रात्रि 01:54 बजे (12 मार्च) चंद्रास्त का समय प्रातः 11:07 बजे सूर्य और चंद्रमा की राशियां सूर्य देव: कुंभ राशि में स्थित हैं चन्द्र देव: वृश्चिक राशि में स्थित हैं – रात्रि 10:00 बजे तक

आज के शुभ मुहूर्त अभिजीत मुहूर्त

आज अभिजीत मुहूर्त नहीं है अमृत काल दोपहर 12:08 बजे से दोपहर 01:55 बजे तक

आज के अशुभ समय

राहुकाल दोपहर 12:31 बजे से दोपहर 02:00 बजे तक

गुलिकाल प्रातः 11:02 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक

यमगण्ड प्रातः 08:05 बजे से प्रातः 09:33 बजे तक

आज का नक्षत्र आज चंद्रदेव ज्येष्ठा नक्षत्र में विराजमान रहेंगे। ज्येष्ठा नक्षत्र: रात्रि 10:00 बजे तक स्थान: 16°40’ वृश्चिक राशि से 30°00’ वृश्चिक राशि तक नक्षत्र स्वामी: बुधदेव राशि स्वामी: मंगलदेव देवता: इंद्र (देवताओं के राजा) प्रतीक: कुंडल, छाता या ताबीज

सामान्य विशेषताएं:-

अत्यधिक महत्वाकांक्षी, बुद्धिमान, चतुर योजनाकार, साहसी, व्यावहारिक, तार्किक, दार्शनिक, हाजिरजवाब, स्वाभिमानी, संकट में माहिर, थोड़े गुस्सैल, कम मित्र वाले और लक्ष्य के प्रति कठोर। आज शीतला अष्टमी (बसोड़ा) है

शीतला अष्टमी (बसोड़ा) 2026 पूजा मुहूर्त: सुबह 06:36 से शाम 06:27 तक अवधि: 11 घंटे 51 मिनट शीतला अष्टमी का पर्व मां शीतला को समर्पित है,

जो होली के पश्चात कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। इसे राजस्थान, उत्तर प्रदेश और गुजरात में 'बसोड़ा' के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन घर में भोजन पकाने के लिए आग नहीं जलाई जाती है। अधिकांश परिवार एक दिन पहले ही पकवान तैयार कर लेते हैं और अष्टमी के दिन बासी भोजन का ही सेवन करते हैं। माना जाता है कि मां शीतला चेचक और अन्य संक्रमण वाली बीमारियों को नियंत्रित करती हैं। भक्त उत्तम स्वास्थ्य और जीवन के सही संचालन के लिए मां की पूजा पूरी सहजता से करते है।

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