चैत्र कृष्ण सप्तमी के अवसर पर 'शीतला सप्तमी' का पर्व श्रद्धा के साथ मनाया जाएगा। आरोग्यता की देवी मां शीतला की पूजा का यह दिन बीमारियों से मुक्ति और जीवन के सही संचालन के लिए बहुत खास माना जाता है। आज चंद्रदेव वृश्चिक राशि और अनुराधा नक्षत्र में रहेंगे।
अनुराधा नक्षत्र के प्रभाव से स्वभाव में जिम्मेदारी निभाने की भावना और साफ-साफ बात कहने की खूबी बनी रहेगी, जो समाज में सम्मान दिलाती है। आज हर्षण योग का संयोग है, जो मन में प्रसन्नता और बड़ी इच्छाएं पूरी करने के लिए नई उमंग लेकर आएगा।
दिन के बेहतर लाभ के लिए दोपहर 12:08 से 12:55 बजे तक के अभिजीत मुहूर्त का उपयोग करें।
राहुकाल के समय सावधानी रखें और मन में आने वाले किसी भी स्वार्थ को केवल सुधार के संकेत के रूप में देखें।
महत्वपूर्ण विवरण तिथि कृष्ण सप्तमी – रात्रि 01:54 बजे तक (11 मार्च), फिर
अष्टमी योग हर्षण – प्रातः 08:21 बजे तक, वज्र करण विष्टि – दोपहर 12:40 बजे तक करण बव – रात्रि 01:54 बजे तक (11 मार्च), फिर बलव सूर्य और चंद्रमा की स्थिति
सूर्योदय का समय प्रातः 06:37 बजे
सूर्यास्त का समय सायं 06:26 बजे
चंद्रोदय का समय रात्रि 01:01 बजे (11 मार्च)
चंद्रास्त का समय प्रातः 10:21 बजे सूर्य और चंद्रमा की राशियां सूर्य देव: कुंभ राशि में स्थित हैं चन्द्र देव: वृश्चिक राशि में स्थित हैं आज के शुभ मुहूर्त
अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:08 बजे से दोपहर 12:55 बजे तक
अमृत काल प्रातः 07:26 बजे से प्रातः 09:13 बजे तक
आज के अशुभ समय राहुकाल दोपहर 03:29 बजे से सांय 04:58 बजे तक
गुलिकाल दोपहर 12:32 बजे से दोपहर 02:00 बजे तक
यमगण्ड प्रातः 09:34 बजे से प्रातः 11:03 बजे तक
आज का नक्षत्र आज चंद्रदेव अनुराधा नक्षत्र में विराजमान रहेंगे।
अनुराधा नक्षत्र: सायं 07:05 बजे तक स्थान: 3°20’
वृश्चिक राशि से 16°40’ वृश्चिक राशि तक नक्षत्र स्वामी: शनिदेव राशि स्वामी: मंगलदेव देवता: मित्र (तालमेल और मित्रता के देवता) प्रतीक: कमल का फूल या सजा हुआ द्वार
सामान्य विशेषताएं:-
सुंदर बाल और पलकें, कर्तव्यपरायण, ईश्वर में आस्था, साहसी, बुद्धिमान, स्पष्टवादी, मेहनती, समाज में सम्मानित, आकर्षक व्यक्तित्व, थोड़े स्वार्थी, स्वतंत्र विचार और रिश्तों में गंभीर। आज शीतला सप्तमी है
शीतला सप्तमी 2026 सप्तमी तिथि प्रारंभ: 09 मार्च, 2026 को रात 11:27 बजे सप्तमी तिथि समाप्त: 10 मार्च, 2026 को रात 01:54 बजे
हिंदू परंपरा में शीतला सप्तमी का विशेष महत्व है, जो अष्टमी से एक दिन पहले मनाई जाती है। इस दिन मां शीतला की उपासना की जाती है, जिन्हें आरोग्यता और स्वच्छता की देवी माना जाता है।
सप्तमी तिथि पर पूजा का शुभ मुहूर्त सूर्योदय से सूर्यास्त तक रहता है, जिसमें भक्त पूरी श्रद्धा और सहजता से अनुष्ठान संपन्न करते हैं। इस पर्व की मुख्य विशेषता 'बसोड़ा' परंपरा के अंतर्गत बासी भोजन का भोग लगाना है। मान्यता है कि मां की कृपा से परिवार रोगों से सुरक्षित रहता है और जीवन का सही संचालन होता है। भक्त ठंडे पकवानों का सेवन कर बड़ी इच्छाएं पूरी होने की कामना करते हैं। बेहतर मार्गदर्शन और जीवन के सही संचालन के लिए आप एस्ट्रोपत्री के ज्योतिषियों से बात कर सकते हैं।